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शेख हसीना की फांसी की सजा के खिलाफ अवामी लीग का देशव्यापी घेराव, 30 नवंबर तक विरोध प्रदर्शन

शेख हसीना की फांसी की सजा के खिलाफ अवामी लीग का देशव्यापी घेराव, 30 नवंबर तक विरोध प्रदर्शन

बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर उथल-पुथल मच गई है। पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को इंटरनेशनल क्राइम्स ट्रिब्यूनल (आईसीटी) द्वारा मानवता के खिलाफ अपराधों के लिए फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद उनकी पार्टी अवामी लीग ने जोरदार विरोध का ऐलान कर दिया है। पार्टी ने फैसले को “गैरकानूनी, पूर्वाग्रहपूर्ण और राजनीतिक साजिश” करार देते हुए 30 नवंबर तक देशभर में विरोध प्रदर्शन, रैलियां, प्रतिरोध मार्च और घेराव की योजना बनाई है। ढाका समेत प्रमुख शहरों में सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी गई है, जबकि अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस के इस्तीफे की मांग तेज हो गई है।

आईसीटी ने 17 नवंबर को शेख हसीना और पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमान खान कमाल को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई। अदालत ने पाया कि 2024 के छात्र आंदोलन के दौरान हसीना ने हिंसा भड़काने, प्रदर्शनकारियों की हत्या का आदेश देने और अत्याचार रोकने में विफल रहने का अपराध किया। इस दमन में करीब 1,400 लोग मारे गए थे, जो आखिरकार हसीना सरकार के पतन का कारण बने। हसीना, जो अगस्त 2024 से भारत में निर्वासन में हैं, ने फैसले को “फर्जी ट्रायल” बताते हुए कहा कि यह अवामी लीग को राजनीतिक रूप से खत्म करने की साजिश है। संयुक्त राष्ट्र ने सजा का विरोध किया, लेकिन न्याय की सराहना की, जबकि एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ट्रायल को “अनुचित” कहा।

अवामी लीग के महासचिव ओबैदुल कादर ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा, “यह फैसला यूनुस और उसके गुट की नकली अदालत का है। हम करोड़ों कार्यकर्ताओं के साथ सड़कों पर उतरेंगे। अवामी लीग और हसीना को चुनाव से बाहर करने की कोशिश विफल होगी।” पार्टी ने जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं, राजनीतिक नेताओं और सहयोगियों से “राष्ट्रविरोधी साजिशों” का मुकाबला करने को कहा। 18 नवंबर को देशव्यापी बंद का आह्वान किया गया था, जिसमें ढाका में यातायात ठप हो गया और पुलिस ने “देखते ही गोली मारने” के आदेश जारी किए। विरोधियों ने धानमंडी-32 क्षेत्र में हसीना के पिता शेख मुजीबुर रहमान के घर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की, जिसके चलते झड़पें हुईं।

फरवरी 2026 में होने वाले आम चुनावों से पहले यह आंदोलन बांग्लादेश की स्थिरता के लिए खतरा बन सकता है। अवामी लीग को मई 2025 में प्रतिबंधित कर दिया गया था, लेकिन पार्टी निर्वासन से संचालित हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह प्रदर्शन हिंसक रूप ले सकता है, खासकर जब भारत से हसीना की प्रत्यर्पण की मांग तेज हो रही है। भारत ने फैसले पर “रचनात्मक संलग्नता” का वादा किया है, लेकिन प्रत्यर्पण मुश्किल लगता है। अवामी लीग ने चेतावनी दी कि “स्टेज्ड चुनाव” नहीं चलेगा, और अगर जरूरी हुआ तो “जमुना मार्च” जैसे बड़े आंदोलन शुरू होंगे।

देश में तनाव चरम पर है। पुलिस ने 1,649 लोगों को गिरफ्तार किया है और हथियार जब्त किए हैं। यूनुस सरकार ने मीडिया को हसीना के बयान छापने से रोका है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह संकट बांग्लादेश की लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है, जहां बीएनपी और इस्लामवादी दल भी सक्रिय हैं। अवामी लीग समर्थक निर्वासन से डिजिटल अभियान चला रहे हैं, लेकिन सड़क पर घेराव का ऐलान पूरे क्षेत्र के लिए चुनौती है।

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