राजनीति

बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर सियासी घमासान: शिंदे ने दिया ‘असली वारिस’ का संदेश, राज ठाकरे का तीखा प्रहार

बालासाहेब ठाकरे की विरासत पर सियासी घमासान: शिंदे ने दिया ‘असली वारिस’ का संदेश, राज ठाकरे का तीखा प्रहार

शिवसेना के संस्थापक बालासाहेब ठाकरे की 12वीं पुण्यतिथि पर महाराष्ट्र की राजनीति में उनकी वैचारिक विरासत को लेकर जंग तेज हो गई है। एक ओर महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने दावा किया कि उनकी शिवसेना ही बालासाहेब की हिंदुत्व विचारधारा की सच्ची उत्तराधिकारी है, वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने शिंदे गुट पर तीखा हमला बोला। छत्रपति शिवाजी महाराज पार्क में बालासाहेब के स्मृति स्थल पर श्रद्धांजलि सभा के दौरान यह विवाद चरम पर पहुंचा, जहां उद्धव ठाकरे गुट के नेता भी मौजूद थे।

शिंदे ने मिरा रोड में आयोजित एक सभा में कहा, “बालासाहेब की असली शिवसेना वही है जो हिंदुत्व और मराठी अस्मिता की रक्षा कर रही है। हमने कभी उनकी विचारधारा से समझौता नहीं किया। जो लोग कांग्रेस-एनसीपी के साथ गठबंधन कर बालासाहेब के सिद्धांतों को बेच चुके हैं, वे न घर के न घाट के हो गए हैं।” उन्होंने उद्धव ठाकरे पर निशाना साधते हुए जोड़ा कि 2022 की बगावत बालासाहेब की विरासत बचाने के लिए थी, न कि सत्ता के लोभ के लिए। शिंदे ने कहा, “जनता ने विधानसभा चुनाव में हमारी जीत से साबित कर दिया कि कौन असली वारिस है। हम बालासाहेब के सपनों को साकार कर रहे हैं—मजबूत हिंदुत्व, विकास और मराठी मान-उस्मिता।” उनके इस संदेश को महायुति के सहयोगी दलों ने समर्थन दिया, जो बीएमसी चुनाव से पहले सियासी संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

इस बीच, राज ठाकरे ने एक्स पर एक लंबा पोस्ट साझा कर शिंदे पर अप्रत्यक्ष प्रहार किया। उन्होंने लिखा, “कुछ लोग बालासाहेब की छवि का इस्तेमाल कर खुद को हिंदुत्व का असली वारिस बताने की कोशिश कर रहे हैं, जो हास्यास्पद है। वे बालासाहेब के वैचारिक गहराई को समझते ही नहीं। सामाजिक कार्य पहले, राजनीति बाद में—यह बालासाहेब का मूल मंत्र था, जो आज भुला दिया गया।” राज ने शिंदे गुट को ‘नकली उत्तराधिकारी’ करार देते हुए कहा कि लोकसभा चुनाव में मनसे ने उनका समर्थन किया था, लेकिन बेटे अमित ठाकरे की हार के बाद संबंध खराब हो गए। स्मृति स्थल पर पहुंचे राज ने उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर श्रद्धांजलि दी, जो ठाकरे परिवार की एकजुटता का संकेत था।

यह विवाद 2022 के शिवसेना विधायकों के बगावत से चला आ रहा है, जब शिंदे ने उद्धव सरकार गिराकर बीजेपी के साथ गठबंधन किया। सुप्रीम कोर्ट में ‘असली शिवसेना’ का मामला लंबित है, लेकिन चुनाव आयोग ने शिंदे गुट को मूल पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह ‘धनुष-बाण’ दे दिया। उद्धव गुट के नेता संजय राउत ने शिंदे को ‘डुप्लिकेट शिवसेना’ कहा, जबकि शिंदे ने जवाब में कहा कि “बालासाहेब होते तो हमारी पीठ थपथपाते।” राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह जंग बीएमसी चुनाव में मुंबई के 227 वार्डों पर असर डालेगी, जहां शिवसेना का पारंपरिक वर्चस्व रहा है। ठाकरे परिवार के सदस्य, जैसे बालासाहेब के पोते निहार ठाकरे, भी शिंदे के साथ हैं, जो विरासत की जंग को और उलझा रही है।

कुल मिलाकर, बालासाहेब की पुण्यतिथि पर यह सियासी संदेश साफ है—हिंदुत्व की राजनीति में वैचारिक शुद्धता और जनादेश ही असली वारिस तय करेगा। महाराष्ट्र की सियासत में ठाकरे विरासत की यह लड़ाई लंबी चलने वाली है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *