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​चीन के कंधे पर सवार पाकिस्तान का स्पेस मिशन; ड्रैगन ने लॉन्च किया ‘PRSC-EO3’ सैटेलाइट

चीन और पाकिस्तान की दोस्ती अब ज़मीन और समंदर के बाद अंतरिक्ष में भी गहरी होती जा रही है। ताज़ा घटनाक्रम में, चीन ने एक बार फिर पाकिस्तान के ‘स्पेस मिशन’ को सहारा देते हुए उसके एक महत्वपूर्ण सैटेलाइट को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुँचाया है।

​यहाँ इस घटना पर आधारित विस्तृत समाचार रिपोर्ट दी गई है:

​चीन के कंधे पर सवार पाकिस्तान का स्पेस मिशन; ड्रैगन ने लॉन्च किया ‘PRSC-EO3’ सैटेलाइट

​बीजिंग/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अंतरिक्ष कार्यक्रम को एक बार फिर चीन से बड़ी संजीवनी मिली है। शनिवार (25 अप्रैल, 2026) की रात चीन ने अपने ताइयुआन सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से पाकिस्तान के रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट PRSC-EO3 को सफलतापूर्वक लॉन्च किया। यह मिशन पूरी तरह से चीन के लॉन्ग मार्च-6 (Long March-6) रॉकेट के जरिए संपन्न हुआ।

​क्या है PRSC-EO3 और क्यों है खास?

​यह एक ‘इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल’ सैटेलाइट है जिसे पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी SUPARCO ने चीन के सहयोग से तैयार किया है। इसके प्रमुख उपयोग निम्नलिखित होंगे:

​पृथ्वी की निगरानी (Earth Observation): यह सैटेलाइट उच्च-गुणवत्ता वाली तस्वीरें भेजेगा, जिससे पाकिस्तान को प्राकृतिक संसाधनों की मैपिंग में मदद मिलेगी।

​आपदा प्रबंधन: बाढ़, भूकंप और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान रीयल-टाइम डेटा उपलब्ध कराएगा।

​कृषि और पर्यावरण: फसलों की सेहत और पर्यावरणीय बदलावों पर नज़र रखने में यह मील का पत्थर साबित होगा।

​अंतरिक्ष में चीन-पाक का ‘ऑल वेदर’ गठबंधन

​विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान अपने अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए पूरी तरह से चीन पर निर्भर हो चुका है।

​चौथा बड़ा मिशन: पिछले एक साल के भीतर चीन द्वारा लॉन्च किया गया यह पाकिस्तान का चौथा सैटेलाइट है। इससे पहले 2024 में ICUBE-Q (चंद्र मिशन) और PakSat-MM1 को भी चीन ने ही लॉन्च किया था।

​पाकिस्तानी अंतरिक्ष यात्रियों की ट्रेनिंग: खबर यह भी है कि दो पाकिस्तानी नागरिक चीन में ‘एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग’ के लिए पहुँच चुके हैं। इनमें से एक को चीन के तियांगोंग (Tiangong) स्पेस स्टेशन पर भेजने की योजना है।

​भारत के लिए क्या हैं इसके मायने?

​पाकिस्तान के अंतरिक्ष मिशन में चीन की यह सक्रियता भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय हो सकती है।

​”चीन केवल सैटेलाइट लॉन्च नहीं कर रहा, बल्कि पाकिस्तान के साथ अपना सैन्य और तकनीकी सहयोग (Dual-use Technology) भी बढ़ा रहा है। रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट्स का इस्तेमाल नागरिक कार्यों के साथ-साथ रणनीतिक निगरानी (Surveillance) के लिए भी किया जा सकता है।”

​पाक पीएम ने जताई खुशी

​पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने इस मिशन को ‘ऐतिहासिक उपलब्धि’ करार दिया है। उन्होंने सुपारको (SUPARCO) के वैज्ञानिकों को बधाई देते हुए कहा कि चीन का निरंतर सहयोग पाकिस्तान को आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है। हालांकि, तकनीकी विश्लेषकों का कहना है कि रॉकेट और लॉन्चिंग पैड के लिए चीन पर निर्भरता यह बताती है कि पाकिस्तान अभी अपनी खुद की लॉन्चिंग क्षमता विकसित करने से कोसों दूर है।

​मुख्य बिंदु:

​लॉन्च सेंटर: ताइयुआन, चीन।

​रॉकेट: लॉन्ग मार्च-6।

​मिशन: 640वां लॉन्ग मार्च मिशन।

​मकसद: रिमोट सेंसिंग और अर्थ ऑब्जर्वेशन।

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