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कनाडा में वंश-आधारित नागरिकता कानून में बड़ा बदलाव: बिल सी-3 को शाही मंजूरी, भारतीय मूल के हजारों परिवारों को फायदा

कनाडा में वंश-आधारित नागरिकता कानून में बड़ा बदलाव: बिल सी-3 को शाही मंजूरी, भारतीय मूल के हजारों परिवारों को फायदा

कनाडा ने अपनी वंश-आधारित नागरिकता नीति को आधुनिक और समावेशी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। नागरिकता अधिनियम (2025) में संशोधन करने वाले विधेयक सी-3 को 20 नवंबर 2025 को शाही मंजूरी (रॉयल असेेंट) मिल गई है। कनाडा सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि यह बदलाव “कनाडाई नागरिकता के मूल्यों को मजबूत करने और ‘लॉस्ट कैनेडियंस’ को न्याय दिलाने का महत्वपूर्ण मील का पत्थर” है। इस कानून से विशेष रूप से भारतीय मूल के हजारों परिवारों को लाभ मिलेगा, जिनके बच्चे विदेश में पैदा होने के कारण नागरिकता से वंचित थे।

2009 में लागू की गई पहली पीढ़ी की सीमा (फर्स्ट-जेनरेशन लिमिट) के तहत, कनाडा के बाहर पैदा हुए कैनेडियन माता-पिता अपने विदेशी जन्मे या गोद लिए गए बच्चों को नागरिकता नहीं दे पाते थे, यदि वे खुद भी कनाडा के बाहर पैदा हुए हों। इससे ‘सेकंड जेनरेशन कट-ऑफ’ जैसी समस्या उत्पन्न हुई, जिसे 2023 में ओंटारियो सुपीरियर कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया था। बिल सी-3 इस सीमा को हटाता है। नए कानून के तहत, विधेयक लागू होने से पहले पैदा हुए सभी योग्य व्यक्तियों को नागरिकता प्रदान की जाएगी, जो पुराने प्रावधानों के कारण वंचित थे। इसके अलावा, भविष्य में कनाडा के बाहर जन्मे या गोद लिए गए बच्चों को उनके माता-पिता नागरिकता दे सकेंगे, बशर्ते माता-पिता का कनाडा से “पर्याप्त संबंध” (सब्स्टैंशियल कनेक्शन) हो। यह संबंध 1,095 दिनों (लगभग तीन वर्ष) की आजीवन उपस्थिति के आधार पर तय होगा।

प्रवासन, शरणार्थी और नागरिकता मंत्री मार्क मिलर ने कहा, “यह बदलाव परिवारों को एकजुट करने और कैनेडियन पहचान को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। हमारी नीति अब अधिक न्यायपूर्ण और वैश्विक वास्तविकताओं के अनुरूप है।”  विशेषज्ञों के अनुसार, इससे 5,000 से अधिक ‘लॉस्ट कैनेडियंस’ और उनके वंशजों को फायदा होगा, जिनमें बड़ी संख्या भारतीय डायस्पोरा के लोग शामिल हैं। भारतीय मूल के कई कैनेडियन, जो आईटी, स्वास्थ्य और व्यापार क्षेत्रों में काम करते हैं, अक्सर विदेश (जैसे भारत, अमेरिका) में परिवार बसाते हैं। इस सीमा के कारण उनके बच्चे कैनेडियन पासपोर्ट से वंचित रह जाते थे।

बिल जून 2025 में पेश किया गया था और संसद में तीखी बहस के बाद 19 नवंबर को तीसरी पढ़ाई पास हुई। हालांकि, कानून अभी पूरी तरह लागू नहीं हुआ है; गवर्नर इन काउंसिल द्वारा निर्धारित तिथि (संभावित रूप से जनवरी 2026 तक) से प्रभावी होगा। आवेदन प्रक्रिया के लिए IRCC (इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा) जल्द दिशानिर्देश जारी करेगा।

भारतीय कैनेडियन समुदाय के यूजर्स ने इसे “ऐतिहासिक राहत” बताया, जबकि कुछ ने “देर से न्याय” पर सवाल उठाए। एक पोस्ट में लिखा, “भारतीय परिवारों के लिए बड़ी खुशखबरी! अब वंशानुगत नागरिकता आसान।” यह बदलाव कनाडा की बहुसांस्कृतिक छवि को मजबूत करेगा। अधिक जानकारी के लिए canada.ca पर जाएं।

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