राजनीति

बिहार में सत्ता का नया समीकरण: 20 साल बाद नीतीश ने छोड़ा गृह विभाग, सम्राट चौधरी बने असली पावर सेंटर

बिहार में सत्ता का नया समीकरण: 20 साल बाद नीतीश ने छोड़ा गृह विभाग, सम्राट चौधरी बने असली पावर सेंटर

बिहार की राजनीति में एक युगांतकारी बदलाव आ गया है। दसवीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार ने आज अपने मंत्रिमंडल के 26 मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा करते हुए 20 साल पुरानी परंपरा तोड़ दी। नवंबर 2005 से गृह विभाग की कमान खुद संभाल रहे नीतीश ने इसे भाजपा के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को सौंप दिया। यह फैसला एनडीए गठबंधन में सत्ता संतुलन का स्पष्ट संकेत है, जहां भाजपा अब ‘सिंगल लार्जेस्ट पार्टी’ के रूप में उभरी है। राजनीतिक गलियारों में इसे ‘सम्राट का उदय’ कहा जा रहा है, जो बिहार की कानून-व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा का नया पावर सेंटर बन चुके हैं।

शपथ ग्रहण के ठीक एक दिन बाद जारी इस बंटवारे में कुल 18 विभाग आवंटित किए गए, जबकि शेष 8 की घोषणा शीघ्र होने की संभावना है। भाजपा को सबसे बड़ा टुकड़ा मिला – 14 विभाग। जदयू को 9, लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) को 2, हिंदुस्तान आवाम मोर्चा (HAM) को 1 और राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) को 1। नीतीश ने खुद सामान्य प्रशासन, कैबिनेट सचिवालय, सतर्कता और अनबंटे विभाग अपने पास रखे। सम्राट चौधरी को न केवल गृह, बल्कि वित्त, वाणिज्यिक कर और विधि जैसे संवेदनशील विभाग भी सौंपे गए, जो उन्हें राज्य की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों का केंद्र बना देते हैं।

दूसरे उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा को राजस्व एवं भूमि सुधार के साथ खनन एवं भूतत्व विभाग मिला। स्वास्थ्य और विधि का जिम्मा मंगल पांडेय संभालेंगे, जबकि उद्योग विभाग दिलीप जायसवाल के पास रहा। जदयू से मदन साहनी को सामाजिक कल्याण, अशोक चौधरी को ग्रामीण कार्य, लेशी सिंह को खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण तथा श्रवण कुमार को ग्रामीण विकास सौंपा गया। एलजेपी (रामविलास) के संजय सिंह को लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी (PHED) और संजय पासवान को गन्ना उद्योग मिला। HAM के जीवेश मिश्रा को पिछड़ा वर्ग कल्याण तथा RLM के उपेंद्र कुशवाहा को पंचायती राज विभाग आवंटित हुआ।

यह बंटवारा भाजपा की मजबूती को रेखांकित करता है। 89 विधायकों वाली भाजपा ने गृह जैसे ‘राजकीय’ विभाग हथियाए, जो पहले नीतीश का केंद्रीय हथियार था। विश्लेषकों का मानना है कि यह 2025 विधानसभा चुनावों से पहले गठबंधन की एकजुटता का प्रमाण है। नीतीश का यह त्याग सत्ता साझेदारी का संदेश देता है, लेकिन छोटे सहयोगियों को प्रमुख विभाग देकर गठबंधन की नींव मजबूत की गई। सम्राट चौधरी, जो तरापुर से 1,22,480 वोटों से जीते, अब बिहार की सुरक्षा तंत्र के ‘असली मालिक’ हैं। उनके नेतृत्व में अपराध नियंत्रण और पुलिस सुधार पर नजर रहेगी।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि यह बदलाव नीतीश की रणनीति का हिस्सा है, जो लंबे कार्यकाल के लिए भाजपा को मजबूत साझेदार बनाना चाहते हैं। बिहार की नई सरकार अब विकास, रोजगार और कानून-व्यवस्था पर फोकस करेगी, लेकिन गृह विभाग का हस्तांतरण सत्ता के नए केंद्र को जन्म दे चुका है। क्या यह स्थिरता लाएगा या नई चुनौतियां? समय बताएगा।

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