आजम खान और बेटे अब्दुल्ला को कोर्ट का झटका: पैन कार्ड फॉर्जरी मामले में 7 साल की सजा
आजम खान और बेटे अब्दुल्ला को कोर्ट का झटका: पैन कार्ड फॉर्जरी मामले में 7 साल की सजा
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम खान को रामपुर की विशेष एमपी/एमएलए कोर्ट ने पैन कार्ड फॉर्जरी मामले में दोषी ठहराते हुए सात-सात साल की कड़ी सजा सुनाई है। विशेष मजिस्ट्रेट शोभित बंसल ने दस्तावेजी साक्ष्य, बैंक रिकॉर्ड और आयकर अधिकारियों की गवाही के आधार पर यह फैसला सुनाया। दोनों को धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (मूल्यवान सुरक्षा की जालसाजी), 468 (धोखाधड़ी के लिए जालसाजी), 471 (जाली दस्तावेज का उपयोग) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत दोषी पाया गया। कोर्ट ने प्रत्येक पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया और फैसले के तुरंत बाद दोनों को हिरासत में ले लिया गया।
यह मामला 2019 का है, जब भाजपा नेता आकाश सक्सेना ने रामपुर के सिविल लाइंस थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, अब्दुल्ला आजम ने दो पैन कार्ड प्राप्त किए थे, जिनमें जन्मतिथि अलग-अलग बताई गई थी। एक पैन कार्ड में 1 जनवरी 1993 की तारीख थी, जो उनके स्कूल और हाईस्कूल प्रमाणपत्रों से मेल खाती थी। वहीं, दूसरे पैन कार्ड में 30 सितंबर 1990 की तारीख थी। अभियोजन पक्ष का दावा था कि आजम खान ने अपने बेटे के साथ मिलकर जाली दस्तावेज और बैंक रिकॉर्ड बनवाए, ताकि पुराने पैन को नया जाली वाला बदल सकें। यह सब अब्दुल्ला के स्वार विधानसभा सीट से नामांकन से पहले किया गया, जहां उन्होंने 2017 में चुनाव जीता था। कोर्ट ने पाया कि यह साजिश पिता-पुत्र के बीच हुई और जाली पैन को आधिकारिक रिकॉर्ड में जमा किया गया।
यह फैसला आजम खान के लिए चौथा दोषसिद्धि का मामला है। 77 वर्षीय आजम पर कुल 84 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें भूमि हड़पना, भ्रष्टाचार, आपराधिक धमकी और बकरी चोरी जैसे आरोप शामिल हैं। सितंबर 2023 में सितापुर जेल से जमानत पर रिहा होने के महज दो महीने बाद यह झटका लगा है। अब्दुल्ला, जो हरदोई जेल से नौ महीने पहले रिहा हुए थे, भी अब वापस जेल लौटेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल इस मामले में एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर चुका है।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे “सत्ता के अहंकार में अन्याय” करार दिया और कहा कि “अन्याय की हदें पार करने वाले अंततः प्रकृति के न्याय में फंस जाते हैं।” वहीं, शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना ने इसे “कानून की जीत” बताया, जो आजम के खिलाफ सभी मामलों में कागजी साक्ष्य पर आधारित हैं। भाजपा ने फैसले का स्वागत किया, जबकि सपा ने इसे राजनीतिक प्रतिशोध कहा। दोनों के पास उच्च न्यायालय में अपील का विकल्प है। यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के लिए बड़ा झटका है, खासकर रामपुर क्षेत्र में जहां आजम का प्रभाव रहा है। जैसे-जैसे आजम के मुकदमे बढ़ रहे हैं, सपा की रणनीति पर सवाल उठ रहे हैं।
