संभल जामा मस्जिद विवाद: ASI टीम से अभद्रता का मामला, इंतजामिया कमेटी के दो सदस्यों पर गंभीर धाराओं में FIR
संभल जामा मस्जिद विवाद: ASI टीम से अभद्रता का मामला, इंतजामिया कमेटी के दो सदस्यों पर गंभीर धाराओं में FIR
उत्तर प्रदेश के संभल जिले की शाही जामा मस्जिद में संरक्षण निरीक्षण के लिए पहुंची भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) टीम के साथ अभद्रता का मामला सामने आया है। मस्जिद इंतजामिया कमेटी के दो सदस्यों पर ASI अधिकारियों को मुख्य गुंबद में प्रवेश करने से रोकने और माहौल बिगाड़ने का आरोप है। संभल कोतवाली पुलिस ने शनिवार को भारतीय न्याय संहिता (BNS) की गंभीर धाराओं के तहत FIR दर्ज की है। यह घटना 8 अक्टूबर को हुई थी, जब ASI की मेरठ सर्कल टीम ने मस्जिद का सर्वे किया था। पुलिस का कहना है कि आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
ASI के सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट विनोद सिंह रावत के नेतृत्व में मेरठ सर्कल की टीम 8 अक्टूबर को संभल कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला कोट पूर्वी स्थित शाही जामा मस्जिद पहुंची थी। टीम का उद्देश्य मस्जिद की स्थिति का आकलन कर संरक्षण कार्य की योजना बनाना था। लेकिन निरीक्षण के दौरान कमेटी सदस्य हाफिज ने मोहम्मद कासिफ खान को बुलाया, और दोनों ने कथित तौर पर ASI अधिकारियों को मुख्य गुंबद क्षेत्र में घुसने से रोका। एक अज्ञात व्यक्ति ने आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल कर विवाद भड़काने की कोशिश की, जिससे टीम को बिना सर्वे पूरा किए मेरठ लौटना पड़ा। ASI ने घटना की लिखित शिकायत मेरठ मुख्यालय को भेजी, जिसके बाद संभल पुलिस को सूचित किया गया।
FIR संभल थाने में 14 नवंबर को दर्ज हुई, जिसमें हाफिज और मोहम्मद कासिफ खान के खिलाफ BNS की धारा 132 (सार्वजनिक सेवक के कर्तव्य निर्वहन में बाधा), 352 (सार्वजनिक सेवक पर जानबूझकर अपमान या आपराधिक बल प्रयोग) और 351(2) (आपराधिक धमकी) लगाई गई हैं। एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने बताया, “शिकायत पर केस दर्ज कर लिया गया है। आरोपी दोषी पाए गए तो सख्त कार्रवाई होगी।” स्टेशन हाउस ऑफिसर गजेंद्र सिंह ने कहा कि जांच में यह पुष्टि हुई कि टीम को अवैध रूप से रोका गया, जो केंद्र संरक्षित स्मारक के नियमों का उल्लंघन है।
यह घटना संभल जामा मस्जिद विवाद को नया मोड़ दे रही है। 1920 में केंद्र सरकार द्वारा संरक्षित यह मुगलकालीन स्मारक पहले भी विवादों में रहा है। 2018 में भी कमेटी पर अनधिकृत संशोधन (जैसे स्टील रेलिंग लगाना) के लिए FIR दर्ज हुई थी, लेकिन आदेश लागू नहीं हुए। हाल ही में 24 नवंबर 2024 को अदालत के आदेश पर सर्वे के दौरान हिंसा हुई थी, जिसमें 4 मौतें हुईं। ASI ने कोर्ट में हलफनामा देकर कहा कि कमेटी द्वारा अनधिकृत बदलाव किए गए, जैसे ऐतिहासिक कुएं को ढकना। अब ASI मस्जिद का प्रबंधन अपने हाथ में लेने की मांग कर रही है।
स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने FIR का विरोध किया है। मस्जिद कमेटी के प्रवक्ता ने कहा, “ASI टीम बिना पूर्व सूचना के आई, इसलिए सुरक्षा कारणों से रोका गया। यह धार्मिक स्थल है, सर्वे के लिए अनुमति जरूरी।” वहीं, हिंदू संगठनों ने ASI के पक्ष में आवाज उठाई, “संरक्षित स्मारक पर कमेटी का कब्जा गैरकानूनी है।” सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2024 में सर्वे रोक दिया था, लेकिन संरक्षण निरीक्षण अलग मुद्दा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह घटना ऐतिहासिक स्मारकों के प्रबंधन में ASI की भूमिका पर सवाल खड़े करती है। क्या FIR से विवाद सुलझेगा या तनाव बढ़ेगा? पुलिस ने इलाके में फोर्स तैनात कर दी है। फिलहाल, जांच जारी है, और आरोपी गिरफ्त में आने पर पूछताछ होगी। संभल में शांति बहाल रखने के लिए प्रशासन सतर्क है।
