इंदिरा गांधी की वोट बैंक राजनीति ने पाक को परमाणु शक्ति बनाया: BJP सांसद निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर तीखा हमला
इंदिरा गांधी की वोट बैंक राजनीति ने पाक को परमाणु शक्ति बनाया: BJP सांसद निशिकांत दुबे का कांग्रेस पर तीखा हमला
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि उनकी ‘वोट बैंक’ राजनीति के कारण पाकिस्तान परमाणु बम बना सका। कटिहार में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दुबे ने दावा किया कि 1982 में इजरायल के साथ मिलकर पाक के काहुटा न्यूक्लियर प्लांट पर हमला करने का मौका था, लेकिन इंदिरा ने इसे ठुकरा दिया। पूर्व CIA अधिकारी रिचर्ड बार्लो के हालिया बयान का हवाला देते हुए दुबे ने कहा, “कांग्रेस ने राष्ट्रीय सुरक्षा को वोट बैंक के लिए दांव पर लगाया। अगर पाक न्यूक्लियर पावर न बनता, तो आज दक्षिण एशिया का नक्शा कुछ और होता।”
दुबे ने ANI को दिए बयान में विस्तार से बताया, “पाकिस्तान ने 1980 में परमाणु बम बनाने की शुरुआत की। जब यह खुफिया जानकारी सामने आई, तो इजरायल भारत के साथ मिलकर हमला करना चाहता था। लेकिन 1982 में इंदिरा गांधी ने सेना को रोक दिया। यह फैसला राजनीतिक था – मुस्लिम वोट बैंक को नाराज न करने का डर।” उन्होंने बार्लो की किताब ‘The Loose Nuke’ का जिक्र किया, जिसमें दावा है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी ने भारत को हरी झंडी दी थी, लेकिन इंदिरा ने मना कर दिया। दुबे ने जोड़ा, “अगर हमला होता, तो पाक को नेस्तनाबूद कर दिया जाता और उसे टुकड़ों में बांट दिया जाता। आज भारत उसी की कीमत चुका रहा है।”
यह बयान बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच आया है, जहां NDA (भाजपा-जदयू) कांग्रेस पर हमलावर रुख अपना रहा है। दुबे ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए कहा, “राहुल जी आज पाक पर चुप हैं, लेकिन उनकी दादी ने ही यह गलती की। कांग्रेस हमेशा पाकिस्तान के साथ खड़ी रही।” उन्होंने 1968 के रण ऑफ कच्छ समझौते का भी जिक्र किया, जहां इंदिरा ने युद्ध जीतने के बावजूद 828 वर्ग किमी जमीन पाक को सौंप दी।
कांग्रेस ने दुबे के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। पार्टी प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने कहा, “यह भाजपा का झूठा प्रचार है। इंदिरा जी ने 1971 में पाक को धूल चटा दी, लेकिन मोदी जी पाक के आगे घुटने टेकते हैं। राष्ट्रीय हितों पर राजनीति न करें।” भाजपा समर्थक इसे ‘सच्चाई का खुलासा’ बता रहे हैं, जबकि कांग्रेस कार्यकर्ता ‘इतिहास का अपमान’ कह रहे हैं। एक यूजर ने लिखा, “दुबे जी ने कांग्रेस की पोल खोल दी। वोट बैंक के चक्कर में देश बेचा।”
विशेषज्ञों का मत विभाजित है। पूर्व राजनयिक एमके भद्रकुमार ने कहा, “1980 के दशक में पाक का प्रोग्राम गुप्त था, लेकिन हमला वैश्विक युद्ध छेड़ सकता था। दुबे का दावा अतिशयोक्ति है।” वहीं, रक्षा विश्लेषक प्रवीण दाहिया ने स्वीकार किया, “कांग्रेस की नीतियां कभी-कभी सतर्क थीं, लेकिन आज के संदर्भ में यह बहस प्रासंगिक है।” दुबे ने अंत में कहा, “मोदी जी की साहसी नीति ही पाक को काबू में रखेगी। NDA को वोट देकर बिहार विकास के पथ पर चले।”
यह विवाद कांग्रेस की ‘राष्ट्रीय सुरक्षा’ वाली छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। बिहार चुनाव में युवा और अल्पसंख्यक वोटरों पर इसका असर पड़ेगा। फिलहाल, भाजपा इस मुद्दे को भुनाने की कोशिश में लगी है, जबकि कांग्रेस डैमेज कंट्रोल मोड में है। क्या इतिहास दोहराया जा रहा है, या यह महज चुनावी ड्रामा? समय बताएगा।
