एनसीआर रिंग रेल: गाजियाबाद-नोएडा से हरियाणा तक का महा-नेटवर्क
नमो भारत के बाद अब दिल्ली-एनसीआर में कनेक्टिविटी की अगली बड़ी क्रांति ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (Orbital Rail Corridor) के रूप में आने वाली है। यह प्रोजेक्ट न केवल गाजियाबाद और नोएडा को सुपरफास्ट रफ़्तार देगा, बल्कि हरियाणा और यूपी के बीच एक नया ‘रिंग रेल’ नेटवर्क तैयार करेगा।
एनसीआर रिंग रेल: गाजियाबाद-नोएडा से हरियाणा तक का महा-नेटवर्क
यह ईस्टर्न ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर (EORC) दिल्ली के बाहर-बाहर एक रिंग रोड की तरह काम करेगा, जिससे यात्रियों को दिल्ली के भीतर प्रवेश किए बिना ही एनसीआर के प्रमुख शहरों तक पहुँचने की सुविधा मिलेगी।
1. रूट और विस्तार (लगभग 270 किमी)
यह कॉरिडोर हरियाणा और उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण औद्योगिक और आवासीय क्षेत्रों को जोड़ेगा:
हरियाणा: सोनीपत, कुंडली और पलवल।
उत्तर प्रदेश: बागपत, हापुड़, गाजियाबाद (दुहाई-दादरी), नोएडा और ग्रेटर नोएडा।
कनेक्टिविटी: यह पलवल से सोनीपत तक हरियाणा ऑर्बिटल रेल और पूर्व में ईस्टर्न ऑर्बिटल रेल का एक संगम होगा।
2. रफ़्तार और स्टेशन
स्पीड: इस कॉरिडोर पर ट्रेनें 160 किमी प्रति घंटा की रफ़्तार से दौड़ेंगी।
स्टेशन: गाजियाबाद और नोएडा के बीच मेट्रो और रैपिड रेल को मिलाकर लगभग 12 से 22 स्टेशन बनाने की योजना है।
3. गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट लिंक: महज 50 मिनट का सफर
यह कॉरिडोर जेवर एयरपोर्ट के यात्रियों के लिए किसी लाइफलाइन से कम नहीं होगा:
रूट: यह ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे के समानांतर चलेगा।
नमो भारत से जुड़ाव: इसे गाजियाबाद के दुहाई रैपिड रेल स्टेशन (दिल्ली-मेरठ RRTS कॉरिडोर) से जोड़ा जाएगा।
समय की बचत: इसके शुरू होने के बाद गाजियाबाद से नोएडा (जेवर) एयरपोर्ट की दूरी मात्र 45-50 मिनट में तय की जा सकेगी।
4. ट्रांसपोर्ट और लॉजिस्टिक्स हब
यह परियोजना केवल यात्रियों के लिए ही नहीं, बल्कि व्यापार के लिए भी ‘गेम चेंजर’ साबित होगी:
माल ढुलाई: दादरी को एक मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट हब के रूप में विकसित किया जाएगा, जहाँ इसे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) से जोड़ा जाएगा।
औद्योगिक लाभ: गाजियाबाद की लोहा मंडी और नोएडा के इलेक्ट्रॉनिक हब का माल सीधे बंदरगाहों तक पहुँच सकेगा।
विकास: कॉरिडोर के किनारे वेयरहाउसिंग और लॉजिस्टिक्स पार्क विकसित होंगे, जिससे बोड़ाकी और दुहाई जैसे क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में उछाल आएगा।
5. प्रमुख हाईवे और एक्सप्रेसवे से कनेक्टिविटी
यह नेटवर्क एनसीआर के लगभग सभी प्रमुख मार्गों को आपस में लिंक करेगा:
एक्सप्रेसवे: दिल्ली–मेरठ, ईस्टर्न पेरिफेरल और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे।
नेशनल हाईवे: NH-44 (मथुरा), NH-34 (मेरठ), NH-9 (हापुड़) और NH-334 C (बुलंदशहर)।
6. वर्तमान स्थिति और भविष्य
हरियाणा हिस्सा: पलवल-सोनीपत खंड का 60% से अधिक काम पूरा हो चुका है।
यूपी हिस्सा: गाजियाबाद-नोएडा-जेवर लिंक की फिजिबिलिटी रिपोर्ट तैयार है। केंद्र सरकार से अंतिम मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।
समय सीमा: उत्तर प्रदेश में इस प्रोजेक्ट का निर्माण कार्य 2026 के अंत या 2027 में शुरू होने की उम्मीद है।
प्रमुख लाभ: यह कॉरिडोर नई दिल्ली और पुरानी दिल्ली रेलवे स्टेशनों पर दबाव कम करेगा और यात्रियों को बिना ट्रैफिक के झंझट के एक शहर से दूसरे शहर तक पहुँचाएगा।
