राजनीति

राज ठाकरे का मराठी मानुस को चेतावनी भरा संदेश: ‘BMC चुनाव आखिरी साबित होंगे, मुंबई हाथ से निकल जाएगी’

राज ठाकरे का मराठी मानुस को चेतावनी भरा संदेश: ‘BMC चुनाव आखिरी साबित होंगे, मुंबई हाथ से निकल जाएगी’

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने आगामी मुंबई महानगरपालिका (BMC) चुनावों को मराठी समुदाय के लिए ‘आखिरी मौका’ बताते हुए गंभीर चेतावनी जारी की है। रविवार को मुंबई में आयोजित कोंकण महोत्सव के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ठाकरे ने कहा, “आने वाले BMC चुनाव मराठी मानुस के लिए आखिरी होंगे। अगर हम सतर्क नहीं रहे तो मुंबई हमारे हाथ से निकल जाएगी। उसके बाद हम उन्हें नियंत्रित नहीं कर पाएंगे। मैं आपसे आग्रह करता हूं कि लापरवाह मत बनिए।” उन्होंने मतदाता सूची में कथित धांधली पर नजर रखने और असली-नकली वोटरों की जांच करने की अपील की।

ठाकरे का यह बयान BMC चुनावों से पहले सियासी हलचल तेज कर रहा है। BMC, जो 1996 से शिवसेना का गढ़ रही है, पर अब BJP की नजर टिकी है। महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के बाद बदले समीकरणों में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (UBT) अपने ‘आखिरी किले’ को बचाने की जद्दोजहद में है। राज ठाकरे ने चुनाव आयोग (ECI) और देवेंद्र फडणवीस सरकार पर तीखा प्रहार किया, आरोप लगाया कि गैर-मराठी समूह मुंबई पर कब्जे की साजिश रच रहे हैं। “सजग रहिए, जागृत रहिए। अगर मुंबई हाथ से चली गई, तो ये लोग पूरे शहर में हंगामा मचाएंगे। मुंबई हमारी है, इसे किसी भी कीमत पर नहीं खोएंगे,” उन्होंने जोर देकर कहा।

राज ठाकरे ने मराठी मतदाताओं से एकजुट रहने और चुनाव प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उनका यह बयान ठाकरे बंधुओं (राज-उद्धव) के संभावित गठबंधन की अटकलों को हवा दे रहा है। खबरों के मुताबिक, MVA (महाविकास अघाड़ी) में MNS की एंट्री पर चर्चा अंतिम चरण में है, जहां राज ने 75 सीटों की मांग की है जबकि उद्धव 70 पर सहमत बताए जा रहे हैं। शरद पवार ने भी MVA-MNS गठजोड़ का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस ने अकेले लड़ने का ऐलान कर दिया।

लोगों ने इसे ‘मराठी अस्मिता की लड़ाई’ बताया, तो कुछ ने ‘भड़काऊ बयान’ करार दिया। एक पोस्ट में लिखा, “राज ठाकरे का संदेश: मुंबई मराठी की है, इसे बचाओ!” BJP ने इसे ‘वोटबैंक राजनीति’ बताया, जबकि शिवसेना (UBT) ने समर्थन जताया।

BMC चुनाव, जो 2026 में संभावित हैं, महाराष्ट्र की सियासत के लिए निर्णायक होंगे। 227 सीटों वाली इस निगम पर कब्जा पाने के लिए सभी दल मोर्चाबंदी में जुटे हैं। ठाकरे का बयान न सिर्फ MNS को मजबूत करेगा, बल्कि क्षेत्रीय अस्मिता को फिर से उभार सकता है।

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