उत्तराखंड

हल्द्वानी बनभूलपुरा: फर्जी प्रमाण पत्र रैकेट का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार; डेमोग्राफिक चेंज की साजिश उजागर

हल्द्वानी बनभूलपुरा: फर्जी प्रमाण पत्र रैकेट का भंडाफोड़, 3 गिरफ्तार; डेमोग्राफिक चेंज की साजिश उजागर

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के हल्द्वानी स्थित बनभूलपुरा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज बनाने वाले गिरोह का पुलिस ने भंडाफोड़ कर दिया। एसएसपी विनीत कुमार के सख्त निर्देश पर सदर कोतवाली पुलिस ने रविवार को छापेमारी कर गिरोह के तीन मुख्य सदस्यों – फैजान मिकरानी, रईस अहमद और दिनेश सिंह दासपा – को गिरफ्तार किया। पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह स्थायी निवास प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और जाति प्रमाणपत्रों के फर्जी दस्तावेज तैयार कर ‘डेमोग्राफिक चेंज’ की साजिश रच रहा था। इससे सरकारी योजनाओं का गलत लाभ लेने और वोट बैंक बनाने की कोशिश हो रही थी। कुमाऊं कमिश्नर दीपक रावत ने मामले को गंभीर बताते हुए प्रदेशव्यापी जांच के आदेश दिए हैं।

गिरफ्तारी 15 नवंबर को शाम को हुई, जब मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने बनभूलपुरा के एक किराए के मकान पर दबिश दी। वहां से 50 से ज्यादा फर्जी प्रमाणपत्र, लैपटॉप, प्रिंटर, स्टैंप पेपर और फर्जी ईमेल आईडी की लिस्ट बरामद हुई। एसएसपी विनीत कुमार ने बताया, “गिरोह ने हिंदू दंपति देवेंद्र पांडे और नंदी पांडे के नाम से फर्जी ईमेल बनाकर बरेली निवासी रईस अहमद को हल्द्वानी का स्थायी निवासी दिखाया। रईस के पिता को मृत घोषित कर 4 दिनों में दस्तावेज तैयार किए गए।” फैजान मिकरानी (CSC संचालक और तहसील अर्जीनवीस) गिरोह का मास्टरमाइंड था, जो 25 साल से हल्द्वानी में सक्रिय है। रईस अहमद (बरेली) और दिनेश सिंह दासपा (स्थानीय बिचौलिया) उसके सहयोगी थे। गिरोह प्रति दस्तावेज 5,000 से 20,000 रुपये वसूलता था।

मुख्य आरोपी फैजान ने पूछताछ में कबूल किया कि वे सरकारी वेबसाइट्स हैक कर फर्जी डेटा जनरेट करते थे। RTI से शिकायतकर्ता को संदेह हुआ, जिसने तहसील में अर्जीनवीस के रूप में काम करने वाले फैजान की पोल खोली। कमिश्नर रावत ने 13 नवंबर को CSC सेंटर पर रेड की थी, जहां फर्जीवाड़े के सुराग मिले। अब तहसील कर्मचारियों, पटवारी और बिजली विभाग की मिलीभगत की जांच चल रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “ये बहरूपिए हमारी पहचान को चुनौती दे रहे हैं। पूरे राज्य में सख्त सत्यापन ड्राइव चलाएं।”

यह मामला बनभूलपुरा की पुरानी समस्याओं को फिर उजागर करता है, जहां 2024 में अवैध निर्माण पर बुलडोजर चला था। गिरोह का नेटवर्क बांग्लादेशी मूल के लोगों तक फैला था, जो अवैध घुसपैठ को स्थानीय बनाते थे। पुलिस ने IPC की धारा 420 (धोखाधड़ी), 467 (जालसाजी) और IT एक्ट के तहत FIR दर्ज की। ED और CBI को भी सूचित किया गया है। संवेदनशीय क्षेत्रों में डोर-टू-डोर सर्वे शुरू हो गया है, जहां आधार-लिंक्ड वेरिफिकेशन होगा।

विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, “माइग्रेशन रोकने के नाम पर अल्पसंख्यक टारगेट हो रहे।” BJP ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा’ बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल वेरिफिकेशन सिस्टम मजबूत करने की जरूरत है। क्या यह अभियान पूरे नेटवर्क को तोड़ेगा? पुलिस ने 5 करोड़ का इनाम घोषित किया है मुखबिरों के लिए। फिलहाल, हल्द्वानी में सतर्कता बरती जा रही है।

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