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प्रतापगढ़ ड्रग्स नेटवर्क पर UP पुलिस का डाका: 2 करोड़ कैश, स्मैक-गांजा की बंपर बरामदगी, 22 घंटे चली नोट गिनती

प्रतापगढ़ ड्रग्स नेटवर्क पर UP पुलिस का डाका: 2 करोड़ कैश, स्मैक-गांजा की बंपर बरामदगी, 22 घंटे चली नोट गिनती

उत्तर प्रदेश पुलिस ने ड्रग्स तस्करी के खिलाफ अपनी सबसे बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। प्रतापगढ़ जिले के मानिकपुर थाना क्षेत्र के मुंदीपुर गांव में जेल में बंद कुख्यात माफिया राजेश मिश्रा के आवास पर शनिवार सुबह संयुक्त छापेमारी में 2.01 करोड़ रुपये नकद, 6.075 किलोग्राम गांजा और 577 ग्राम स्मैक (हेरोइन) बरामद किया गया। यह बरामदगी ड्रग्स केस में यूपी पुलिस के इतिहास की सबसे बड़ी नकदी जब्ती मानी जा रही है, जिसकी कुल अनुमानित कीमत 3 करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है। छापे में राजेश की पत्नी रीना मिश्रा समेत परिवार के पांच सदस्यों को हिरासत में लिया गया, जबकि नोटों की गिनती में पूरे 22 घंटे लग गए।

कार्रवाई सीओ कुंडा के नेतृत्व में पुलिस और आबकारी विभाग की संयुक्त टीम ने अंजाम दी। सूत्रों के अनुसार, यह छापा राजेश मिश्रा के खिलाफ पहले से चल रही जमानत संबंधी जांच के दौरान पड़ने वाली थी। राजेश मिश्रा, जो जेल में बंद है, पर 14 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें मादक पदार्थों की तस्करी प्रमुख है। उसकी पत्नी रीना मिश्रा पर भी 6 मामले दर्ज हैं। पुलिस के पहुंचने पर रीना ने दरवाजा अंदर से बंद कर लिया, लेकिन टीम ने घेराबंदी कर घर में दाखिल हो गए। तलाशी में अलमारियों, बक्सों और छिपे स्थानों से नकदी के बंडल, गांजा के पैकेट और स्मैक की प्लास्टिक पैकियां बरामद हुईं। बरामद कैश की सटीक राशि 2 करोड़ 1 लाख 55 हजार 345 रुपये है।

नोटों की गिनती का काम इतना लंबा खिंच गया कि पुलिस को मशीनें मंगानी पड़ीं। शनिवार सुबह शुरू हुई प्रक्रिया रविवार शाम तक चली। गिरफ्तार आरोपियों में रीना मिश्रा (40 वर्ष), उनके बेटे विनायक मिश्रा, बेटी कोमल मिश्रा और परिवार के सदस्य यश कुमार शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि यह गिरोह लंबे समय से गांजा और स्मैक की तस्करी में सक्रिय था। अवैध कमाई से राजेश ने करोड़ों की संपत्ति खड़ी कर ली थी, जिसकी पहले ही 3.06 करोड़ रुपये की चल-अचल संपत्ति कुर्क की जा चुकी है। जेल में रहते हुए भी वह नेटवर्क चला रहा था, जो अब ध्वस्त होने की कगार पर है।

एसएसपी डॉ. अनिल कुमार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “यह कार्रवाई ड्रग्स तस्करों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का हिस्सा है। बरामद नशीले पदार्थों से सैकड़ों युवाओं को नशे की लत से बचाया जा सकेगा।” उन्होंने खुलासा किया कि गिरोह का नेटवर्क प्रतापगढ़ से सटे जिलों—जैसे सुल्तानपुर, फैजाबाद और प्रयागराज—तक फैला था। गांजा मुख्य रूप से ओडिशा और छत्तीसगढ़ से मंगाया जाता था, जबकि स्मैक अफगानिस्तान के रूट से आती थी। बरामद दस्तावेजों और मोबाइल डेटा से कई संपर्क नंबर मिले हैं, जिनकी जांच चल रही है। पुलिस ने अब्दुल रहमान, शकील अहमद और अन्य संदिग्धों की तलाश शुरू कर दी है। एसएसपी ने चेतावनी दी कि तस्करी में लिप्त लोगों को बख्शा नहीं जाएगा।

यह घटना उत्तर प्रदेश में ड्रग्स के खिलाफ चल रही मुहिम को नई ताकत देगी। पिछले कुछ महीनों में प्रतापगढ़ में ही कई बड़ी कार्रवाइयां हुई हैं। अगस्त में बेलखरनाथ ब्लॉक प्रमुख सुशील सिंह को 34 ग्राम एमडी (मेथांफेटामाइन) के साथ गिरफ्तार किया गया था, जो हरियाणा और महाराष्ट्र तक फैले नेटवर्क का हिस्सा था। अक्टूबर में पट्टी सर्किल में 501 ग्राम एमडी बरामद हुई, जिसकी कीमत 5 करोड़ रुपये थी। और हाल ही में 2 करोड़ की एमडी जब्ती के साथ ब्लॉक प्रमुख के कनेक्शन की जांच तेज हुई। एसएसपी ने कहा कि ये सभी मामले आपस में जुड़े हो सकते हैं, और NIA की मदद ली जा रही है।

स्थानीय लोगों में कार्रवाई का स्वागत हो रहा है। मुंदीपुर गांव के एक निवासी ने कहा, “ड्रग्स ने हमारे युवाओं को बर्बाद कर दिया था। पुलिस का यह कदम सराहनीय है।” मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ड्रग्स के खिलाफ सख्ती के निर्देश दिए हैं, और इस बरामदगी को राज्य स्तर पर उपलब्धि माना जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ की जा रही है, जिसमें और खुलासे होने की उम्मीद है। यदि नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हुआ, तो यह क्षेत्र में नशे की कमर तोड़ देगा।

पुलिस ने अपील की है कि नागरिक संदिग्ध गतिविधियों की सूचना दें। यह कार्रवाई न केवल ड्रग्स माफिया को झकझोर रही है, बल्कि युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश भी दे रही है। जांच जारी है, और जल्द ही बड़े नाम उजागर हो सकते हैं।

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