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अल-फलाह ट्रस्ट के संचालक जावेद सिद्दीकी पर शक: 90 करोड़ की धोखाधड़ी कर फरार, अब दिल्ली ब्लास्ट से लिंक

अल-फलाह ट्रस्ट के संचालक जावेद सिद्दीकी पर शक: 90 करोड़ की धोखाधड़ी कर फरार, अब दिल्ली ब्लास्ट से लिंक

फरीदाबाद: दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के पास 10 नवंबर को हुए धमाके की जांच ने अब अल-फलाह यूनिवर्सिटी के संस्थापक जावेद अहमद सिद्दीकी को निशाने पर ले लिया है। नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एनआईए) और दिल्ली पुलिस को शक है कि सिद्दीकी का विस्तृत बिजनेस नेटवर्क और पुराना फ्रॉड केस आतंकी साजिश से जुड़ा हो सकता है। सिद्दीकी, जो अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन और यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं, 2000 में 90 करोड़ रुपये के निवेश घोटाले में आरोपी बनाए गए थे। उस समय उन्होंने फर्जी निवेश योजनाओं के जरिए लोगों को लूटा और फरार हो गए थे। अब एनआईए ने उनके मध्य प्रदेश के महू स्थित पैतृक घर पर छापा मारा है, जहां परिवार के सदस्यों से पूछताछ हो रही है।

सिद्दीकी का जन्म 1964 में मध्य प्रदेश के महू में हुआ। इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय से बीटेक करने के बाद वे जामिया मिलिया इस्लामिया में लेक्चरर बने, लेकिन जल्द ही बिजनेस की ओर रुख किया। 1992 में अल-फलाह इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड की स्थापना की, जो चिट फंड स्कीम चलाती थी। दिल्ली के न्यू फ्रेंड्स कॉलोनी थाने में दर्ज एफआईआर नंबर 43/2000 के अनुसार, सिद्दीकी और उनके भाई सऊद ने लोगों को ऊंचा रिटर्न का लालच देकर 7.5 करोड़ रुपये (कुछ रिपोर्ट्स में 90 करोड़ तक) जमा कराए, लेकिन फर्जी दस्तावेज बनाकर पैसे हड़प लिए। आईपीसी की धारा 420 (धोखाधड़ी), 406 (विश्वासघात) और 120बी (षड्यंत्र) के तहत केस दर्ज हुआ। 2001 में गिरफ्तारी के बाद वे तीन साल तिहाड़ जेल में रहे। बाद में केस सेटल हो गया, लेकिन अब दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े सबूतों ने पुराने घाव खोल दिए हैं।

एनआईए को शक है कि सिद्दीकी का नेटवर्क विस्फोटकों की तस्करी का हब था। अल-फलाह ट्रस्ट के तहत नौ कंपनियां चल रही हैं—अल-फलाह इन्वेस्टमेंट, मेडिकल रिसर्च फाउंडेशन, डेवलपर्स, सॉफ्टवेयर, एनर्जी आदि—जिनका रजिस्टर्ड एड्रेस दिल्ली के जामिया नगर में अल-फलाह हाउस ही है। यूनिवर्सिटी के मेडिकल कॉलेज में गिरफ्तार डॉक्टर उमर नबी, मुजम्मिल शकील गनई और शाहीन सईद ने यहीं मीटिंग्स कीं। बिल्डिंग नंबर 17, रूम नंबर 13 को ‘प्लानिंग हब’ बताया जा रहा है। एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ईडी) पहले से यूनिवर्सिटी की फंडिंग की जांच कर रही है, जो विदेशी स्रोतों से संदिग्ध लग रही है।

चौथी कार यूनिवर्सिटी पार्किंग से बरामद: 32 कारों वाली सीरियल ब्लास्ट की साजिश

जांच का एक और बड़ा खुलासा तब हुआ जब एनआईए ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी की पार्किंग से चौथी संदिग्ध कार बरामद की। यह हुंडई i20 नहीं, बल्कि एक पुरानी टोयोटा कोरrola थी, जो ब्लास्ट वाली i20 की तरह ही मॉडिफाई की गई थी। कार के अंदर 50 किलो अमोनियम नाइट्रेट, डेटोनेटर्स और फ्यूल ऑयल के अवशेष मिले, जो JeM के सिग्नेचर स्टाइल से मेल खाते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह कार पुलवामा से लाई गई थी और यूनिवर्सिटी के स्टाफ पार्किंग में छिपाई गई। डॉक्टरों ने यहां 32 कारों वाली सीरियल ब्लास्ट प्लानिंग की थी—दिल्ली, अयोध्या और मुंबई को टारगेट। पहली i20 (2014 मॉडल) गुरुग्राम से खरीदी गई, दूसरी ओखला से, तीसरी फरीदाबाद से, और यह चौथी यूनिवर्सिटी के ही गैराज से।

सिद्दीकी फरीदाबाद के धौज गांव स्थित 78 एकड़ कैंपस से गायब हैं। दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को महू में उनके चार मंजिला घर ‘मौलाना बिल्डिंग’ का ताला तोड़ा, लेकिन घर खाली था। पड़ोसियों ने बताया कि 2001 के फ्रॉड के बाद वे दिल्ली भाग गए। उनके सौतेले भाई अफाम पर मर्डर केस है। एनआईए ने रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने की तैयारी की है। यूनिवर्सिटी में कश्मीरी डॉक्टरों की भर्ती पर सवाल उठे हैं—कई सस्ते दामों पर लिए गए, जो रेडिकलाइजेशन का शिकार हुए। वीसी डॉ. भूपिंदर कौर आनंद ने कहा, “हम सहयोग कर रहे हैं, लेकिन संस्था निर्दोष है।”

यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे की घंटी है। ईडी ने फंडिंग ट्रेल की जांच तेज कर दी, जबकि एनआईए तुर्की-पाक लिंक खंगाल रही है। सिद्दीकी का डिजिटल फुटप्रिंट लगभग शून्य है, जो संदेह को और गहरा रहा है। क्या यह ‘व्हाइट कॉलर टेरर’ का नया चैप्टर है? जांच से और राज खुलने की उम्मीद है।

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