राजनीति

‘देशहित में बयान था, एंटी-पार्टी नहीं’, RK सिंह ने BJP छोड़ी; सुबह ही सस्पेंड हुई थी सदस्यता

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में एनडीए की प्रचंड जीत के ठीक एक दिन बाद, भाजपा को आंतरिक झटका लगा। पूर्व केंद्रीय मंत्री और वरिष्ठ नेता आर.के. सिंह ने शनिवार सुबह पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया। यह कदम पार्टी द्वारा जारी सस्पेंशन नोटिस और शो-कॉज नोटिस के कुछ घंटों बाद आया। सिंह ने अपने इस्तीफे के पत्र में स्पष्ट कहा कि उनका विवादित बयान एंटी-पार्टी नहीं, बल्कि देशहित, समाजहित और पार्टी के हित में था। उन्होंने टिकट वितरण में अपराधी पृष्ठभूमि वाले नेताओं को प्राथमिकता देने पर सवाल उठाए थे, जो पार्टी में असहजता पैदा कर गया।

सुबह करीब 10 बजे बिहार भाजपा के राज्य मुख्यालय प्रभारी अरविंद शर्मा ने सिंह को नोटिस जारी किया, जिसमें “एंटी-पार्टी गतिविधियों” का आरोप लगाते हुए एक सप्ताह में जवाब मांगा गया। नोटिस में कहा गया कि सिंह की गतिविधियों से पार्टी को नुकसान पहुंचा है और उन्हें निष्कासित करने पर विचार किया जा सकता है। इससे कुछ ही घंटों बाद सिंह ने भाजपा अध्यक्ष जे.पी. नड्डा को पत्र लिखकर इस्तीफा सौंप दिया। एक्स (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट की गई चिट्ठी में सिंह ने लिखा, “शो-कॉज नोटिस में मेरी एंटी-पार्टी गतिविधियों का उल्लेख नहीं किया गया। मेरा बयान अपराधीकरण को रोकने और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने के लिए था। यह राष्ट्रहित में है, लेकिन पार्टी में कुछ लोग इससे असहज हैं। मैंने राज्य कार्यालय को जवाब दिया है। अब मैं भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देता हूं।”

आर.के. सिंह, जो 1975 बैच के बिहार कैडर के पूर्व आईएएस अधिकारी हैं, ने 2013 में भाजपा जॉइन की थी। वे 2014 और 2019 में आरा लोकसभा सीट से सांसद बने और 2017 में मोदी कैबिनेट में ऊर्जा मंत्री रहे। 2024 लोकसभा चुनाव में वे हार गए, जिसके बाद उनकी पार्टी नेतृत्व से नाराजगी बढ़ती गई। चुनाव से ठीक पहले नवंबर 2025 में उन्होंने बिहार में बिजली विभाग में 62,000 करोड़ रुपये के कथित घोटाले का आरोप लगाया, जिसमें अदानी समूह को 1050 एकड़ जमीन मात्र 1 रुपये में देने और बिजली दर 6.08 रुपये प्रति यूनिट तय करने का दावा किया। उन्होंने उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष दिलीप जायसवाल पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए, जो प्रशांत किशोर के दावों से मेल खाते थे।

सिंह ने अक्टूबर में फेसबुक पोस्ट में अपराधी रिकॉर्ड वाले नेताओं को टिकट न देने की अपील की थी। उन्होंने चुनाव आयोग पर भी मॉडल कोड ऑफ कंडक्ट (एमसीसी) लागू न करने का आरोप लगाया, खासकर मोकामा में जन सुराज कार्यकर्ता दुलारचंद यादव की हत्या के बाद। इन बयानों से पार्टी में कलह बढ़ी। भाजपा ने सिंह के अलावा एमएलसी अशोक कुमार अग्रवाल और कटिहार मेयर उषा अग्रवाल को भी सस्पेंड किया, जिन्होंने अपने बेटे सौरभ को विकासशील इंसान पार्टी (वीआईपी) से कटिहार सीट पर उतारा था।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सिंह का इस्तीफा भाजपा की आंतरिक अनुशासनहीनता को उजागर करता है। एनडीए ने 202 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, लेकिन सिंह जैसे वरिष्ठ नेता की बगावत पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा सकती है। पूर्व गृह सचिव रह चुके सिंह ने पत्र में कहा, “मैंने पार्टी हाईकमान को साजिशकर्ताओं के नाम बताए थे, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।” विपक्ष ने इसे भाजपा में भ्रष्टाचार की पुष्टि बताया। आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट किया, “सिंह का बयान सच्चाई का आईना है। एनडीए का ‘सुशासन’ भ्रष्टाचार का पर्याय बन गया।”

सिंह के भविष्य पर सवाल उठ रहे हैं। क्या वे नई पार्टी बनाएंगे या निर्दलीय रहेंगे? फिलहाल, भाजपा ने कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी। यह घटना बिहार की सियासत में नया मोड़ ला सकती है, जहां एनडीए सरकार गठन की तैयारी में जुटा है। सिंह का यह कदम पार्टी के ‘एक परिवार’ की छवि को चुनौती देता है।

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