कनाडा ने लौटाईं 2 साल पुरानी PR एप्लीकेशन्स, हजारों भारतीयों को लगा बड़ा झटका
कनाडा की इमिग्रेशन अथॉरिटी IRCC (इमिग्रेशन, रेफ्यूजीज़ एंड सिटिज़नशिप कनाडा) ने पुरानी पर्मानेंट रेसिडेंसी (PR) एप्लीकेशन्स पर कड़ा रुख अपनाते हुए हज़ारों भारतीय आवेदकों को बड़ा झटका दिया है। हालिया अपडेट के तहत, 2023 और 2024 में जमा की गई कई एप्लीकेशन्स को ‘बैकलॉग क्लियरेंस’ के नाम पर रिजेक्ट या रिटर्न कर दिया गया है। अनुमान है कि इससे 50,000 से अधिक भारतीय प्रभावित हुए हैं, जो सालों से PR का इंतज़ार कर रहे थे। विशेषज्ञों का कहना है कि कनाडा की नई इमिग्रेशन पॉलिसी, जो टेम्पररी रेसिडेंट्स को कम करने पर फोकस कर रही है, इसकी मुख्य वजह है।
IRCC की 2025 प्रोसेसिंग प्लान के अनुसार, केवल चुनिंदा प्रोग्राम्स जैसे एक्सप्रेस एंट्री (FSWP, CEC, FSTP) और क्यूबेक स्किल्ड वर्कर प्रोग्राम में सभी पेंडिंग एप्लीकेशन्स को क्लियर किया जाएगा। लेकिन केयरगिवर पायलट, स्टार्ट-अप वीज़ा और अटलांटिक इमिग्रेशन प्रोग्राम (AIP) जैसे प्रोग्राम्स में महज 2-33% ही प्रोसेस होंगी। उदाहरण के लिए, केयरगिवर बैकलॉग में 34,000 से अधिक एप्लीकेशन्स हैं, जिनमें से सिर्फ 14% ही 2025 में फाइनल होंगी। स्टार्ट-अप वीज़ा में तो मात्र 2% क्लियरेंस का लक्ष्य है, जिससे वेट टाइम 400 महीने से अधिक हो सकता है।
यह फैसला इमिग्रेशन लेवल्स प्लान 2025-27 का हिस्सा है, जिसमें PR एडमिशन्स को 485,000 पर सीमित रखा गया है—पिछले साल के 673,650 से काफी कम। IRCC ने स्पष्ट किया कि पुरानी एप्लीकेशन्स, जो सर्विस स्टैंडर्ड (6-12 महीने) से बाहर हो चुकी हैं, को प्राथमिकता नहीं मिलेगी। जनवरी से अगस्त 2025 तक IRCC ने 298,500 डिसीज़न्स लिए और 276,900 नए PR जारी किए, लेकिन बैकलॉग अभी भी 52% है। कुल इन्वेंटरी में 2.2 मिलियन एप्लीकेशन्स हैं, जिनमें से PR के 842,600 में 364,000 बैकलॉग में अटकी हैं।
भारतीय आवेदकों पर इसका असर सबसे ज़्यादा पड़ा है। कनाडा में 1.8 मिलियन भारतीय मूल के लोग रहते हैं, और हर साल 1 लाख से अधिक PR के लिए अप्लाई करते हैं। दिल्ली के इमिग्रेशन कंसल्टेंट राजेश शर्मा ने बताया, “हमारे क्लाइंट्स, जो 2023 में एप्लाई किए थे, को रिटर्न नोटिस मिला है। कारण—डिजिटल ट्रांज़िशन और प्रायोरिटी शिफ्ट। अब उन्हें दोबारा अप्लाई करना पड़ेगा, जिसमें नए फीस और डॉक्यूमेंट्स लगेंगे।” टोरंटो में रहने वाले एक भारतीय स्टूडेंट ने सोशल मीडिया पर शेयर किया, “दो साल की मेहनत बेकार। PR रिजेक्ट हो गई, अब क्या करूं?”
विपक्षी लेबर पार्टी ने इसे ‘क्रूर नीति’ बताया है, जबकि लिबरल गवर्नमेंट का कहना है कि यह सिस्टम को साफ करने और इन-कनाडा रहने वालों को प्राथमिकता देने का कदम है। फरवरी 2025 में बैकलॉग 821,200 था, जो अब 779,900 तक कम हुआ है, लेकिन PR कैटेगरी में 43% अभी भी लटकी हैं। IRCC ने एडवाइज़ किया कि प्रभावित आवेदक पोर्टल चेक करें और री-अप्लाई करें।
यह घटना भारतीय डायस्पोरा में निराशा फैला रही है। क्या कनाडा का ‘वेलकम मैट’ अब सिकुड़ रहा है? विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 तक बैकलॉग और कम होगा, लेकिन पुराने आवेदकों को नया मौका तलाशना होगा। फिलहाल, हज़ारों परिवारों का सपना अधर में लटक गया है।
