संसद में ‘सुलगी’ रसोई गैस की किल्लत: विपक्ष का मकर द्वार पर प्रदर्शन, सदन में रविशंकर प्रसाद का तीखा पलटवार
संसद में ‘सुलगी’ रसोई गैस की किल्लत: विपक्ष का मकर द्वार पर प्रदर्शन, सदन में रविशंकर प्रसाद का तीखा पलटवार
देशभर में गहराते रसोई गैस (LPG) संकट को लेकर आज संसद में भारी हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य चेहरा कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा रहीं, जिन्होंने अन्य विपक्षी नेताओं के साथ मिलकर संसद के मकर द्वार पर सरकार विरोधी नारेबाजी की।
मकर द्वार पर ‘रण’: प्रियंका गांधी का सरकार पर हमला
बुधवार सुबह सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले विपक्षी सांसद हाथों में “PM Is Compromised” और “जनता त्रस्त, सरकार मस्त” की तख्तियां लेकर जमा हो गए। प्रियंका गांधी ने मीडिया से बात करते हुए आरोप लगाया कि पश्चिम एशिया के तनाव के बीच सरकार ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रही है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दबाव में आकर सरकार ने देश की रसोई को संकट में डाल दिया है।
सदन की कार्यवाही: भाजपा का करारा जवाब
हंगामे के कारण सदन को कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। स्थगन के बाद जैसे ही कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, भाजपा के वरिष्ठ सांसद और पूर्व मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला।
रविशंकर प्रसाद के संबोधन के मुख्य अंश:
* हंगामे की राजनीति: उन्होंने कहा कि विपक्ष का मकसद चर्चा करना नहीं, बल्कि सिर्फ सदन की कार्यवाही में बाधा डालना है।
* तथ्यों की अनदेखी: प्रसाद ने आरोप लगाया कि विपक्ष बेवजह डर का माहौल पैदा कर रहा है, जबकि सरकार स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हर संभव कदम उठा रही है।
* सदन का अपमान: उन्होंने जोर देकर कहा, “देश की जनता देख रही है कि कैसे विपक्ष महत्वपूर्ण मुद्दों पर सार्थक बहस के बजाय सिर्फ शोर-शराबे की राजनीति कर रहा है।”
सदन का वर्तमान हाल
रविशंकर प्रसाद के बयान के बाद सत्तापक्ष ने चर्चा को आगे बढ़ाने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी सांसद अपनी मांगों (श्वेत पत्र और तुरंत राहत) पर अड़े रहे। सदन के भीतर लगातार नारेबाजी और शोर-शराबे के चलते कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में मुश्किल आ रही है। सूत्रों की मानें तो गैस संकट पर विपक्ष का यह आक्रामक रुख अगले कुछ दिनों तक जारी रह सकता है।
पृष्ठभूमि: क्यों बढ़ी है किल्लत?
देश के कई हिस्सों में एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी में 15 से 20 दिनों की देरी हो रही है। सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए दो रिफिल के बीच 25 दिनों के अनिवार्य अंतर (Gap) का नियम लागू किया है, जिससे मध्यम वर्ग और गरीब परिवारों में भारी नाराजगी है।
