राजनीति

महाराष्ट्र लोकल बॉडी चुनावों में बड़ा उलटफेर: 20+ जगहों पर वोटिंग टली, अपीलों की गड़बड़ी बनी वजह

महाराष्ट्र लोकल बॉडी चुनावों में बड़ा उलटफेर: 20+ जगहों पर वोटिंग टली, अपीलों की गड़बड़ी बनी वजह

महाराष्ट्र में 246 नगर परिषदों और 42 नगर पंचायतों के चुनावों को लेकर हड़कंप मच गया है। राज्य निर्वाचन आयोग (SEC) ने अपील प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताओं के चलते करीब 20 से ज्यादा जगहों पर वोटिंग टाल दी है। पुणे, ठाणे, अमरावती, अहिल्यानगर, नांदेड़, सोलापुर, यवतमाल, धाराशिव, चंद्रपुर, अकोला जैसे जिलों में प्रभावित वार्डों और परिषदों में अब 20 दिसंबर को मतदान होगा। बाकी सभी जगहों पर निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक 2 दिसंबर को वोटिंग और 3 दिसंबर को रिजल्ट घोषित होंगे।

SEC के अनुसार, नामांकन पत्र रद्द करने से जुड़ी अपीलों का निपटारा 22 नवंबर की तय समयसीमा के बाद हुआ, जिससे उम्मीदवारों को तीन दिनों का विड्रॉअल विंडो नहीं मिल सका। महाराष्ट्र म्यूनिसिपल इलेक्शन रूल्स 1966 के नियम 17(1)(b) का उल्लंघन होने से सिंबल अलॉटमेंट अमान्य हो गया। आयोग ने प्रभावित सीटों के लिए पूरी प्रक्रिया निलंबित कर दोबारा शुरू करने का आदेश दिया। पुणे जिले में बारामती, फुरसुंगी-उरली देवाची, कोपरगांव, देवलाली, नेवासा, पाथरडी जैसी छह परिषदें प्रभावित हैं, जहां मेयर पद और कई काउंसलर सीटें शामिल हैं। ठाणे के अंबर्नाथ में 59 वार्ड, बादलापुर में 6, मराठवाड़ा में 18 वार्ड और अन्य जिलों में कुल 25+ जगहें टली हैं।

यह फैसला चुनाव प्रचार के अंतिम चरण में आया, जब पार्टियां जोर-शोर से कैंपेनिंग कर रही थीं। SEC ने कहा कि देरी से न्यायिक फैसलों ने चुनाव की अखंडता को खतरे में डाला। कुछ मामलों में अपीलें सुनवाई के बिना लंबित रहीं या लिखित फैसले जारी नहीं हुए। बृहन्मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनाव 2026 में होंगे, लेकिन छोटी बॉडीज पर फोकस है। विपक्षी दलों ने SEC पर पक्षपात का आरोप लगाया, जबकि सत्ताधारी महायुति ने इसे ‘निष्पक्ष कदम’ बताया। एक वकील ने कहा, “यह देरी लोकतंत्र के लिए झटका है, लेकिन नियमों का पालन जरूरी।”

2 दिसंबर को सुबह 7:30 से शाम 5:30 बजे तक वोटिंग बाकी जगहों पर सुचारू रहेगी। SEC ने मतदाताओं से अपील की कि वे फर्जी खबरों से सावधान रहें और आधिकारिक अपडेट चेक करें। रिजल्ट 3 दिसंबर सुबह 10 बजे के बाद आएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टालमटोल स्थानीय शासन पर असर डालेगा, खासकर विकास कार्यों पर। क्या यह चुनावी घमासान को और लंबा खींचेगा? महाराष्ट्र की सियासत में नजरें टिकी हैं।

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