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यूपी के स्कूलों में नई शिक्षा नीति लागू: बैग लेकर स्कूल नहीं जाएंगे बच्चे, ये है प्लान

यूपी के स्कूलों में नई शिक्षा नीति लागू: बैग लेकर स्कूल नहीं जाएंगे बच्चे, ये है प्लान

उत्तर प्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को पूरी ताकत से लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। अब राज्य के सरकारी और सहायता प्राप्त स्कूलों में छात्रों को साल में कम से कम 10 ‘बैगलेस डेज’ (बिना बैग के दिन) मनाने होंगे। इसका मतलब है कि बच्चे बिना स्कूल बैग के स्कूल जाएंगे, और इन दिनों पारंपरिक किताबी पढ़ाई के बजाय व्यावहारिक गतिविधियों पर जोर दिया जाएगा। यह बदलाव छात्रों के बोझ को कम करने और उनकी रचनात्मकता बढ़ाने के उद्देश्य से लाया गया है। शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को निर्देश जारी कर दिए हैं, और यह योजना अगले शैक्षणिक सत्र से पूरी तरह प्रभावी हो जाएगी।

यह पहल एनईपी 2020 के तहत ‘नो बैग डे’ की सिफारिश पर आधारित है, जो कक्षा 6 से 8 तक के छात्रों के लिए विशेष रूप से डिजाइन की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार ने सितंबर 2023 में ही इसकी शुरुआत की थी, लेकिन अब मार्च 2025 में जारी नोटिफिकेशन के बाद इसे और मजबूत किया गया है। शिक्षा विभाग के अनुसार, इन 10 दिनों को महीने में एक या दो बार रखा जाएगा, खासकर शनिवार को, ताकि छात्र-शिक्षक संबंध मजबूत हो सकें।

बैगलेस डेज का प्लान: क्या होगा इन दिनों?

गतिविधियां: इन दिनों छात्र मौखिक शिक्षण, प्रयोगात्मक विधियों, कला, क्विज, खेल, शिल्पकला और व्यावसायिक कौशल सीखेंगे। स्थानीय कारीगरों, बागवानों या कलाकारों से मुलाकात कर वे नई चीजें सीखेंगे।

स्थान: स्कूल के बाहर घुमाव – ऐतिहासिक स्थलों, सांस्कृतिक स्मारकों या पर्यटन स्थलों पर विजिट। गर्मियों में मई-जून में समर कैंप भी आयोजित होंगे।

लाभ: छात्रों का तनाव कम होगा, रचनात्मकता बढ़ेगी और किताबी ज्ञान के अलावा जीवन कौशल विकसित होंगे। एनईपी के अनुसार, यह ‘हैंड्स-ऑन’ लर्निंग को बढ़ावा देगा।

अन्य बदलाव: स्कूलों में नई व्यवस्था

एनईपी लागू करने के साथ यूपी सरकार ने स्कूलों की समय-सारिणी में भी बड़े बदलाव किए हैं:

पढ़ाई के घंटे: हफ्ते में सिर्फ 29 घंटे की पढ़ाई। मुख्य विषयों (जैसे हिंदी, अंग्रेजी, गणित, विज्ञान) की कक्षाएं 35-50 मिनट की होंगी।

साप्ताहिक छुट्टियां: महीने के पहले और तीसरे शनिवार को पूर्ण छुट्टी। दूसरे शनिवार को सिर्फ 2-2.5 घंटे की कक्षाएं।

बैग का वजन: कक्षा 1-10 तक छात्रों के बैग का वजन उनके शरीर के वजन का 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए। स्कूलों में लॉकर और वजन मशीनें लगाई जाएंगी।

भाषा नीति: त्रिभाषा फॉर्मूला – हिंदी के साथ एक भारतीय भाषा (जैसे संस्कृत, उर्दू) और एक आधुनिक भाषा। माध्यम भाषा में लचीलापन, जैसे उर्दू या अन्य।

ये बदलाव उत्तर प्रदेश के 1.04 करोड़ से ज्यादा छात्रों को प्रभावित करेंगे, जिनमें से 54 लाख से अधिक यूपी बोर्ड परीक्षाओं के लिए रजिस्टर्ड हैं। राज्य सरकार का दावा है कि इससे शिक्षा प्रणाली अधिक समावेशी और छात्र-केंद्रित बनेगी। हालांकि, कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी को दूर करने की जरूरत है।

आगे की राह: चुनौतियां और उम्मीदें

एनईपी 2020 को यूपी में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है, जो 2022 से शुरू हुआ था। शिक्षा मंत्री गुलाब देवी ने कहा, “यह बदलाव बच्चों को बोझमुक्त बनाएंगे और उनकी समग्र विकास सुनिश्चित करेंगे।” लेकिन सफलता के लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग और संसाधनों की जरूरत होगी।

यूपी के स्कूल अब सिर्फ किताबों की नहीं, बल्कि जीवन की सीख के केंद्र बनने की ओर अग्रसर हैं। क्या यह नीति वाकई क्रांति लाएगी? समय बताएगा।

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