ईरान-इज़राइल युद्ध की आंच भारत तक: समुद्र में फंसीं 2,000 हुंडई कारें, चेन्नई पोर्ट पर वापसी की तैयारी
ईरान-इज़राइल युद्ध की आंच भारत तक: समुद्र में फंसीं 2,000 हुंडई कारें, चेन्नई पोर्ट पर वापसी की तैयारी
चेन्नई/नई दिल्ली, 10 मार्च 2026: पश्चिम एशिया में अमेरिका, इज़राइल और ईरान के बीच जारी तीव्र संघर्ष अब भारत के निर्यात को सीधे प्रभावित कर रहा है। खाड़ी देशों (गल्फ) के लिए निर्यात की गई हुंडई मोटर इंडिया की लगभग 2,000 कारें समुद्र में फंस गई हैं, और इन्हें अब वापस चेन्नई पोर्ट लौटाया जा सकता है।
शिपिंग कंपनियों ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और रेड सी मार्गों पर बढ़ते खतरे के कारण आगे की यात्रा रोक दी है। ये कारें श्रीलंका के हम्बनटोटा पोर्ट से आगे बढ़ने वाली थीं, लेकिन अनिश्चितता के चलते जहाजों ने रूट बदल दिया या रुकावटें आईं। चेन्नई पोर्ट के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह कंसाइनमेंट वापस लौटने की कगार पर है।
यह घटना भारत के ऑटोमोबाइल एक्सपोर्ट सेक्टर के लिए बड़ा झटका है। हुंडई मोटर इंडिया के लिए मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका (MENA) क्षेत्र कुल निर्यात का करीब 40-50% हिस्सा है। टाटा मोटर्स, मारुति सुजुकी और अन्य कंपनियां भी खाड़ी बाजारों में बड़े निर्यातक हैं, और अब वे भी शिपमेंट्स टाल रही हैं या देरी कर रही हैं।
व्यापक प्रभाव और बंदरगाहों पर जाम
JNPT (मुंबई) और मुंद्रा पोर्ट (गुजरात) सहित प्रमुख बंदरगाहों पर करीब 38,000-45,000 कंटेनर फंसे हुए हैं।
कृषि निर्यात सबसे ज्यादा प्रभावित: 4 लाख टन बासमती चावल (2 लाख टन बंदरगाहों पर, 2 लाख ट्रांजिट में), हजारों टन प्याज, फल, चाय और ड्राई फ्रूट्स के कंटेनर रुके हुए।
कुल प्रभावित निर्यात मूल्य 1-1.5 अरब डॉलर तक अनुमानित।
शिपिंग कंपनियां (जैसे मैर्स्क) ने खाड़ी क्षेत्र के लिए नई बुकिंग रोक दी हैं। जहाजों को केप ऑफ गुड होप (अफ्रीका के रास्ते) लंबा रूट अपनाना पड़ रहा है, जिससे 15-20 दिन अतिरिक्त लगते हैं और फ्रेट कॉस्ट 25-35% तक बढ़ गई है।
भारतीय नाविकों पर खतरा
पर्शियन गल्फ और आसपास के इलाकों में दर्जनों भारतीय जहाज फंसे हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक 37-38 भारतीय फ्लैग वाले जहाज (तेल और LPG कैरियर) अटके हुए हैं, जिनमें 1,100+ भारतीय नाविक काम कर रहे हैं। कुछ जहाजों पर हमले की घटनाएं भी सामने आई हैं, जिससे सुरक्षा चिंता बढ़ गई है। DG Shipping ने सभी जहाजों को हाई अलर्ट पर रहने की सलाह दी है।
क्या आगे होगा?
एक्सपोर्टर्स को माल खराब होने, अतिरिक्त लागत और रिटर्न शिपिंग का डर सता रहा है। यदि तनाव लंबा खिंचा तो ऑटो, कृषि और अन्य सेक्टर में बड़ा नुकसान हो सकता है। भारत सरकार स्थिति पर नजर रख रही है, लेकिन फिलहाल कोई बड़ा राहत पैकेज घोषित नहीं हुआ।
यह युद्ध न सिर्फ ऊर्जा आपूर्ति (तेल कीमतों में उछाल), बल्कि भारत के 179 अरब डॉलर के गल्फ व्यापार और लाखों प्रवासियों की आजीविका को भी चुनौती दे रहा है। स्थिति पर नजर बनी हुई है—क्या जल्द शांति बहाल होगी, या संकट और गहराएगा?
