राजनीति

केरल CM पिनराई विजयन पर ED का शो-कॉज नोटिस: 466 करोड़ की FEMA उल्लंघन, मसाला बॉन्ड घोटाले में फंसे

केरल CM पिनराई विजयन पर ED का शो-कॉज नोटिस: 466 करोड़ की FEMA उल्लंघन, मसाला बॉन्ड घोटाले में फंसे

केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन की मुश्किलें बढ़ गई हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने KIIFB मसाला बॉन्ड मामले में 466.91 करोड़ रुपये की कथित विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) उल्लंघन के लिए विजयन, पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक और CM के प्रधान सचिव K.M. अब्राहम को शो-कॉज नोटिस जारी किया है। यह नोटिस 12 नवंबर को भेजा गया था, जो जांच के बाद एडजुडिकेशन प्रक्रिया का हिस्सा है। ED का आरोप है कि KIIFB द्वारा विदेशों में जारी किए गए 2,000 करोड़ रुपये के मसाला बॉन्ड्स के एक हिस्से का दुरुपयोग हुआ, जो RBI के नियमों का उल्लंघन है।

KIIFB (केरल इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट फंड बोर्ड) राज्य सरकार का प्रमुख इकाई है, जो बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को फाइनेंस करती है। 2019 में KIIFB ने लंदन स्टॉक एक्सचेंज पर पहली बार मसाला बॉन्ड्स (रुपये-आधारित विदेशी बॉन्ड्स) जारी कर 2,150 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसका मकसद 50,000 करोड़ रुपये जुटाकर सड़कें, स्कूल, अस्पताल जैसे प्रोजेक्ट्स फंड करना था। ED की जांच में पाया गया कि इन फंड्स का एक हिस्सा (466.91 करोड़ रुपये) जमीन खरीदने में इस्तेमाल हुआ, जो RBI की मास्टर डायरेक्शन नंबर के तहत निषिद्ध है। यह फंडिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए था, न कि रियल एस्टेट के लिए। कुल बॉन्ड्स 2,672.80 करोड़ रुपये के थे, लेकिन एंड-यूज में अनियमितताएं पाई गईं।

नोटिस में व्यक्तिगत हाजिरी की जरूरत नहीं है, लेकिन यह जुर्माने जैसा है। ED ने जांच के बाद यह नोटिस जारी किया, जो 3 साल से ज्यादा चली। विजयन KIIFB के चेयरमैन हैं, इसाक वाइस-चेयरमैन थे, और अब्राहम CEO हैं। इस मामले ने केरल की LDF सरकार पर सवाल खड़े कर दिए हैं, खासकर लोकसभा चुनावों से पहले। विपक्षी दल कांग्रेस ने इसे ‘भ्रष्टाचार का सबूत’ बताया, जबकि BJP ने CBI जांच की मांग की।

CPM ने नोटिस को ‘चुनावी प्रचार’ करार दिया। पूर्व मंत्री इसाक ने कहा, “FEMA का कोई उल्लंघन नहीं हुआ। ED का मकसद कुछ न कुछ खोजना है। KIIFB हजारों करोड़ के प्रोजेक्ट्स चला रही है, लेकिन राजनीतिक मालिकों को लगता है कि खुदाई से कुछ मिल जाएगा।” उन्होंने नोटिस 4 दिन पहले मिलने की पुष्टि की। CMO ने अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन स्रोतों के मुताबिक, सरकार कानूनी सलाह ले रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह केस केरल की फाइनेंशियल अखंडता पर सवाल उठाता है। मसाला बॉन्ड्स पहली बार किसी राज्य ने जारी किए थे, जो अब विवादों में फंस गए। अगर ED की दलील सही साबित हुई, तो भारी जुर्माना लग सकता है। क्या यह राजनीतिक साजिश है या वाकई गड़बड़ी? केरल की सियासत में यह मुद्दा गरमाता जा रहा है, और नतीजे आने तक तनाव बना रहेगा।

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