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मुंबई में होर्डिंग्स के लिए BMC की नई विज्ञापन नीति: 17 मौतों के बाद क्या-क्या बदला?

मुंबई में होर्डिंग्स के लिए BMC की नई विज्ञापन नीति: 17 मौतों के बाद क्या-क्या बदला?

घाटकोपर होर्डिंग हादसे के 18 महीने बाद मुंबई महानगरपालिका (BMC) ने आखिरकार विज्ञापनों और होर्डिंग्स के लिए नई ड्राफ्ट पॉलिसी जारी कर दी है। मई 2024 में घाटकोपर के पेट्रोल पंप पर गिरे 120×120 फुट के अवैध होर्डिंग से 17 लोगों की मौत और 74 घायल होने के बाद BMC ने इस नीति को सख्त बनाने का वादा किया था। मंगलवार को जारी ड्राफ्ट पॉलिसी में सख्त नियमों के साथ साइकलॉन-प्रूफ स्ट्रक्चर, साइज लिमिट और स्ट्रक्चरल ऑडिट पर जोर दिया गया है। BMC आयुक्त भूषण गगरानी ने कहा, “यह नीति शहर की सिल्हूट को डीकंजेस्ट करेगी और सुरक्षा सुनिश्चित करेगी।” पब्लिक कमेंट्स के बाद फाइनल नीति दिसंबर में लागू होगी।

हादसे की याद: क्या हुआ था?

13 मई 2024 को घाटकोपर के चेड़ा नगर में अचानक तेज हवा और बारिश के दौरान इगो मीडिया का अवैध होर्डिंग पेट्रोल पंप पर गिर पड़ा। NDRF और फायर ब्रिगेड ने 72 घंटे तक रेस्क्यू चलाया, लेकिन 17 जिंदगियां नहीं बच सकीं। जांच में पाया गया कि होर्डिंग BMC नियमों के खिलाफ था – साइज 40×40 फुट से कहीं ज्यादा, बिना स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी रिपोर्ट, और GRP की जमीन पर बिना परमिशन। एजेंसी ओनर भवेश भिंडे पर हत्या का केस चला, लेकिन BMC अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं हुई। इस हादसे ने पूरे शहर में 16-17 करोड़ के रेवेन्यू लॉस का कारण बना, क्योंकि नई होर्डिंग्स पर रोक लग गई।

नई नीति में क्या बदला? मुख्य बदलाव

BMC ने 2022 की पुरानी पॉलिसी को ओवरहॉल किया है। जस्टिस दिलीप भोसले कमिटी की रिपोर्ट के आधार पर सुझाव अपनाए गए हैं। यहां प्रमुख बदलाव:

साइज और हाइट लिमिट सख्त: अधिकतम होर्डिंग साइज 40×40 फुट ही रहेगी। हाइट ग्राउंड से 120 फुट तक सीमित, लेकिन स्ट्रक्चरल ऑडिट अनिवार्य। पहले 70 मीटर की दूरी थी, अब 100 मीटर – होर्डिंग्स के बीच गैप बढ़ा।

नो-गो एरिया: छतों, टेरेस, ट्रैफिक आइलैंड्स, ब्रिज गैंट्रीज पर नई होर्डिंग्स बैन। रेलवे, MMRDA जैसी एजेंसीज की जमीन पर BMC NOC जरूरी। डेड वॉल्स (बिना खिड़की वाली दीवारें) पर अब विज्ञापन की अनुमति – हाउसिंग सोसाइटीज को इससे कमाई का मौका।

सुरक्षा और स्ट्रक्चरल चेक: हर होर्डिंग के लिए IIT-B एक्सपर्ट्स की सलाह से स्ट्रक्चरल स्टेबिलिटी सर्टिफिकेट जरूरी। साइकलॉन, तेज हवा (मुंबई की कोस्टल कंडीशंस) का टेस्ट। डिजिटल होर्डिंग्स (DOOH) के लिए अलग गाइडलाइंस – LED स्क्रीन्स पर ब्राइटनेस लिमिट।

परमिशन और मॉनिटरिंग: BMC, ट्रैफिक पुलिस, लैंड ओनर (कलेक्टर, सॉल्ट पैन अथॉरिटी) से NOC अनिवार्य। पॉलिटिकल पोस्टर्स पर भी नियंत्रण। ब्लैकलिस्टिंग पॉलिसी: फीस न भरने या वॉयलेशन पर एडवरटाइजर्स को बैन। ई-टेंडर से रेवेन्यू बढ़ेगा।

कार्रवाई और सर्वे: सभी अवैध होर्डिंग्स का तुरंत सर्वे और हटाना। BMC ने GRP, सेंट्रल/वेस्टर्न रेलवे को नोटिस भेजे – 40×40 से बड़े होर्डिंग्स हटाने के। होर्डिंग माफिया पर SIT जांच।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स?

IIT-B के एक्सपर्ट्स ने कहा, “क्लाइमेट चेंज से स्टॉर्म्स बढ़ रहे हैं, इसलिए स्ट्रक्चरल ऑडिट जरूरी।” अर्बन प्लानर अर्जुन धवन ने सुझाव दिया, “विजुअल क्लटर कम करने के लिए डेड वॉल्स का इस्तेमाल बढ़ाएं।” BMC का दावा है कि इससे सालाना 20-25 करोड़ का रेवेन्यू बढ़ेगा, लेकिन इंडस्ट्री ग्रुप्स का विरोध है – “बहुत रिस्ट्रिक्टिव, जॉब्स पर असर।”

आगे क्या?

पब्लिक फीडबैक अगले 30 दिनों में आएगा। फाइनल पॉलिसी से BMC सभी होर्डिंग्स को रेगुलेट करेगी। घाटकोपर पीड़ित परिवारों ने कहा, “देर आई, दुरुस्त आई – लेकिन दोषियों पर सजा कब?” क्या यह नीति मुंबई को सुरक्षित बनाएगी? समय बताएगा, लेकिन हादसे की यादें अभी ताजा हैं।

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