दिल्ली का JLN स्टेडियम टूटेगा: खेल मंत्रालय ने ‘स्पोर्ट्स सिटी’ पर लगाई मुहर, कतर-ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर बनेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा
दिल्ली का JLN स्टेडियम टूटेगा: खेल मंत्रालय ने ‘स्पोर्ट्स सिटी’ पर लगाई मुहर, कतर-ऑस्ट्रेलिया मॉडल पर बनेगी वर्ल्ड-क्लास सुविधा
नई दिल्ली: दिल्ली के आइकॉनिक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम (JLN) का दौर खत्म होने वाला है। खेल मंत्रालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला लेते हुए पुराने स्टेडियम को तोड़कर 102 एकड़ में नई ‘स्पोर्ट्स सिटी’ बसाने की मंजूरी दे दी। यह परियोजना कतर के लुसैल स्टेडियम और ऑस्ट्रेलिया के सिडनी ओलंपिक पार्क जैसे आधुनिक मॉडल पर आधारित होगी। उद्देश्य स्पष्ट है – भारत को 2036 ओलंपिक की मेजबानी के लिए तैयार करना और युवाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की ट्रेनिंग सुविधाएं मुहैया कराना। मंत्रालय के अनुसार, यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलेगी, जिसमें प्राइवेट कंपनियां फाइनेंस, डिजाइन, बिल्ड, ऑपरेट और ट्रांसफर (DBFOT) करेंगी।
JLN स्टेडियम, जो 1982 एशियन गेम्स के लिए बनाया गया था, ने 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स की मेजबानी की और 2017 U-17 FIFA वर्ल्ड कप के लिए भी इस्तेमाल हुआ। लेकिन 60,000 क्षमता वाले इस वेन्यू की पुरानी संरचना अब IOC, FIFA और वर्ल्ड एथलेटिक्स के स्टैंडर्ड्स पर खरी नहीं उतर रही। “यह रीडेवलपमेंट न केवल स्टेडियम को नया जीवन देगा, बल्कि दिल्ली को ग्लोबल स्पोर्ट्स हब बनाएगा। कतर और ऑस्ट्रेलिया के मॉडल से प्रेरित यह सिटी मल्टी-स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स होगी, जहां ओलंपिक-लेवल ट्रेनिंग संभव हो सकेगी।” परियोजना में वर्ल्ड-क्लास ट्रैक एंड फील्ड, फुटबॉल पिच, इंडोर सेंटर (बास्केटबॉल, बैडमिंटन), शूटिंग अकादमी, स्विमिंग पूल और मिक्स्ड-यूज कमर्शियल स्पेस शामिल होंगे। यह 2026 यूथ ओलंपिक्स, 2030 एशियन गेम्स और 2032/36 ओलंपिक्स की दावेदारी मजबूत करेगी।
रेक्वेस्ट फॉर प्रपोजल (RFP) जारी हो चुका है, जिसमें प्राइवेट पार्टनर को 30-50 साल के लिए ऑपरेशनल कंट्रोल मिलेगा। SAI (स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया) के तहत आने वाला यह प्रोजेक्ट DDA की जमीन पर बनेगा। NITI आयोग के CEO अमिताभ कांत ने इसे “गेम-चेंजर” बताया। लेकिन विपक्ष ने सवाल उठाए – क्या यह 2010 गेम्स की तरह भ्रष्टाचार का शिकार बनेगा? दिल्ली सरकार ने PPP मॉडल पर चिंता जताई, क्योंकि लैंड अथॉरिटी DDA के पास है। एथलीट्स ने भी पुराने स्टेडियम के बंद होने पर नाराजगी जताई – अक्टूबर 2025 में वर्ल्ड पैरा एथलेटिक्स चैंपियनशिप के बाद से यह ट्रेनिंग के लिए बंद है।
यह फैसला भारतीय स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को नई दिशा देगा। 102 एकड़ में फैलने वाली यह सिटी न केवल एथलीट्स को फायदा पहुंचाएगी, बल्कि कमर्शियल डेवलपमेंट से रेवेन्यू भी जेनरेट करेगी। तोड़फोड़ का काम 2026 से शुरू हो सकता है, लेकिन फिलहाल इवेंट्स पर असर नहीं पड़ेगा। दिल्ली के स्पोर्ट्स लवर्स के लिए यह bittersweet मोमेंट है – पुरानी यादें टूटेंगी, लेकिन नया अध्याय शुरू होगा। क्या यह परियोजना समय पर पूरी होगी? आने वाले दिनों में साफ होगा।
