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दक्षिण-पूर्व एशिया में मानसून का प्रकोप: बाढ़ ने थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया को तबाह कर दिया

दक्षिण-पूर्व एशिया में मानसून का प्रकोप: बाढ़ ने थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया को तबाह कर दिया

दक्षिण-पूर्व एशिया में असामान्य रूप से भारी मानसून वर्षा ने थाईलैंड, वियतनाम और मलेशिया को भयावह बाढ़ की चपेट में डाल दिया है। सड़कें पानी में डूब गईं, लाखों लोग बेघर हो गए और सैकड़ों की जानें जा चुकी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जलवायु परिवर्तन के कारण यह आपदा पहले से कहीं अधिक विनाशकारी साबित हो रही है।

थाईलैंड के दक्षिणी हिस्सों में स्थिति सबसे गंभीर है। हत याई शहर में 300 वर्षों में सबसे अधिक वर्षा (600 मिमी से ज्यादा) दर्ज की गई, जिससे पूरा शहर जलमग्न हो गया। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, यहां 33 लोगों की मौत हो चुकी है, ज्यादातर बिजली के करंट और भूस्खलन से। 10 प्रांत प्रभावित हैं, जहां 20 लाख से अधिक लोग विस्थापित हो चुके हैं। सेना ने हेलीकॉप्टर, नावें और उच्च-क्षमता वाली गाड़ियां तैनात की हैं। प्रधानमंत्री अनुटिन चर्नवीराकुल ने आपातकालीन सहायता का आदेश दिया है, लेकिन बाढ़ से फसलें बर्बाद हो गईं और व्यापारिक केंद्र ठप हैं। पर्यटक फंस गए हैं, जबकि स्थानीय निवासी छतों पर शरण लेने को मजबूर हैं।

वियतनाम में हालात और भी दर्दनाक हैं। मध्य क्षेत्र में भारी बारिश और भूस्खलन से 91 लोगों की मौत हो चुकी है। एक सप्ताह में 1.1 मिलियन घरों और कारोबारों में बिजली गुल हो गई। 2 लाख घर, 2 लाख हेक्टेयर फसलें और 1,157 हेक्टेयर मछली फार्म पानी में डूब गए। प्रारंभिक अनुमान से नुकसान 493 मिलियन डॉलर का है। सरकार ने 4,000 टन चावल और नकद सहायता वितरित की है, लेकिन जल स्तर घटने के बावजूद और बारिश की चेतावनी बरकरार है। होआन प्राचीन शहर जैसी ऐतिहासिक जगहें भी प्रभावित हुई हैं।

मलेशिया में 8 राज्यों में बाढ़ ने 19,422 लोगों को शरणार्थी बना दिया है। 112 राहत केंद्र खोले गए हैं, लेकिन मौतें दर्ज नहीं हुईं। उप-प्रधानमंत्री अहमद जाहिद हमीदी ने 90 से अधिक बचाव संसाधन तैनात किए हैं। कमर तक पानी भरा है, जो पिछले साल की बाढ़ से भी बदतर है।

यह आपदा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को झकझोर रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि एल नीनो और ग्लोबल वार्मिंग का संयोजन जिम्मेदार है। अंतरराष्ट्रीय सहायता की मांग तेज हो रही है, जबकि प्रभावित देश पुनर्वास की तैयारी में जुटे हैं। उम्मीद है कि यह संकट जल्द समाप्त होगा, लेकिन जलवायु संकट की चेतावनी साफ है।

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