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अमेरिका में शरणार्थी फैसलों पर पूर्ण रोक: नेशनल गार्ड गोलीकांड के बाद ट्रंप का कड़ा कदम

अमेरिका में शरणार्थी फैसलों पर पूर्ण रोक: नेशनल गार्ड गोलीकांड के बाद ट्रंप का कड़ा कदम

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने नेशनल गार्ड के दो सदस्यों पर गोलीबारी के सदमे के तुरंत बाद एक बड़ा फैसला लिया है। शुक्रवार को यूएस सिटिजनशिप एंड इमिग्रेशन सर्विसेज (यूएससीआईएस) ने सभी शरणार्थी (एजाइलम) आवेदनों पर फैसले रोक दिए हैं। साथ ही, अफगान पासपोर्ट धारकों के लिए वीजा जारी करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए है, लेकिन इमिग्रेशन विशेषज्ञ इसे ‘अत्यधिक कठोर’ बता रहे हैं।

घटना बुधवार को व्हाइट हाउस के पास हुई, जहां 29 वर्षीय अफगान नागरिक रहमानुल्लाह लकानवाल ने नेशनल गार्ड के दो सदस्यों पर गोली चलाई। एक सदस्य की मौके पर मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। लकानवाल 2021 में बाइडेन प्रशासन के ‘ऑपरेशन एलाइज वेलकम’ प्रोग्राम के तहत अमेरिका आया था, जो अफगानिस्तान से अमेरिकी सहयोगियों को निकालने के लिए शुरू किया गया था। उसका शरणार्थी आवेदन अप्रैल 2025 में ट्रंप प्रशासन के दौरान मंजूर हुआ था। ट्रंप ने इसे ‘आतंकी हमला’ करार देते हुए बाइडेन की नीतियों पर निशाना साधा और सोशल मीडिया पर ‘तीसरी दुनिया के देशों से आप्रवासन पर स्थायी रोक’ का ऐलान किया।

यूएससीआईएस के निदेशक जोसेफ एडलो ने एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा, “हम हर विदेशी की जांच को अधिकतम स्तर तक सुनिश्चित करने तक सभी शरणार्थी फैसले रोक रहे हैं। अमेरिकी लोगों की सुरक्षा सर्वोपरि है।” होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने अफगानिस्तान से संबंधित सभी आवेदनों की समीक्षा शुरू कर दी है। स्टेट डिपार्टमेंट ने अफगान सहयोगियों के लिए वीजा भी निलंबित कर दिए, जो अमेरिकी सेना के साथ काम कर चुके थे।

यह फैसला ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की कट्टर आप्रवासन नीति का हिस्सा लगता है। पहले कार्यकाल में उन्होंने दक्षिणी सीमा सील की थी, जिससे शरणार्थी दावे 90% घट गए थे। अब यह रोक उन लोगों को प्रभावित करेगी जो पहले से अमेरिका में हैं और उत्पीड़न के डर से शरण मांग रहे हैं। इमिग्रेशन एडवोकेट्स ने इसे ‘क्रूर’ बताया। एसीएलयू की प्रवक्ता ने कहा, “यह सुरक्षा का बहाना है, मानवीय संकट को नजरअंदाज करने का। लाखों अफगान तालिबान के खतरे में हैं।”

डेमोक्रेट्स ने विरोध जताया है। सीनेटर चक शूमर ने कहा, “ट्रंप डर का इस्तेमाल कर अमेरिका के मूल्यों को कुचल रहे हैं।” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त राष्ट्र ने चिंता जताई है। यूएनएचसीआर के अनुसार, 2025 में 2.5 लाख अफगानों ने अमेरिका में शरण मांगी थी।

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि नई जांच प्रक्रिया जल्द पूरी होगी, लेकिन विशेषज्ञों का अनुमान है कि इससे शरणार्थी बैकलॉग बढ़ेगा। फिलहाल, हजारों आवेदक अनिश्चितता में हैं। क्या यह रोक स्थायी बनेगी? आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट की भूमिका तय करेगी।

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