राजनीति

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज: अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव खारिज: अमित शाह ने विपक्ष पर तीखा हमला बोला

लोकसभा में आज केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए गए अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष पर जमकर हमला बोला। बहस के बाद प्रस्ताव ध्वनिमत से खारिज हो गया, जिसके बाद सदन की कार्यवाही गुरुवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।

प्रस्ताव की पृष्ठभूमि

विपक्षी दलों (मुख्य रूप से कांग्रेस के नेतृत्व में INDIA गठबंधन) ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपातपूर्ण व्यवहार, विपक्षी सांसदों को बोलने से रोकने और सदन की निष्पक्षता भंग करने का आरोप लगाते हुए अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था। यह प्रस्ताव कांग्रेस सांसद मोहम्मद जावेद ने पेश किया, जिस पर 118 से अधिक विपक्षी सांसदों के हस्ताक्षर थे। चर्चा के लिए कुल 10 घंटे का समय निर्धारित किया गया था, जिसमें मंगलवार को काफी हिस्सा कवर हो चुका था।

विपक्ष के प्रमुख आरोपों में शामिल थे:

स्पीकर द्वारा विपक्ष के नेता राहुल गांधी को महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने से रोका जाना।

कुछ महिला सांसदों पर “बेबुनियाद” आरोप लगाना।

सदन की कार्यवाही में सरकार के पक्ष में पक्षपात करना।

अमित शाह का तीखा संबोधन

गृह मंत्री अमित शाह ने आज लोकसभा में प्रस्ताव का जवाब देते हुए इसे अफसोसजनक और दुर्दैवी घटना बताया। उन्होंने कहा कि यह लगभग चार दशकों बाद स्पीकर के खिलाफ ऐसा प्रस्ताव आया है, जो लोकतंत्र की नींव पर सवाल उठाता है। उनके प्रमुख बिंदु निम्नलिखित थे:

संविधान ने स्पीकर को मध्यस्थ (mediator) की भूमिका दी है, जो किसी पार्टी से ऊपर होता है। विपक्ष ने इस संस्था पर संदेह डालकर संसद की गरिमा को ठेस पहुंचाई है।

पिछले 75 वर्षों में संसद ने लोकतंत्र को मजबूत बनाया है, लेकिन विपक्ष अब उसकी बदनामी कर रहा है।

सदन कोई मेला नहीं है; यह नियमों और अनुशासन से चलता है। नियम न मानने वाले सदस्यों का माइक बंद किया जाएगा।

विपक्ष को गैरजिम्मेदार करार देते हुए कहा कि वे संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के हस्तक्षेप की बात करते हैं, लेकिन ऐसा पहले कभी नहीं देखा गया।

स्पीकर पूरे सदन के हैं, किसी एक पार्टी के नहीं। उनका निर्णय अंतिम होता है।

विपक्ष पर तंज कसते हुए कांग्रेस के पुराने “पापों” (जैसे इमरजेंसी) का जिक्र किया।

शाह के भाषण के दौरान सदन में हंगामा हुआ, जिसमें गौरव गोगोई जैसे विपक्षी नेताओं के साथ तीखी बहस हुई। अमित शाह ने कहा, “देश ने कभी ऐसी गैरजिम्मेदार विपक्ष नहीं देखी।”

बहस और मतदान का परिणाम

चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष ने स्पीकर की निष्पक्षता और उपलब्धियों का बचाव किया। एनडीए के पास बहुमत होने के कारण प्रस्ताव पास होने की कोई संभावना नहीं थी। अंत में ध्वनिमत से प्रस्ताव खारिज हो गया। पीठासीन अधिकारी जगदंबिका पाल ने कार्यवाही स्थगित की।

यह घटना बजट सत्र के दूसरे चरण में राजनीतिक तनाव को दर्शाती है, जहां विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच टकराव जारी है। स्पीकर ओम बिरला का पद सुरक्षित रहा, और सरकार ने इसे लोकतंत्र की मजबूती के रूप में पेश किया।

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