उत्तराखंड

रामनगर मांस विवाद: हाईकोर्ट की फटकार से पुलिस हरकत में, भाजपा नेता मदन जोशी को नोटिस – क्या बचेगी छवि?

रामनगर मांस विवाद: हाईकोर्ट की फटकार से पुलिस हरकत में, भाजपा नेता मदन जोशी को नोटिस – क्या बचेगी छवि?

उत्तराखंड के रामनगर में ‘मांस विवाद’ ने सांप्रदायिक तनाव को हवा दे दी थी, लेकिन अब कानून का डंडा चलने लगा है। हाईकोर्ट की सख्त फटकार के बाद नैनीताल पुलिस ने भाजपा के पूर्व मंडल अध्यक्ष मदन जोशी, राजू रावत और जतिन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। SSP विनीत कुमार ने तीनों को नोटिस जारी कर 10 दिसंबर को ACJM कोर्ट रामनगर में पेश होने का आदेश दिया। नोटिस में साफ चेतावनी: पेश न होने पर गिरफ्तारी और संपत्ति कुर्की। पुलिस ने तीनों के घरों पर नोटिस चस्पा कर दिए – एक कदम जो राजनीतिक हलकों में भूचाल ला रहा है। क्या यह सांप्रदायिक सद्भाव की बहाली का संकेत है, या भाजपा नेता की छवि पर काला धब्बा?

यह मामला 23 अक्टूबर को छौई क्षेत्र में शुरू हुआ। एक ट्रक चालक नासिर पर ‘बीफ’ ले जाने का शक हुआ, तो भीड़ ने लात-घूंसों से पीटा। हमले का वीडियो लाइव स्ट्रीम कर दिया गया – सोशल मीडिया पर आग लगाने वाला। नासिर की पत्नी नूरजहां ने हाईकोर्ट में सुरक्षा याचिका दायर की। उनकी वकील मृणाल कंवर ने अदालत को बताया: “मदन जोशी ने हिंसा से पहले फेसबुक पर भड़काऊ पोस्ट और लाइव वीडियो डाले। यह गौ-रक्षा के नाम पर साजिश थी।” हाईकोर्ट ने पुलिस को लताड़ा: “सांप्रदायिक हिंसा भड़काने वालों पर कार्रवाई क्यों नहीं?” 29 अक्टूबर को SSP को 7 दिनों में रिपोर्ट पेश करने का आदेश। 6 नवंबर तक रिपोर्ट आई – दो गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन जोशी जैसे मुख्य आरोपी फरार।

अब पुलिस का सख्त रुख। SSP विनीत कुमार ने कहा, “हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन हो रहा है। नोटिस चस्पा कर दिए। कोर्ट में पेश न होने पर गिरफ्तारी होगी।” FIR में मदन जोशी, राजू रावत, सागर मनराल, पंकज, करण और 20-30 अज्ञातों पर IPC की धारा 153A (सांप्रदायिक नफरत), 147 (दंगा), 323 (मारपीट) लगी। नासिर को अस्पताल पहुंचाने में पुलिस की लापरवाही भी उजागर हुई – पहले थाने ले गए, फिर इलाज। नूरजहां ने कहा, “यह न्याय की जीत है। मेरे पति की जान बच गई, लेकिन घाव गहरे हैं।” स्थानीय मुस्लिम समुदाय ने राहत जताई, लेकिन हिंदू संगठनों ने इसे “राजनीतिकरण” बताया।

मदन जोशी – रामनगर BJP के पूर्व मंडल अध्यक्ष – का नाम विवादों से अजनबी नहीं। गौ-रक्षा के नाम पर सक्रिय, लेकिन अब सोशल मीडिया पोस्ट हटाने का हाईकोर्ट आदेश। BJP ने चुप्पी साधी, लेकिन जिला अध्यक्ष ने कहा, “पार्टी निर्दोषों का साथ देगी। जांच पूरी होने दें।” विपक्ष कांग्रेस ने इसे “भाजपा का असली चेहरा” बताया। पूर्व CM हरीश रावत ने ट्वीट: “हाईकोर्ट ने साबित किया – नफरत की राजनीति बर्दाश्त नहीं।” यह घटना उत्तराखंड के सांप्रदायिक संवेदनशील इलाकों (रामनगर जैसे) में सतर्कता बढ़ा रही। SSP ने क्षेत्र में पैट्रोलिंग बढ़ाई, सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सख्त।

विश्लेषकों का मानना: हाईकोर्ट का हस्तक्षेप लोकतंत्र की ताकत दिखाता है। लेकिन सवाल बाकी – क्या जोशी जैसे नेता सुधरेंगे? या नफरत की आग फिर भड़केगी? 10 दिसंबर कोर्ट में जवाब आएगा। रामनगर की सड़कें शांत हैं, लेकिन घाव ताजा। क्या न्याय मिलेगा? कमेंट्स में बताएं!

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