राजनीति

‘अगर चुनाव निष्पक्ष होते तो BSP जीतती कई सीटें’: बिहार नतीजों पर मायावती का चुनाव आयोग पर हमला, वोट गिनती पर उठाए सवाल

‘अगर चुनाव निष्पक्ष होते तो BSP जीतती कई सीटें’: बिहार नतीजों पर मायावती का चुनाव आयोग पर हमला, वोट गिनती पर उठाए सवाल

बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों पर बसपा सुप्रीमो मायावती ने जोरदार हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि अगर चुनाव “पूरी तरह निष्पक्ष” होते तो उनकी पार्टी कई और सीटें जीत जाती। मायावती ने वोटों की बार-बार गिनती कराने के बहाने स्थानीय प्रशासन और विपक्षी दलों द्वारा बसपा उम्मीदवारों को हराने की साजिश का आरोप लगाया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट में उन्होंने कहा, “बिहार के इस इलाके में अन्य सीटों पर भी कड़ी टक्कर देने के बावजूद बसपा के उम्मीदवार जीत नहीं सके। फीडबैक के मुताबिक, अगर चुनाव पूरी तरह निष्पक्ष होते तो बसपा निश्चित रूप से कई और सीटें जीत जाती, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।”

यह बयान 14 नवंबर को आए चुनाव परिणामों के दो दिन बाद आया है, जब एनडीए ने 202 सीटें हासिल कर महागठबंधन को 35 सीटों पर सिमटा दिया। बसपा ने 192 सीटों पर चुनाव लड़ा, लेकिन सिर्फ रामगढ़ से सतीश कुमार सिंह यादव की जीत हुई, जहां उन्होंने भाजपा के आशोक कुमार सिंह को मात्र 30 वोटों से हराया। मायावती ने रामगढ़ के उम्मीदवार को बधाई देते हुए कहा, “पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई, उनका तहेदिल से आभार।” उन्होंने दावा किया कि रामगढ़ में भी वोट गिनती दोबारा कराने के बहाने बसपा को हराने की कोशिश की गई।

मायावती का यह बयान विपक्ष के उन आरोपों को हवा देता है जो चुनाव से पहले से ही वोटर लिस्ट और मतदान प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे थे। चुनाव आयोग ने जून 2025 में विशेष गहन संशोधन (SIR) का ऐलान किया था, जिसमें 2003 की वोटर लिस्ट से बाहर नामों के लिए अतिरिक्त दस्तावेज मांगे गए। कांग्रेस और आरजेडी ने इसे दलित-मुस्लिम वोटर्स को प्रभावित करने वाला बताया था। हालांकि, एनडीए ने इसे “वोटर लिस्ट शुद्धिकरण” करार दिया। मायावती ने कहा, “पार्टी कार्यकर्ताओं को निराश न हों, हिम्मत रखें।”

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि बसपा का वोट शेयर महागठबंधन को ज्यादा नुकसान पहुंचा, खासकर दलित वोटों में सेंध लगाकर। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, बसपा ने एक और सीट पर सेकंड पोजीशन हासिल की। पूर्व मुख्यमंत्री मायावती, जो उत्तर प्रदेश में 2007-2012 तक सत्ता में रहीं, ने लोकसभा चुनाव में भी बिहार में खाता नहीं खोला था। उनका यह बयान बसपा को पुनर्जीवित करने की कोशिश लगता है।

विपक्षी दलों ने मायावती के बयान का समर्थन किया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, “चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।” वहीं, भाजपा ने इसे “हार का रोना” बताया। क्या मायावती का आरोप चुनावी विवाद को नई जिंदगी देगा? फिलहाल, 20 नवंबर को नीतीश कुमार के शपथ ग्रहण से पहले राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। बसपा कार्यकर्ताओं के लिए मायावती का संदेश साफ है – “लड़ाई जारी रहेगी।”

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