उत्तराखंड

उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों का काला कारनामा: बनभूलपुरा से शुरू होकर पूरे राज्य में सनसनी, CM धामी ने कही सख्ती की बात

उत्तराखंड में फर्जी दस्तावेजों का काला कारनामा: बनभूलपुरा से शुरू होकर पूरे राज्य में सनसनी, CM धामी ने कही सख्ती की बात

उत्तराखंड के नैनीताल जिले के बनभूलपुरा क्षेत्र में फर्जी दस्तावेज तैयार करने का सनसनीखेज मामला सामने आने के बाद सरकारी तंत्र में हड़कंप मच गया है। स्थानीय पुलिस ने एक गैंग का भंडाफोड़ किया, जो स्थाई निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र, आधार कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों के फर्जी नमूने तैयार कर अवैध घुसपैठियों को स्थानीय निवासी दिखाने का काम कर रहा था। इस नेटवर्क से जुड़े 12 संदिग्धों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें से कुछ बांग्लादेशी मूल के हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे ‘राज्य की सुरक्षा के लिए खतरा’ बताते हुए अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पूरे राज्य में सत्यापन अभियान चलाकर ऐसे गैंगों को जड़ से उखाड़ फेंका जाए।

मामला हल्द्वानी के बनभूलपुरा इलाके से शुरू हुआ, जो पहले भी अवैध निर्माण और हिंसा के लिए चर्चा में रहा। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली कि एक किराए के मकान में फर्जी दस्तावेज बनाने का कारखाना चल रहा था। छापेमारी में 50 से ज्यादा फर्जी प्रमाणपत्र, लैपटॉप, प्रिंटर और स्टैंप पेपर बरामद हुए। एसएसपी नैनीताल विनीत कुमार ने बताया, “गैंग सरकारी वेबसाइट्स हैक कर फर्जी डेटा जनरेट करता था। ये दस्तावेज वोट बैंक बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए इस्तेमाल हो रहे थे।” गिरफ्तार आरोपियों में मुख्य संदिग्ध राशिद अली (35, बांग्लादेशी मूल) शामिल है, जो 2018 से उत्तराखंड में सक्रिय था। अन्य सदस्य स्थानीय बिचौलिए हैं, जो 5,000 से 20,000 रुपये प्रति दस्तावेज वसूलते थे।

यह मामला राज्यव्यापी जांच का रूप ले चुका है। CM धामी ने शनिवार को देहरादून में उच्च स्तरीय बैठक बुलाई, जहां उन्होंने कहा, “ये बहरूपिए हमारी पहचान और सुरक्षा को चुनौती दे रहे हैं। हर जिले में सख्त सत्यापन प्रणाली लागू करें।” सरकार अब आधार-लिंक्ड सत्यापन, डोर-टू-डोर सर्वे और डिजिटल वेरिफिकेशन ड्राइव शुरू करने जा रही है। संवेदनशील क्षेत्रों जैसे हल्द्वानी, रुद्रपुर, काशीपुर और देहरादून में विशेष टीमें गठित की गई हैं। डीजीपी अभिनव कुमार ने बताया, “हम ED और CBI के साथ मिलकर फंडिंग और अंतरराष्ट्रीय लिंक की जांच करेंगे।” यह अभियान 1 दिसंबर तक चलेगा, जिसमें 10 लाख से ज्यादा दस्तावेजों की पड़ताल होगी।

बनभूलपुरा का यह इलाका पहले 2024 की हिंसा के लिए जाना जाता था, जहां अवैध मस्जिद और मदरसे पर बुलडोजर चला था। अब फर्जी दस्तावेजों का खुलासा वोट बैंक पॉलिटिक्स पर सवाल खड़े कर रहा है। विपक्षी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा, “माइग्रेशन रोकने के नाम पर अल्पसंख्यकों को टारगेट किया जा रहा।” वहीं, BJP ने इसे ‘राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा’ बताया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह घुसपैठ का बड़ा रैकेट है, जो बांग्लादेश से जुड़ा हो सकता है।

सरकार ने 5 करोड़ रुपये का इनाम घोषित किया है मुखबिरों के लिए। क्या यह अभियान फर्जी नेटवर्क को तोड़ पाएगा? फिलहाल, उत्तराखंड में सतर्कता बढ़ गई है।

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