उत्तराखंड

प्रतिबंधित मांस मामला: जमानत याचिका खारिज होने के बाद बीजेपी नेता मदन मोहन जोशी ने किया आत्मसमर्पण, कोतवाली में पहुंचे

प्रतिबंधित मांस मामला: जमानत याचिका खारिज होने के बाद बीजेपी नेता मदन मोहन जोशी ने किया आत्मसमर्पण, कोतवाली में पहुंचे

उत्तराखंड के रामनगर क्षेत्र में प्रतिबंधित मांस तस्करी के एक विवादास्पद मामले में बीजेपी नेता मदन मोहन जोशी ने मंगलवार को आत्मसमर्पण कर दिया। उत्तराखंड हाईकोर्ट द्वारा सोमवार को उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद जोशी स्कूटी से रामनगर कोतवाली पहुंचे और सरेंडर कर लिया। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया है और पूछताछ शुरू कर दी है। यह मामला दिसंबर 2024 का है, जब रामनगर में 500 किलोग्राम से अधिक प्रतिबंधित मांस (गोमांस सहित) की तस्करी का भंडाफोड़ हुआ था। जोशी पर साजिश रचने और तस्करी में शामिल होने का आरोप है।

मामले का पूरा घटनाक्रम

दिसंबर 2024 में रामनगर पुलिस ने एक बड़े रेड के दौरान 500 किलो से अधिक प्रतिबंधित मांस जब्त किया था, जो हरिद्वार से ट्रक के माध्यम से लाया जा रहा था। जांच में पता चला कि यह मांस स्थानीय बाजारों में बेचा जा रहा था। मुख्य आरोपी एक स्थानीय व्यापारी था, लेकिन FIR में मदन मोहन जोशी का नाम साजिशकर्ता के रूप में आया। पुलिस का दावा है कि जोशी ने स्थानीय बीजेपी नेताओं के साथ मिलकर तस्करों को संरक्षण दिया था। IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 120B (आपराधिक साजिश) और वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत केस दर्ज हुआ।

जोशी ने गिरफ्तारी से बचने के लिए हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत के लिए याचिका दायर की थी। लेकिन सोमवार को जस्टिस संजीव नारवाल की एकलपीठ ने इसे खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान जोशी के वकील ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल निर्दोष हैं और राजनीतिक साजिश का शिकार हैं, लेकिन कोर्ट ने सबूतों के अभाव में याचिका ठुकरा दी। कोर्ट ने कहा कि जोशी पर गंभीर आरोप हैं और जांच में सहयोग जरूरी है।

आत्मसमर्पण का क्षण: स्कूटी से कोतवाली पहुंचे

मंगलवार सुबह करीब 11 बजे जोशी स्कूटी से रामनगर कोतवाली पहुंचे। उनके साथ 4-5 समर्थक थे। कोतवाली के बाहर मीडिया के सवालों पर जोशी ने कहा, “मैं निर्दोष हूं। कोर्ट का फैसला माननीय है, इसलिए आत्मसमर्पण कर रहा हूं। सच्चाई सामने आएगी।” पुलिस ने उन्हें तुरंत गिरफ्तार कर लिया और मेडिकल जांच के बाद जेल भेज दिया। एसएसपी नैनीताल विनीत कुमार ने कहा, “जोशी से पूछताछ होगी। मामले में अन्य आरोपी भी फरार हैं।”

यह घटना रामनगर में राजनीतिक हलचल मचा रही है। स्थानीय बीजेपी कार्यकर्ताओं ने जोशी के समर्थन में धरना दिया, जबकि विपक्षी दलों ने इसे “भ्रष्टाचार का पर्दाफाश” बताया। कांग्रेस नेता हरिश रावत ने ट्वीट किया, “बीजेपी के ‘स्वच्छ भारत’ का चेहरा बेनकाब हो गया।”

हाईकोर्ट का फैसला: अन्य आरोपी भी सरेंडर के लिए तैयार

हाईकोर्ट ने जोशी के अलावा दो अन्य आरोपी—रामनगर के व्यापारी राजेश कुमार और ट्रक ड्राइवर मोहन सिंह—की जमानत याचिकाएं भी खारिज कीं। सुनवाई के दौरान इनके वकीलों ने कहा कि उनके मुवक्किल आत्मसमर्पण करने को तैयार हैं। कोर्ट ने उनकी याचिकाएं वापस लेने की अनुमति दी और रिकॉर्ड पर प्रस्तुति ली। इन आरोपियों के सरेंडर का इंतजार है।

कोर्ट ने पुलिस को निर्देश दिया कि सभी आरोपी गिरफ्तार होने के बाद 48 घंटे में मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करें। मामले की अगली सुनवाई 10 दिसंबर को निर्धारित है।

प्रतिबंधित मांस तस्करी का बड़ा नेटवर्क

यह मामला उत्तराखंड में प्रतिबंधित मांस तस्करी के बड़े नेटवर्क का हिस्सा लगता है। राज्य में गोमांस पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन सीमावर्ती इलाकों में तस्करी जारी है। रामनगर, जो कॉर्बेट नेशनल पार्क के पास है, पर्यटन केंद्र होने के कारण ऐसा हॉटस्पॉट बन गया है। पुलिस का दावा है कि यह मांस नेपाल और हरिद्वार से आता था, और स्थानीय नेता संरक्षण देते थे। जब्त मांस की कीमत 10 लाख रुपये बताई गई।

वन्यजीव विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल कानून टूट रहा है, बल्कि वन्यजीवों की सुरक्षा भी खतरे में है। WWF इंडिया ने मांग की है कि ऐसे मामलों में सख्ती बरती जाए।

राजनीतिक प्रतिक्रिया: बीजेपी ने कही ये बात

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महिपाल सिंह ने कहा, “जोशी निर्दोष हैं। पार्टी उनके साथ खड़ी है। जांच में सच्चाई सामने आएगी।” वहीं, पूर्व सीएम हरीश रावत ने कहा, “यह बीजेपी की दोहरी नैतिकता है।”

यह सरेंडर उत्तराखंड की सियासत को गरमा सकता है, खासकर 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले। पुलिस ने कहा कि जांच जारी है, और जल्द ही बड़ा खुलासा होगा।

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