महाराष्ट्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर फडणवीस सरकार का सख्त ऐलान: डिटेंशन कैंप बनेंगे, राशन कार्ड सत्यापन और मालिकों पर कार्रवाई
महाराष्ट्र में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर फडणवीस सरकार का सख्त ऐलान: डिटेंशन कैंप बनेंगे, राशन कार्ड सत्यापन और मालिकों पर कार्रवाई
महाराष्ट्र में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों और अन्य विदेशी घुसपैठियों की खैरख्वाह नहीं रही। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अगुवाई वाली महायुति सरकार ने विधानसभा में बड़ा फैसला लेते हुए मुंबई में एक आधुनिक डिटेंशन कैंप स्थापित करने की घोषणा की है। यह कैंप बिना वैध दस्तावेजों के देश में घुस आए बांग्लादेशी प्रवासियों को रखने के लिए बनेगा। इसके अलावा, राशन कार्ड की सख्त पडताळणी, नकली जन्म प्रमाणपत्रों पर SIT जांच और नियोक्ताओं पर सख्ती के आदेश जारी किए गए हैं। फडणवीस ने कहा, “महाराष्ट्र में कोई घुसपैठिया नहीं टिकेगा। हमारी सरकार ‘वोट जिहाद पार्ट-2’ को रोकने के लिए कटिबद्ध है।”
यह फैसला हाल के दिनों में बढ़ते अपराधों से जुड़ा है। ठाणे के कल्याण में एक बांग्लादेशी दंपति की गिरफ्तारी के बाद सरकार ने पूरे राज्य में ड्राइव तेज कर दी। विधानसभा में फडणवीस ने बताया कि 2021 से 2025 तक 2,764 बांग्लादेशी घुसपैठियों पर मुकदमे दर्ज हुए, जिनमें से 2,237 गिरफ्तार और 527 को निर्वासित किया गया। लेकिन अभी भी हजारों अवैध प्रवासी निर्माण स्थलों, फैक्ट्रियों और छोटे कारोबारों में कम मजूरी पर काम कर रहे हैं। गृह विभाग ने सर्कुलर जारी कर कहा कि अवैध प्रवासियों को नौकरी देने वाले मालिकों को शरणार्थी देने के समान अपराधी माना जाएगा। ऑनलाइन सत्यापन प्रणाली लागू होगी, और यदि जरूरी तो कानून में संशोधन किया जाएगा।
मालेगांव और अमरावती में नकली जन्म प्रमाणपत्रों के 100 से ज्यादा मामले सामने आए, जिन्हें फडणवीस ने ‘वोट जिहाद पार्ट-2’ करार दिया। उन्होंने कहा, “ये घुसपैठिए जन्म प्रमाणपत्र बनवा कर वोटर बनने की कोशिश कर रहे हैं। SIT जांच होगी, और दोषियों को सजा मिलेगी।” एटीएस को अलर्ट किया गया है, जबकि पुलिस को निर्देश हैं कि निर्माण मजदूर, मैकेनिक, ड्राइवर, प्लंबर और वेटर जैसे क्षेत्रों में घुसपैठियों की तलाशी लें। BMC और अन्य विभागों को भी सुपरविजन में अवैध प्रवासियों को न रखने का आदेश है।
विपक्ष ने इसकी आलोचना की। शिवसेना (UBT) के संजय राउत ने कहा, “यह सिर्फ राजनीतिक ड्रामा है। असली समस्या बेरोजगारी है, घुसपैठिए नहीं।” लेकिन फडणवीस ने पलटवार किया, “हम जातिगत और सांप्रदायिक उन्माद फैलाने वालों पर नजर रखेंगे।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम असम और गुजरात के मॉडल से प्रेरित है, जहां विदेशी ट्रिब्यूनल्स ने 1,65,992 अवैध प्रवासियों को पहचाना। ह्यूमन राइट्स वॉच ने चेतावनी दी कि निर्दोष भारतीय मुसलमानों को निशाना न बनाया जाए।
यह अभियान महाराष्ट्र की सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संरचना को मजबूत करेगा। फडणवीस ने कहा, “हम अमित शाह के नेतृत्व में केंद्र के साथ मिलकर काम करेंगे।” क्या यह ड्राइव हजारों घुसपैठियों को बाहर करेगी? आने वाले महीनों में साफ होगा, लेकिन राज्य में अब सख्ती का दौर शुरू हो चुका है।
