हल्द्वानी में पत्रकार पर जानलेवा हमला: अवैध अतिक्रमण की खबर ने बुलाई मौत, नहर में फेंक घायल – दो बदमाश गिरफ्तार!
हल्द्वानी में पत्रकार पर जानलेवा हमला: अवैध अतिक्रमण की खबर ने बुलाई मौत, नहर में फेंक घायल – दो बदमाश गिरफ्तार!
कल्पना कीजिए, दोपहर का उजाला, एक पत्रकार कैमरा थामे सच्चाई उजागर करने निकलता है। लेकिन अतिक्रमण की दीवार तोड़ने की कोशिश में उसे खुद नहर की गहराई में धकेल दिया जाता है। उत्तराखंड के हल्द्वानी में सरकारी सिंचाई नहर पर अवैध निर्माण की रिपोर्टिंग कर रहे स्थानीय पत्रकार दीपक अधिकारी पर बदमाशों का जानलेवा हमला हुआ। दिन दहाड़े लाठियों से पीटा, धक्का देकर 10 फीट गहरे नाले में फेंका – यह घटना न सिर्फ पत्रकारिता की आजादी पर सवाल खड़ी करती है, बल्कि अतिक्रमण के काले कारोबार को भी उजागर कर रही है। दीपक गंभीर रूप से घायल हैं, लेकिन जिंदगी से जंग लड़ रहे। पुलिस ने दो मुख्य आरोपियों – अजीत चौहान और अनिल चौहान – को गिरफ्तार कर लिया है। क्या यह सिर्फ एक हमला है, या सिस्टम की नाकामी का आईना?
घटना हल्द्वानी के ऊंचापुल क्षेत्र की है, जहां गौला नदी की सिंचाई नहर पर सालों से अवैध कब्जे चल रहे हैं। दीपक अधिकारी, एक फ्रीलांस पत्रकार जो लोकल न्यूज पोर्टल्स के लिए काम करते हैं, को नहर किनारे हो रहे अवैध निर्माण की टिप मिली। दोपहर करीब 2 बजे वे वीडियो रिकॉर्डिंग के लिए पहुंचे। लेकिन वहां मौजूद दबंगों ने उन्हें देखते ही लाठियां भांज दीं। हमले का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया – इसमें साफ दिख रहा है कि कैसे दीपक को घसीटा गया और नहर में धकेल दिया। चश्मदीदों के मुताबिक, “वे चिल्ला रहे थे, लेकिन बदमाशों ने कहा – ‘खबर मत लिखो, वरना जान से जाओगे।'” दीपक को तुरंत सूसराड़ा स्थित निजी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने बताया कि सिर पर गहरी चोट, कई पसलियां टूटीं और पैर में फ्रैक्चर। वे ICU में हैं, लेकिन खतरा टल गया।
पुलिस हरकत में आ गई। मुखानी थाने में दीपक की शिकायत पर IPC की धारा 307 (हत्या का प्रयास), 323 (मारपीट), 147 (दंगा) और 506 (धमकी) के तहत मुकदमा दर्ज हुआ। SSP प्रदीप कुमार सिंह ने कहा, “दोनों आरोपी – अजीत और अनिल चौहान – भाई हैं और इलाके के कुख्यात दबंग। वे नहर पर अवैध प्लॉटिंग कर रहे थे। वीडियो सबूतों के आधार पर रात ही गिरफ्तार कर लिए। पूछताछ में और नाम उजागर हो सकते हैं।” चौंकाने वाली बात: यही आरोपी कुछ दिनों पहले एक अन्य पत्रकार पर भी हमला कर चुके थे। फरवरी में बनभूलपुरा अतिक्रमण हटाओ अभियान के दौरान कई पत्रकार घायल हुए थे, और अजीत-अनिल का नाम आया था। क्या यह सिलसिला अतिक्रमण माफिया का है?
हल्द्वानी का यह इलाका अतिक्रमण का हॉटस्पॉट बन चुका है। काठगोदाम से दमुवाढूंगा तक गौला नहर पर दुकानें, मकान और प्लॉट्स उग आए हैं। हाईकोर्ट ने फरवरी 2025 में जनहित याचिका पर सुनवाई कर सरकार से रिपोर्ट मांगी थी। DM वंदना सिंह ने कोर्ट में स्वीकार किया कि अतिक्रमण से नहर का जल प्रवाह बाधित हो रहा, जिससे किसानों को नुकसान। मार्च में सिंचाई विभाग ने अभियान चलाया – अधिशासी अभियंता तरुण बंसल की टीम ने बरेली रोड पर 5 टीनशेड और 10 गुमटियां हटाईं। लेकिन अतिक्रमणकारी दोबारा कब्जा जमा लेते हैं। स्थानीय किसान राम सिंह ने कहा, “नहर सूखी पड़ी है, फसलें मर रही हैं। पत्रकार साहब ने आवाज उठाई, तो हमला। ये माफिया सिस्टम को खरीद लेते हैं।”
यह घटना पत्रकारिता के लिए खतरे की घंटी है। उत्तराखंड में पिछले साल 5 पत्रकारों पर हमले हो चुके – ज्यादातर पर्यावरण और अतिक्रमण कवरेज के दौरान। प्रेस क्लब ऑफ हल्द्वानी ने विरोध मार्च निकाला, और UTNUA (उत्तराखंड टाइगर न्यूज यूनियन) ने CM पुष्कर सिंह धामी से सुरक्षा की मांग की। विपक्ष कांग्रेस ने इसे “पत्रकारों का शिकार” बताया, जबकि BJP ने “कानून अपना काम करेगा” कहा। SSP ने भरोसा दिलाया: “CCTV फुटेज और मेडिकल रिपोर्ट से केस मजबूत। आरोपी जमानत न पाएं।”
दीपक की जंग जारी है – अस्पताल के बेड से वे कहते हैं, “सच्चाई की कीमत चुकानी पड़ी, लेकिन रुकोगे नहीं।” हल्द्वानी की सड़कें शांत लग रही हैं, लेकिन अतिक्रमण का काला साया लंबा है। क्या पुलिस माफिया के पूरे नेटवर्क को उजागर करेगी? या यह सिर्फ एक और खबर बनकर रह जाएगा? जांच जारी, अपडेट जल्द। क्या आपकी नजर में पत्रकारिता सुरक्षित है? कमेंट्स में बताएं!
