चीन-जापान युद्ध के मुहाने पर: सेनकाकू विवाद और ताइवान पर तनाव चरम पर, जानिए ताकत और सहयोगी
चीन-जापान युद्ध के मुहाने पर: सेनकाकू विवाद और ताइवान पर तनाव चरम पर, जानिए ताकत और सहयोगी
पूर्वी एशिया में तनाव की स्थिति चरम पर पहुंच गई है। जापान की नई प्रधानमंत्री सानाे ताकाइची के ताइवान पर सैन्य हस्तक्षेप के बयान के बाद चीन ने कड़ा रुख अपनाया है। चीनी कोस्ट गार्ड ने सेनकाकू द्वीपों (चीन में डायोयू) के पास गश्त तेज कर दी, जबकि यात्रा चेतावनियों से चीनी पर्यटकों ने 5 लाख से अधिक टिकट कैंसल कर दिए। विशेषज्ञों का मानना है कि यह द्वीप विवाद और ताइवान संकट युद्ध की कगार पर ले जा सकता है। आइए जानते हैं दोनों देशों की सैन्य ताकत और अमेरिका-रूस का रुख।
सैन्य ताकत की तुलना: चीन का आकार, जापान की तकनीक
ग्लोबल फायरपावर इंडेक्स 2025 के अनुसार, चीन दुनिया की दूसरी सबसे ताकतवर सेना है (रैंक 2), जबकि जापान 8वें स्थान पर है। चीन की कुल सैन्य क्षमता 2.1 मिलियन सक्रिय सैनिकों, 51,000 टैंक/वाहनों और 3,300 लड़ाकू विमानों पर आधारित है। नौसेना में 370 जहाज, जिसमें 3 विमानवाहक पोत शामिल हैं। रक्षा बजट 292 बिलियन डॉलर (2025)। लेकिन जापान की ताकत गुणवत्ता में है—247,000 सैनिक, 1,000 टैंक, 1,500 विमान। नौसेना में 155 जहाज, जिसमें 4 हेलीकॉप्टर कैरियर। बजट 55 बिलियन डॉलर (2025), जो 9.4% बढ़ा है। जापान की नौसेना एशिया की सबसे उन्नत है, और द्वीपों पर आधार (इशिगाकी, मियाको) चीन के आक्रमण को रोक सकते हैं। चीन संख्या में आगे है, लेकिन जापान की तकनीक (मिसाइल डिफेंस, साइबर क्षमता) और औद्योगिक उत्पादन इसे मजबूत बनाते हैं। संभावित संघर्ष में जापान का फायदा भौगोलिक स्थिति और अमेरिकी सहायता से होगा।
अमेरिका का रुख: जापान के साथ कंधे से कंधा
अमेरिका जापान का सबसे मजबूत सहयोगी है। 1960 के यूएस-जापान सिक्योरिटी ट्रीटी के तहत, सेनकाकू पर चीनी हमले को अमेरिकी हमला माना जाएगा। जापान में 55,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। ताइवान संकट में जापान की भागीदारी अमेरिका को युद्ध में खींच लेगी। हालिया जॉइंट स्टेटमेंट में दोनों ने चीन की ‘गंभीर’ सैन्य गतिविधियों पर एकजुटता दिखाई। हालांकि, अमेरिकी जनमत सेनकाकू जैसे द्वीपों पर सैनिक भेजने के खिलाफ है। फिर भी, रक्षा सचिव पेट हेजसेथ ने कहा, “हम मजबूत रहेंगे।”
रूस का रुख: चीन का साथ, जापान को धमकी
रूस चीन का करीबी सहयोगी है। 2025 में दोनों ने ‘सी ऑफ जापान’ में संयुक्त नौसैनिक अभ्यास ‘मैरिटाइम इंटरैक्शन-2025’ किया, जो जापान को चेतावनी है। रूस ने जापान की ‘मिलिटराइजेशन’ की आलोचना की और द्वितीय विश्व युद्ध के बाद की सीमाओं का समर्थन किया। कुरिल द्वीप विवाद में रूस जापान से शांति संधि रद्द कर चुका है। चीन-रूस ‘नो-लिमिट्स’ पार्टनरशिप ताइवान और सेनकाकू पर एकजुट है। जापान ने चीन-रूस-उत्तर कोरिया अक्ष को ‘द्वितीय विश्व युद्ध के बाद सबसे बड़ा खतरा’ बताया।
यह तनाव आर्थिक रूप से भी महंगा पड़ रहा है—चीन ने वीजा प्रोसेसिंग रोकी, फिल्म रिलीज टालीं। जापान ने राजनयिक भेजकर शांति की कोशिश की, लेकिन चीन ने बयान वापस लेने की मांग की। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी समर्थन से जापान मजबूत है, लेकिन रूस-चीन गठबंधन संघर्ष को लंबा खींच सकता है। कुल मिलाकर, पूर्वी एशिया शांति की दहलीज पर खड़ा है।
