नए साल में टाटा मोटर्स की गाड़ियां 3% तक महंगी, कच्चे माल की महंगाई से ग्राहकों पर बोझ
नए साल में टाटा मोटर्स की गाड़ियां 3% तक महंगी, कच्चे माल की महंगाई से ग्राहकों पर बोझ
भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग पर कच्चे माल की बढ़ती कीमतों का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। टाटा मोटर्स ने बुधवार को घोषणा की कि जनवरी 2025 से अपनी पैसेंजर व्हीकल्स (पीवी) रेंज, जिसमें इलेक्ट्रिक व्हीकल्स (ईवी) भी शामिल हैं, की कीमतों में 3% तक की वृद्धि की जाएगी। यह कदम कंपनी की बढ़ती इनपुट लागत और महंगाई को कवर करने के लिए उठाया गया है, जो स्टील, एल्यूमीनियम, कॉपर और अन्य धातुओं की कीमतों में वैश्विक उछाल से प्रभावित है।
कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, 2025 में अब तक दो बार कीमतें बढ़ाई जा चुकी हैं—फरवरी में 1-4% और अप्रैल में 3% तक। फिर भी, कच्चे माल की लागत में 1.5% की अतिरिक्त वृद्धि ने मार्जिन पर दबाव डाला है। शैलेश चंद्रा, एमडी एंड सीईओ, टाटा मोटर्स पैसेंजर व्हीकल्स ने कहा, “हम लागत नियंत्रण के लिए आंतरिक उपाय कर रहे हैं, लेकिन कुछ बोझ ग्राहकों पर डालना अनिवार्य है।” यह वृद्धि मॉडल और वैरिएंट के आधार पर अलग-अलग होगी, जैसे नेक्सॉन, हैरियर, सफारी और टियागो पर 20,000 से 50,000 रुपये तक का इजाफा हो सकता है।
भारतीय कार बाजार में टाटा मोटर्स की मजबूत पकड़ है, खासकर एसयूवी सेगमेंट में 16-17% शेयर के साथ। हाल ही में लॉन्च हुई टाटा सिएरा को उम्मीद है कि यह शेयर 20-25% तक ले जाएगा। कंपनी ईवी सेगमेंट में भी निवेश बढ़ा रही है, जहां सिएरा ईवी अगले वित्तीय वर्ष में आएगी। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार कीमत वृद्धि से मांग प्रभावित हो सकती है, खासकर प्राइस-सेंसिटिव एंट्री-लेवल और ग्रामीण बाजारों में।
वैश्विक स्तर पर जियोपॉलिटिकल टेंशन, जैसे यूएस सैंक्शन्स और सप्लाई चेन डिसरप्शन, ने कच्चे माल की कीमतें चढ़ाई हैं। मारुति सुजुकी, ह्युंडई और महिंद्रा जैसी कंपनियां भी अप्रैल 2025 से 2-4% कीमतें बढ़ा चुकी हैं। टाटा मोटर्स ने लागत कम करने के लिए वैल्यू इंजीनियरिंग और वेंडर नेगोशिएशन पर जोर दिया है।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह है कि नए साल से पहले बुकिंग कर लें। ऑटो इंडस्ट्री के लिए यह चुनौतीपूर्ण दौर है, लेकिन डिमर्जर (अक्टूबर 2025 से प्रभावी) से कमर्शियल और पैसेंजर बिजनेस अलग होकर अधिक फोकस्ड ग्रोथ ला सकता है। कुल मिलाकर, 2026 में और वृद्धि की संभावना है, जो उपभोक्ताओं की जेब पर असर डालेगी।
