पुणे लैंड स्कैम: ‘जांच जारी, सच्चाई जल्द सामने आएगी’, बेटे पार्थ की कंपनी पर आरोपों पर अजित पवार का पहला बयान
पुणे लैंड स्कैम: ‘जांच जारी, सच्चाई जल्द सामने आएगी’, बेटे पार्थ की कंपनी पर आरोपों पर अजित पवार का पहला बयान
महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने रविवार को पुणे के बारामती में पत्रकारों से बातचीत में अपने बेटे पार्थ पवार की कंपनी से जुड़े विवादित जमीन सौदे पर सफाई दी। उन्होंने कहा, “जांच जारी है, सच्चाई जल्द सामने आएगी।” यह बयान ऐसे समय आया है जब पुणे के मुंधवा इलाके में 1,800 करोड़ रुपये कीमत वाली 40 एकड़ सरकारी जमीन को पार्थ की कंपनी अमेडिया होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड (या अमाडिया एंटरप्राइजेज LLP) को मात्र 300 करोड़ में बेचे जाने के आरोपों ने राज्य की सियासत को गरमा दिया है। अजित पवार ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस सौदे की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और डील पहले ही रद्द हो चुकी है।
मामला पुणे के मुंधवा क्षेत्र का है, जहां ‘महार वतन’ नामक सरकारी जमीन का सौदा विवादों में घिर गया। आरोप है कि 2006 में पैरामाउंट इन्फ्रास्ट्रक्चर नामक कंपनी ने 271 किसानों से पावर ऑफ अटॉर्नी पर हस्ताक्षर करवाए, जिसके बाद यह जमीन पार्थ पवार की कंपनी को हस्तांतरित कर दी गई। बाजार मूल्य 1,800 करोड़ होने के बावजूद सौदा मात्र 300 करोड़ में हुआ, और स्टांप ड्यूटी के रूप में सिर्फ 500 रुपये चुकाए गए। कंपनी ने आईटी पार्क नीति का हवाला देकर पूरी स्टांप ड्यूटी माफी भी हासिल कर ली। इससे राज्य को करीब 6 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। विपक्ष का दावा है कि यह ‘जमीन हड़पने’ का क्लासिक उदाहरण है, जहां सरकारी जमीन निजी कंपनी को सस्ते में ट्रांसफर की गई।
अजित पवार ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद डील रद्द करने की घोषणा की थी। रविवार को उन्होंने कहा, “मेरे बेटे पार्थ और उनके व्यापारिक साझेदारों को इस बात की जानकारी ही नहीं थी कि यह जमीन सरकारी है। जैसे ही विवाद की जानकारी मिली, डील कैंसल कर दी गई।” पवार ने जोर देकर कहा कि सौदे में उनका कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध नहीं है। उन्होंने मुख्यमंत्री से जांच की मांग की, जिसके बाद राजस्व विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव विकास खरगे की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समिति गठित की गई। यह समिति एक महीने में रिपोर्ट सौंपेगी।
सरकार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए हवेली तहसील के तहसीलदार सूर्यकांत येवाले को निलंबित कर दिया। पुणे के रजिस्ट्रेशन इंस्पेक्टर जनरल ने 6 नवंबर को अंतरिम रिपोर्ट सौंपी, जिसमें अनियमितताओं की पुष्टि हुई। दो FIR दर्ज हो चुकी हैं—एक हवेली पुलिस में और दूसरी आर्थिक अपराध शाखा में। FIR में पार्थ पवार का नाम सीधे नहीं लिया गया, लेकिन उनकी कंपनी अमेडिया होल्डिंग्स प्रमुख आरोपी है। किसानों और दलित संगठनों ने सड़कों पर उतरकर पारदर्शी जांच की मांग की।
विपक्ष ने इस मुद्दे को भुनाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने X पर पोस्ट कर कहा, “दलितों की 1,800 करोड़ की जमीन मंत्री के बेटे की कंपनी को 300 करोड़ में दे दी गई—यह जमीन चोरी ही तो है।” महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष नाना पटोले ने कहा, “यह महायुति सरकार का भ्रष्टाचार है। अजित पवार इस्तीफा दें।” राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP-SP) के प्रमुख शरद पवार ने भी चुप्पी तोड़ी, “ऐसे सौदों से जनता का विश्वास डगमगाता है।”
दूसरी ओर, महायुति सरकार ने इसे विपक्ष की ‘राजनीतिक साजिश’ बताया। मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा, “मामला प्रथम दृष्टया गंभीर है, लेकिन डील रद्द हो चुकी है। जांच पूरी होने तक कोई निष्कर्ष न निकालें।” भाजपा प्रवक्ता ने कहा, “कांग्रेस खुद घोटालों की जननी है, अब दूसरों पर उंगली उठा रही।” अजित पवार ने भी विपक्ष पर पलटवार किया, “वे सत्ता से बाहर होने पर हताश हैं। सच्चाई जांच से ही सामने आएगी।”
यह विवाद अजित पवार के लिए राजनीतिक संकट बन गया है। 2019 में NCP से अलग होकर वे महायुति में शामिल हुए थे, लेकिन परिवार से जुड़े विवादों ने उनकी छवि को नुकसान पहुंचाया। पार्थ पवार, जो युवा NCP नेता हैं, पहले भी विवादों में रहे—जैसे 2023 में RSS कार्यालय पर हमले के आरोप। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में अनियमितताएं साबित हुईं, तो यह NCP के लिए बड़ा झटका होगा। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव 2029 से पहले यह मुद्दा गरमाता रहेगा।
अजित पवार ने रविवार को बारामती में कहा, “मैं जनता के प्रति जवाबदेह हूं। जांच पूरी होने पर सब स्पष्ट हो जाएगा।” पुलिस और राजस्व विभाग की जांच तेज हो गई है। क्या यह सौदा सिर्फ गलती था या सुनियोजित साजिश? सच्चाई का इंतजार है।
