राजनीति

बिहार में नीतीश कुमार एक बार फिर सीएम, डिप्टी पद पर NDA में सस्पेंस चरम पर

बिहार में नीतीश कुमार एक बार फिर सीएम, डिप्टी पद पर NDA में सस्पेंस चरम पर

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस खत्म हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट ऐलान किया कि नीतीश कुमार ही एनडीए सरकार का नेतृत्व करेंगे। जेडीयू ने भी कहा कि “मुख्यमंत्री पद पर कोई वैकेंसी नहीं है”। नीतीश 10वीं बार 20 नवंबर को गांधी मैदान में शपथ लेंगे। हालांकि, डिप्टी सीएम के पदों को लेकर सहयोगी दलों में खींचतान तेज हो गई है, जो नई सरकार के गठन में बाधा बन सकती है।

चुनाव नतीजों के मुताबिक, एनडीए ने 243 सीटों में से 202 जीत लीं, जिसमें बीजेपी को 130, जेडीयू को 50, एलजेपी (रा) को 10, हम को 5 और आरएलएम को 7 सीटें मिलीं। महागठबंधन सिर्फ 29 पर सिमट गया। पीएम मोदी ने एक्स पर पोस्ट कर नीतीश को “सुशासन बाबू” कहकर बधाई दी और कहा कि उनकी जोड़ी विकास की गारंटी है। जेडीयू के ललन सिंह ने कहा कि नीतीश के नेतृत्व में ही चुनाव लड़ा गया, इसलिए कोई बदलाव नहीं। बीजेपी प्रभारी विनोद तावड़े ने भी सहमति जताई, लेकिन पांचों दलों की बैठक में अंतिम फैसला होने का संकेत दिया।

नीतीश ने 17 नवंबर को कैबिनेट बैठक बुलाई, जिसमें 17वीं विधानसभा भंग करने का प्रस्ताव पारित हुआ। सोमवार को उन्होंने राज्यपाल से मुलाकात कर इस्तीफा सौंप दिया। कार्यवाहक सीएम के रूप में वे 20 नवंबर तक बने रहेंगे। जेडीयू विधायक दल ने नीतीश को नेता चुना, जबकि बीजेपी की बैठक 19 नवंबर को होगी। शपथ से पहले मंत्रिमंडल विस्तार पर चर्चा तेज है। कुल 18-20 मंत्री बन सकते हैं, जिसमें जेडीयू को 8-10 और बीजेपी को 10-12 का कोटा मिल सकता है। विधानसभा अध्यक्ष जेडीयू को और परिषद सभापति बीजेपी को देने की सहमति बनी है।

डिप्टी सीएम पर असली सस्पेंस है। वर्तमान में दो डिप्टी सम्राट चौधरी (बीजेपी) और विजय कुमार सिन्हा (बीजेपी) हैं, लेकिन चुनावी हार के बाद भूमिहार समुदाय से सिन्हा का टिकट कट सकता है। सम्राट चौधरी का डिप्टी बने रहना तय माना जा रहा है, लेकिन दूसरा पद राजपूत चेहरे को देने की चर्चा है। नामों में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष नंद किशोर यादव, संजय मायukh या रणजय कुमार सिन्हा शामिल हैं। चिराग पासवान की एलजेपी (रा) एक डिप्टी मांग रही है, जबकि जीतन राम मांझी और उपेंद्र कुशवाहा भी दबाव बना रहे हैं। नीतीश जेडीयू को एक डिप्टी और विधानसभा अध्यक्ष देना चाहते हैं। बीजेपी आलाकमान अमित शाह की मध्यस्थता में दिल्ली में बैठकें हो रही हैं।

यह सस्पेंस एनडीए की एकजुटता पर सवाल खड़े कर रहा है। राजनीतिक विश्लेषक कहते हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद नीतीश को सीएम बनाकर क्षेत्रीय संतुलन बनाए रखना चाहती है। विपक्षी नेता तेजस्वी यादव ने इसे “एनडीए का आंतरिक कलह” कहा। शपथग्रहण से पहले अगर डिप्टी फॉर्मूला न तय हुआ तो देरी हो सकती है। बिहार की जनता सुशासन की उम्मीद में ताक रही है, लेकिन गठबंधन की ये खींचतान विकास एजेंडे को प्रभावित कर सकती है। कुल मिलाकर, नीतीश की वापसी तय है, लेकिन डिप्टी की कुर्सी पर दांव चल रहा है।

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