भारतीय फोटोग्राफी के दिग्गज रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन
भारतीय फोटोग्राफी के दिग्गज रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन
भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को अपने लेंस से जीवंत करने वाले विश्व प्रसिद्ध छायाकार (फोटोग्राफर) रघु राय का रविवार तड़के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया। वह 83 वर्ष के थे और पिछले कुछ समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे।
बीमारी और अंतिम विदाई
उनके पुत्र नितिन राय के अनुसार, रघु राय पिछले दो वर्षों से कैंसर से लड़ रहे थे। शुरुआत में उन्हें प्रोस्टेट कैंसर हुआ, जिसके बाद संक्रमण पेट और अंततः मस्तिष्क तक फैल गया था। उम्र संबंधी अन्य दिक्कतों के कारण उनकी स्थिति नाजुक हो गई थी।
परिवार: उनके पीछे पत्नी गुरमीत, पुत्र नितिन और तीन बेटियां (लगन, अवनि और पूर्वाई) हैं।
अंतिम संस्कार: उनका अंतिम संस्कार रविवार शाम 4 बजे दिल्ली के लोधी श्मशान घाट में किया जाएगा।
जीवन परिचय: झंग से विश्व पटल तक
रघु राय का जन्म 18 दिसंबर 1942 को अविभाजित भारत के पंजाब प्रांत (अब पाकिस्तान) के झंग में हुआ था। उनका करियर 5 दशकों से भी अधिक लंबा रहा। उन्होंने न केवल तस्वीरें खींचीं, बल्कि फोटोग्राफी पर कई प्रभावशाली पुस्तकें भी लिखीं, जो आज भी नवागंतुक फोटोग्राफरों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
फोटो पत्रकारिता के ‘जीवंत दस्तावेज’
रघु राय ने भारतीय इतिहास की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील घटनाओं को कैमरे में कैद किया। उनकी तस्वीरें केवल चित्र नहीं, बल्कि ऐतिहासिक दस्तावेज मानी जाती हैं। उनके करियर के कुछ प्रमुख पड़ाव निम्नलिखित हैं:
आपातकाल (Emergency): देश के राजनीतिक उथल-पुथल को उन्होंने बखूबी दर्ज किया।
भोपाल गैस त्रासदी: इस मानवीय त्रासदी की उनकी खींची गई तस्वीरें आज भी रोंगटे खड़े कर देती हैं।
विविध भारत: उन्होंने भारत के साधुओं, संगीतकारों, मदर टेरेसा और आम जनजीवन को एक नई पहचान दी।
भोपाल गैस त्रासदी: वह तस्वीर जिसने दुनिया को झकझोर दिया
4 दिसंबर 1984 को रघु राय द्वारा खींची गई भोपाल गैस त्रासदी की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर (मिट्टी में दबे बच्चे की तस्वीर) ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तहलका मचा दिया था। यह फोटो उस भयानक हादसे के दर्द और चीख को आज भी जीवंत रखती है। बाद में, स्वतंत्र फोटो जर्नलिस्ट पाब्लो बार्थोलमियो ने इस त्रासदी की कुछ तस्वीरों को रंगीन स्वरूप भी दिया था।
इतिहास का काला पन्ना: यूनियन कार्बाइड हादसा
दिसंबर 1984 की वह रात भोपाल के लिए प्रलय बनकर आई थी:
कारण: यूनियन कार्बाइड फैक्ट्री के टैंक नंबर 610 से मिथाइल आइसोसाइनेट (MIC) गैस का रिसाव।
प्रभाव: गैस के पानी के साथ मिलने से यह जहरीला धुआं शहर के बड़े हिस्से में फैल गया।
हताहत: हादसे में तत्काल लगभग 3,000 लोगों की जान चली गई और हजारों लोग जीवन भर के लिए शारीरिक रूप से अक्षम हो गए।
निष्कर्ष: रघु राय ने अपनी कला के माध्यम से भारत की आत्मा को दुनिया के सामने रखा। उनका जाना कला जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी खींची गई तस्वीरें हमेशा इतिहास की गवाह बनकर जीवित रहेंगी।
