संसद में ‘सुलगी’ रसोई गैस की किल्लत: प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, सरकार को घेरा
संसद में ‘सुलगी’ रसोई गैस की किल्लत: प्रियंका गांधी के नेतृत्व में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन, सरकार को घेरा
देशभर में गहराते रसोई गैस (LPG) संकट और किल्लत को लेकर आज संसद परिसर में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा रहीं, जिन्होंने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर संसद के मकर द्वार पर सरकार विरोधी नारेबाजी की।
हाथों में तख्तियां और ‘PM Compromised’ के नारे
बुधवार सुबह जैसे ही सदन की कार्यवाही शुरू होने वाली थी, विपक्षी सांसद हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर जमा हो गए। प्रदर्शनकारी सांसदों ने आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी तनाव के बीच सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में पूरी तरह विफल रही है। प्रदर्शन के दौरान “जनता त्रस्त, सरकार मस्त” और “PM Is Compromised” जैसे तीखे नारे लगाए गए।
प्रियंका गांधी का तीखा हमला
मीडिया से बात करते हुए प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि रसोई गैस की कमी प्राकृतिक नहीं, बल्कि सरकार की गलत विदेश नीति और प्रशासनिक विफलता का नतीजा है। उन्होंने कहा:
“आज देश की महिलाएं चूल्हा फूंकने पर मजबूर हो रही हैं। सरकार ने अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर देश की ऊर्जा जरूरतों से समझौता किया है। आम जनता को गैस के लिए हफ़्तों इंतज़ार करना पड़ रहा है, लेकिन सरकार के पास कोई ठोस योजना नहीं है।”
विपक्ष के गंभीर आरोप
विपक्षी गठबंधन के नेताओं ने आरोप लगाया कि सरकार ने रूस और अन्य खाड़ी देशों से तेल-गैस आयात के मामले में अमेरिका के सामने घुटने टेक दिए हैं, जिसके कारण घरेलू बाजार में सप्लाई चेन पूरी तरह ध्वस्त हो गई है। सांसदों ने मांग की कि सरकार तुरंत संसद में इस पर श्वेत पत्र (White Paper) लाए और स्थिति स्पष्ट करे।
सदन के भीतर भी हंगामा
संसद परिसर में प्रदर्शन के बाद इसका असर सदन की कार्यवाही पर भी दिखा। विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा और लोकसभा दोनों ही सदनों में स्थगन प्रस्ताव (Adjournment Motion) देकर गैस संकट पर तत्काल चर्चा की मांग की। हंगामे के चलते सदन की कार्यवाही को बार-बार स्थगित करना पड़ा।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी है किल्लत?
गौरतलब है कि पिछले कुछ हफ़्तों से देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी में 15 से 20 दिनों की देरी हो रही है। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए दो रिफिल के बीच 25 दिनों के अनिवार्य अंतर (Gap) का नियम लागू किया है और आवश्यक वस्तु अधिनियम (ECA) के तहत सख्त निर्देश जारी किए हैं, जिससे जनता में भारी नाराजगी है।
