बढ़ता वजन बन रहा है माता-पिता बनने में बाधा: प्रजनन क्षमता पर मोटापे का ‘विलेन’ अवतार
यह एक अत्यंत गंभीर और समसामयिक विषय है। बढ़ता वजन केवल बाहरी दिखावट का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह शरीर के आंतरिक प्रजनन तंत्र (Reproductive System) को भी प्रभावित करता है।
यहाँ इस विषय पर एक विस्तृत समाचार रिपोर्ट दी गई है:
बढ़ता वजन बन रहा है माता-पिता बनने में बाधा: प्रजनन क्षमता पर मोटापे का ‘विलेन’ अवतार
नई दिल्ली: आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी, खराब खान-पान और शारीरिक सक्रियता की कमी के कारण मोटापा एक वैश्विक महामारी का रूप ले चुका है। लेकिन इसका सबसे डरावना असर अब युवाओं की प्रजनन क्षमता (Fertility) पर देखने को मिल रहा है। हालिया शोध और विशेषज्ञों की राय के अनुसार, बढ़ता वजन महिला और पुरुष, दोनों के माता-पिता बनने के सपने के बीच एक बड़ी दीवार खड़ी कर रहा है।
महिलाओं पर असर: हार्मोनल असंतुलन और PCOD का खतरा
महिलाओं में मोटापे का सीधा संबंध उनके हार्मोन्स से होता है। शरीर में अत्यधिक वसा (Fat) होने से निम्नलिखित समस्याएं उत्पन्न होती हैं:
PCOS/PCOD की समस्या: अधिक वजन वाली महिलाओं में ‘पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम’ का खतरा बढ़ जाता है, जिससे अंडाशय (Ovaries) में अंडे ठीक से नहीं बन पाते।
अनियमित मासिक धर्म: फैट सेल्स एस्ट्रोजन हार्मोन के स्तर को बिगाड़ देते हैं, जिससे पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं और ओव्यूलेशन की प्रक्रिया बाधित होती है।
गर्भपात का जोखिम: मोटापे के कारण न केवल गर्भधारण में मुश्किल आती है, बल्कि कंसीव करने के बाद भी गर्भपात (Miscarriage) का खतरा अधिक रहता है।
पुरुषों पर असर: शुक्राणुओं की गुणवत्ता में गिरावट
अक्सर यह माना जाता है कि प्रजनन क्षमता की समस्या केवल महिलाओं में होती है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि पुरुषों का बढ़ता वजन भी उतना ही जिम्मेदार है:
स्पर्म काउंट में कमी: मोटापे के कारण पुरुषों के शरीर में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है और एस्ट्रोजन बढ़ जाता है, जिससे शुक्राणुओं की संख्या (Sperm Count) कम हो जाती है।
DNA डैमेज: अधिक वजन वाले पुरुषों के शुक्राणुओं की गतिशीलता (Motility) कम हो जाती है और उनके डीएनए स्ट्रक्चर में खराबी आने की संभावना बढ़ जाती है।
लिबिडो में कमी: बढ़ता वजन शारीरिक क्षमता और इच्छा (Libido) को भी नकारात्मक रूप से प्रभावित करता है।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
प्रजनन विशेषज्ञों (Infertility Specialists) का मानना है कि यदि कोई दंपत्ति माता-पिता बनने की योजना बना रहा है, तो उन्हें सबसे पहले अपने BMI (Body Mass Index) पर ध्यान देना चाहिए।
”यदि आपका वजन सामान्य से 10-15% भी ज्यादा है, तो यह गर्भधारण की संभावना को काफी कम कर सकता है। अच्छी बात यह है कि केवल 5% से 10% वजन कम करके भी प्रजनन क्षमता में भारी सुधार देखा जा सकता है।”
बचाव के उपाय: जीवनशैली में बदलाव जरूरी
अगर आप भी इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो ये छोटे बदलाव बड़े परिणाम दे सकते हैं:
संतुलित आहार: अपनी डाइट में प्रोटीन और फाइबर बढ़ाएं, चीनी और जंक फूड से दूरी बनाएं।
नियमित व्यायाम: दिन में कम से कम 30-45 मिनट की सैर या कार्डियो एक्सरसाइज करें।
तनाव प्रबंधन: स्ट्रेस हार्मोन्स प्रजनन क्षमता के सबसे बड़े दुश्मन हैं। योग और मेडिटेशन का सहारा लें।
पर्याप्त नींद: शरीर के हार्मोनल बैलेंस के लिए 7-8 घंटे की गहरी नींद अनिवार्य है।
निष्कर्ष:
माता-पिता बनने की यात्रा में वजन एक बड़ी चुनौती जरूर है, लेकिन यह लाइलाज नहीं है। सही समय पर सजगता और जीवनशैली में सुधार इस बाधा को दूर कर खुशियों के द्वार खोल सकता है।
