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फ्रांस ने पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश किया: राफेल पर झूठी खबरों को ‘फेक न्यूज’ करार देकर भारत का साथ दिया

फ्रांस ने पाकिस्तानी प्रोपेगैंडा का पर्दाफाश किया: राफेल पर झूठी खबरों को ‘फेक न्यूज’ करार देकर भारत का साथ दिया

अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत का साथ देते हुए फ्रांस ने पाकिस्तान के झूठे प्रचार को करारा जवाब दिया है। पाकिस्तानी मीडिया द्वारा फैलाई गई राफेल लड़ाकू विमानों पर फर्जी खबरों को फ्रेंच नेवी ने ‘फेक न्यूज’ और ‘मिसइनफॉर्मेशन’ बताते हुए खारिज कर दिया। यह विवाद मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ा है, जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले (जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए) के जवाब में भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसके चीनी J-10C विमानों ने भारतीय राफेल को मार गिराया, लेकिन फ्रांस ने इसे पूरी तरह से गढ़ा हुआ बताकर पाकिस्तानी पत्रकार हामिद मीर और उनके चैनल जियो टीवी की पोल खोल दी।

फ्रेंच नेवी ने 23 नवंबर 2025 को अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर बयान जारी कर स्पष्ट किया कि पाकिस्तानी रिपोर्ट में कैप्टन इवान लॉने (जिन्हें गलत तरीके से जैक्स लॉने बताया गया) के बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया है। लॉने लैंडिविसियाऊ नेवल एयर स्टेशन के कमांडर हैं, जहां राफेल मरीन विमान तैनात हैं। एक इंडो-पैसिफिक कॉन्फ्रेंस में उनकी प्रस्तुति तकनीकी थी—राफेल की क्षमताओं, कैरियर स्ट्राइक ग्रुप कॉन्सेप्ट और हाई-इंटेंसिटी एयर कॉम्बैट की चुनौतियों पर केंद्रित। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय विमानों के गिराए जाने की पुष्टि नहीं की, न ही चीनी सिस्टम से जम्मिंग या J-10 का जिक्र किया। नेवी ने कहा, “ये बयान कैप्टन लॉने ने कभी नहीं दिए। यह व्यापक मिसइनफॉर्मेशन है।”

यह घटना पाकिस्तान की पुरानी आदत को उजागर करती है, जहां वह हार को जीत बताने के लिए फेक न्यूज का सहारा लेता है। मई के संघर्ष में भारत ने 140 से अधिक फाइटर जेट्स के साथ पाकिस्तानी आतंकी कैंपों को ध्वस्त किया, लेकिन इस्लामाबाद ने विदेशी मीडिया को गुमराह करने की कोशिश की। बीजेपी नेता अमित मालवीया ने ट्वीट कर कहा, “पाकिस्तान की मिसइनफॉर्मेशन मशीनरी फिर बेनकाब हुई। जब आधिकारिक संस्थाएं उनके प्रोपेगैंडा को नकारती हैं, तो उनकी हताशा साफ दिखती है।”

फ्रांस का यह स्टैंड भारत-फ्रांस रक्षा साझेदारी को मजबूत करता है। राफेल डील के तहत भारत को 36 विमान मिल चुके हैं, और यह घटना फ्रांस की विश्वसनीयता को बढ़ाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि चीन-पाकिस्तान का यह ‘ऑपरेशन डिसइनफॉर्मेशन’ राफेल की वैश्विक बिक्री को नुकसान पहुंचाने की साजिश थी, लेकिन फ्रांस ने इसे विफल कर दिया। आने वाले दिनों में भारत सरकार भी इस पर कूटनीतिक स्तर पर जवाब देगी। यह घटना दर्शाती है कि डिजिटल युग में सच्चाई की जीत अंततः होती है।

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