उत्तराखंड

मसूरी-लंढौर में धंस रही जमीन: जोशीमठ जैसी आपदा का साया, 15% इलाका डेंजर जोन में

मसूरी-लंढौर में धंस रही जमीन: जोशीमठ जैसी आपदा का साया, 15% इलाका डेंजर जोन में

उत्तराखंड की पर्यटन नगरी मसूरी के लंढौर इलाके में जमीन धंसने और भूस्खलन की घटनाओं ने दहशत फैला दी है। गलियां बैठ रही हैं, घरों व दुकानों की दीवारों पर चौड़ी दरारें पड़ रही हैं, और सड़कें खिसक रही हैं। स्थानीय निवासी जोशीमठ की 2023 वाली त्रासदी की यादों से कांप रहे हैं, जहां हजारों लोग बेघर हो गए थे। वाडिया हिमालयन जियोलॉजिकल इंस्टीट्यूट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, मसूरी का 15% इलाका भूस्खलन के उच्च जोखिम वाले डेंजर जोन में है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना तत्काल कदम के यहां भी बड़े हादसे का खतरा मंडरा रहा है।

लंढौर बाजार से घंटाघर तक का 100 मीटर लंबा इलाका पिछले 30 वर्षों से धंस रहा है, लेकिन अब हालात बेकाबू होते नजर आ रहे हैं। स्थानीय निवासी प्रवीण पंवार ने बताया, “हमारे जैन मंदिर की टाइलें टूट रही हैं, घरों में दरारें रातोंरात बढ़ जाती हैं। रात को सोते वक्त डर लगता है कि कहीं सब ढह न जाए।” सितंबर 2025 में भारी बारिश के बाद झड़ीपानी क्षेत्र में धंसाव तेज हो गया, जहां हर दिन 2-3 फीट जमीन नीचे धंस रही है। 15 सितंबर को एक नेपाली मजदूर मलबे में दबकर मर गया, और कई घरों को खाली कराना पड़ा। पर्यटन मार्ग असुरक्षित हो चुके हैं, जिससे होटल मालिकों को नुकसान हो रहा है।

वाडिया इंस्टीट्यूट की रिपोर्ट में बाटाघाट, जॉर्ज एवरेस्ट, कैंप्टी फॉल, खट्टा पानी, लाइब्रेरी रोड, झड़ीपानी, गलोगीधार और हाथीपांव जैसे इलाकों को हाई रिस्क बताया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि अनियंत्रित निर्माण, भारी बारिश और पुरानी सड़कों का खोदाई मुख्य कारण हैं। केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) की टीम ने अप्रैल 2025 में लंढौर बाजार का सर्वे किया, जहां ऊंची इमारतों को बिना मानक के बनाए जाने का खुलासा हुआ। जिला प्रशासन ने भूवैज्ञानिक सर्वे शुरू कर दिया है, लेकिन स्थानीयों का आरोप है कि कार्रवाई में देरी हो रही है। एसडीएम शैलेंद्र नेगी ने कहा, “जांच रिपोर्ट के आधार पर आरसीसी वॉल, चेकडैम और पुनर्वास की योजना बनेगी।” मसूरी नगर पालिका ने कुछ घरों को डेंजर जोन घोषित किया है, लेकिन राहत सामग्री का इंतजार है।

जोशीमठ की तरह यहां भी जल निकासी की कमी और अवैध खुदाई ने हालात बिगाड़े हैं। 2023 के जोशीमठ हादसे के दो साल बाद भी वहां पुनर्वास अधर में लटका है, जहां 1,600 करोड़ मंजूर होने के बावजूद सिर्फ 40 करोड़ खर्च हुए। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन से बढ़ती बारिश और पहाड़ी निर्माण मॉडल में बदलाव जरूरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सर्वे को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं, लेकिन विपक्ष ने लापरवाही का आरोप लगाया है।

मसूरी की यह ‘रानी’ अब खतरे की घंटी बजा रही है। स्थानीय महिला सुशीला देवी ने कहा, “बच्चों को स्कूल भेजना मुश्किल हो गया है। कब तक यह डर सहेंगे?” प्रशासन ने NDRF टीम तैनात की है, लेकिन बड़े पैमाने पर राहत की प्रतीक्षा जारी है। क्या मसूरी जोशीमठ 2.0 बनेगी? समय रहते कदम उठाना जरूरी है।

 

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