‘हमने यह नहीं कहा कि 25 सीटें आईं तो संन्यास लेंगे’: प्रशांत किशोर ने राजनीति छोड़ने के कयासों पर लगाया ब्रेक
‘हमने यह नहीं कहा कि 25 सीटें आईं तो संन्यास लेंगे’: प्रशांत किशोर ने राजनीति छोड़ने के कयासों पर लगाया ब्रेक
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में जन सुराज पार्टी (जेएसपी) को मिली करारी हार के बाद राजनीति से संन्यास लेने के कयासों पर पूर्व चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने साफ कर दिया है कि वे बिहार को सुधारने के संकल्प से पीछे नहीं हटेंगे। एक साक्षात्कार में उन्होंने कहा, “हमने यह नहीं कहा कि नीतीश कुमार की जेडीयू को 25 सीटें आ गईं तो राजनीति से संन्यास ले लूंगा। हमने कहा था कि अगर जेडीयू को 25 से ज्यादा सीटें मिलीं तो बिहार की जनता को यह संदेश दे देंगे कि व्यवस्था बदलने की जरूरत है।” किशोर ने जोर देकर कहा कि हार से निराशा हुई, लेकिन यह उनकी यात्रा का अंत नहीं है।
चुनाव नतीजों के अनुसार, एनडीए ने 202 सीटें जीतकर प्रचंड बहुमत हासिल किया, जिसमें जेडीयू को 50 सीटें मिलीं। वहीं, महागठबंधन 29 पर सिमट गया और जन सुराज को मात्र 12 सीटें नसीब हुईं। किशोर ने 2024 में अपनी पार्टी लॉन्च करते हुए दावा किया था कि अगर जेडीयू को 25 से अधिक सीटें आईं तो वे राजनीति छोड़ देंगे। लेकिन अब उन्होंने इसे स्पष्ट किया कि यह वादा व्यवस्था परिवर्तन का संकेत था, न कि व्यक्तिगत संन्यास का। उन्होंने कहा, “बिहार नहीं छोड़ेंगे। दोगुनी मेहनत से व्यवस्था बदलने का प्रयास जारी रखेंगे। जनता ने हमें मौका दिया है, हम इसे व्यर्थ नहीं जाने देंगे।” किशोर ने नीतीश सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि “नीतीश सरकार ने 10 हजार रुपये का बयाना दिया, लेकिन वादे पूरे नहीं किए।”
यह बयान बिहार की सियासत में हलचल मचा रहा है। एनडीए के नेतृत्व में नीतीश कुमार 20 नवंबर को शपथ लेंगे, लेकिन विपक्षी खेमे में तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर जैसे चेहरे अपनी रणनीति पर पुनर्विचार कर रहे हैं। किशोर की जन सुराज ने युवाओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों पर जोर दिया था, लेकिन वोट बंटवारे के कारण हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किशोर का यह फैसला 2029 के लोकसभा चुनाव में उनकी भूमिका को मजबूत कर सकता है। उन्होंने कहा, “हमने 12 सीटें जीतीं, जो शुरुआत है। अगली बार हम मजबूत लौटेंगे।”
किशोर का यह स्टैंड सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस के कुछ नेताओं की टिप्पणियों पर भी प्रतिक्रिया है, जो उन्हें संन्यास की सलाह दे रहे थे। कुल मिलाकर, प्रशांत किशोर ने साफ संदेश दिया कि बिहार की राजनीति में उनकी मौजूदगी बरकरार रहेगी। यह बयान न केवल उनकी पार्टी को मजबूती देगा, बल्कि विपक्षी एकता पर भी असर डालेगा। जैसे-जैसे नई सरकार बनने की प्रक्रिया तेज हो रही है, किशोर की भूमिका पर सबकी नजरें टिकी हैं।
