दिल्ली के रिठाला में भीषण आग: 500 झुग्गियां जलकर राख, एक की मौत, सिलेंडर विस्फोट से हाहाकार
दिल्ली के रिठाला में भीषण आग: 500 झुग्गियां जलकर राख, एक की मौत, सिलेंडर विस्फोट से हाहाकार
राजधानी दिल्ली के रोहिणी इलाके में स्थित रिठाला मेट्रो स्टेशन के पास शुक्रवार रात को लगी आग ने भयावह रूप धारण कर लिया। दिल्ली फायर सर्विसेज (DFS) के अनुसार, लगभग 500 झुग्गियां जलकर खाक हो गईं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई और एक अन्य को गंभीर जलनें आईं। आग की शुरुआत देर रात करीब 11 बजे हुई, जब बंगाली बस्ती में कई एलपीजी सिलेंडर फट गए, जिससे लपटें तेजी से फैल गईं। फायर ब्रिगेड की 20 से अधिक गाड़ियों ने छह घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया, लेकिन तब तक सैकड़ों परिवार बेघर हो चुके थे। यह घटना दिल्ली की झुग्गी-झोपड़ी बस्तियों की असुरक्षा को फिर से उजागर कर रही है।
घटना रिठाला मेट्रो स्टेशन और दिल्ली जल बोर्ड के स्टाफ क्वार्टर के बीच की बंगाली बस्ती में घटी, जहां ज्यादातर प्रवासी मजदूर रहते हैं। पुलिस के अनुसार, आग एक झुग्गी से शुरू हुई, लेकिन सिलेंडरों के विस्फोट ने इसे महाभयंकर बना दिया। आसमान में काला धुआं छा गया, और चीख-पुकार मच गई। एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया, “रात के अंधेरे में लपटें इतनी तेज थीं कि लोग भागते-भागते अपने सामान तक नहीं बचा पाए। सिलेंडर फटने की आवाज बम के धमाके जैसी थी।” मृतक की पहचान अभी नहीं हो सकी है, जबकि घायल को सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। DFS के डायरेक्टर अतुल गर्ग ने कहा, “आग के कारणों की जांच जारी है, लेकिन प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट या गैस लीक संदिग्ध है।”
सुबह होते ही मंजर देखकर लोग सन्न रह गए। जली हुई झुग्गियों के ढेर, बिखरे सामान और धुएं की गंध ने इलाके को युद्धभूमि जैसा बना दिया। X (पूर्व ट्विटर) पर वायरल वीडियो में लपटों को बुझाते फायरमैन, भागते लोग और जली हुई बस्ती के दृश्य दिख रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “रिठाला में तबाही… सरकार सो रही है क्या?” मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने ट्वीट कर कहा, “प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत दी जा रही है। भोजन, पानी और अस्थायी आश्रय की व्यवस्था हो गई है। रिठाला कम्युनिटी सेंटर को स्थायी राहत केंद्र बनाया गया।” दिल्ली सरकार ने प्रभावितों को 50,000 रुपये मुआवजा, राशन और नए आवास का वादा किया है। स्थानीय विधायक ने भी मुआवजे की मांग उठाई।
यह घटना दिल्ली की झुग्गी समस्या को रेखांकित करती है। 2016 में भी रिठाला में 700 झुग्गियां जल चुकी थीं, लेकिन सुधार नहीं हुआ। विशेषज्ञों का कहना है कि ओवरक्राउडिंग, खुले तारों और गैस सिलेंडरों की वजह से ऐसी बस्तियां फायर ट्रैप बन जाती हैं। एनजीओ ‘हाउसिंग फॉर द पुअर’ ने कहा, “सरकार को तत्काल पुनर्वास योजना लागू करनी चाहिए।” फिलहाल, रिलीफ कैंप में सैकड़ों लोग ठहर रहे हैं, और ठंड बढ़ने से उनकी मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह हादसा राजधानी की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है – कब तक ऐसी त्रासदी दोहराई जाती रहेगी?
