बिहार चुनाव में हार के बाद मौन उपवास पर प्रशांत किशोर, गांधी आश्रम में कर रहे आत्ममंथन
बिहार चुनाव में हार के बाद मौन उपवास पर प्रशांत किशोर, गांधी आश्रम में कर रहे आत्ममंथन
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी की करारी हार के बाद संस्थापक प्रशांत किशोर ने गुरुवार को महात्मा गांधी के ऐतिहासिक भितिहरवा आश्रम में एकदिवसीय मौन उपवास शुरू किया। यह उपवास प्रायश्चित और आत्मचिंतन का प्रतीक बन गया, जहां किशोर ने अपनी विफलता की पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की। आश्रम में शांत वातावरण में बैठे किशोर ने गांधी जी की मूर्ति को श्रद्धांजलि दी, जो 1917 के नील सत्याग्रह की स्मृति स्थल है। आज दोपहर कस्तूरबा गांधी स्कूल की छात्राओं ने उन्हें उपवास तुड़वाया, जो उन्होंने गोद लिया है।
चुनाव परिणामों के एक दिन बाद किशोर ने कहा था, “मैं बिहार की जनता को नई व्यवस्था बनाने का आधार समझाने में असफल रहा। इसलिए प्रायश्चित स्वरूप में 20 नवंबर को भितिहरवा गांधी आश्रम में मौन उपवास रखूंगा।” जन सुराज को एक भी सीट न मिलने और मात्र 3.34 प्रतिशत वोट शेयर के बावजूद किशोर ने हार नहीं मानी। उन्होंने कहा, “आप तब तक हारते नहीं जब तक छोड़ते नहीं।” पार्टी ने इसे “बदलाव की नई शुरुआत” बताया, जहां किशोर ने वोट खरीदने, जातिवाद और धार्मिक विभाजन जैसे आरोप लगाते हुए कहा कि एनडीए ने 10,000 रुपये की रिश्वत से जीत हासिल की।
यह उपवास तीन साल पहले उसी आश्रम से शुरू हुई 3,500 किलोमीटर की पदयात्रा की याद दिलाता है, जो जन सुराज आंदोलन का आधार बनी। किशोर ने कहा कि चुनाव न लड़ना उनकी गलती हो सकती है, लेकिन वे राजनीति छोड़ने के पूर्व-चुनाव वादे पर अड़े हैं। यदि नीतीश सरकार 1.5 करोड़ महिलाओं को 2 लाख रुपये का वादा पूरा करेगी, तो वे सेवानिवृत्त हो जाएंगे। पार्टी नेता मनोज भारती ने कहा, “यह गांधीवादी सत्य और अहिंसा का पालन है। बिहार के साथी इसे मजबूत करें।”
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम किशोर को नैतिक विपक्ष के रूप में स्थापित कर सकता है। जन सुराज अब संगठनात्मक कमजोरियों पर काम करेगी, जैसे वोटर जागरूकता और आंतरिक संरचना। किशोर ने मीडिया से कहा, “हमने जाति या धर्म का जहर नहीं फैलाया, लेकिन गरीबी, पलायन और अशिक्षा पर ईमानदार बात की।” उपवास के दौरान कोई नारा या भाषण नहीं हुआ, जो शांतिपूर्ण प्रतिबद्धता दर्शाता है।
पटना में नीतीश कुमार के दसवें शपथग्रहण के शोरगुल के बीच चंपारण का यह मौन बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ रहा है। क्या यह आत्ममंथन जन सुराज को मजबूत बनाएगा? किशोर की अगली रणनीति पर सबकी नजरें हैं।
