देहरादून में पत्रकार पर हाथापाई का विवाद: डीएलएड प्रदर्शन कवरेज के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल पर आरोप, वीडियो वायरल—पत्रकार संगठनों में आक्रोश
देहरादून में पत्रकार पर हाथापाई का विवाद: डीएलएड प्रदर्शन कवरेज के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय नौडियाल पर आरोप, वीडियो वायरल—पत्रकार संगठनों में आक्रोश
उत्तराखंड की राजधानी देहरादून से एक सनसनीखेज घटना सामने आई है, जहां डीएलएड प्रशिक्षुओं के प्रदर्शन को कवर करने के दौरान प्राथमिक शिक्षा निदेशक अजय कुमार नौडियाल पर एक महिला पत्रकार के साथ मारपीट करने का गंभीर आरोप लगा है। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है, जिसमें नौडियाल को पत्रकार सीमा रावत का फोन छीनते और धक्का-मुक्की करते हुए देखा जा सकता है। पत्रकार संगठनों में भारी आक्रोश फैल गया है, और उन्होंने तत्काल कार्रवाई की मांग की है। यह विवाद राज्य के शिक्षा विभाग में भर्ती प्रक्रिया से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे आंदोलन का हिस्सा है, जहां डीएलएड प्रशिक्षु अपनी नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
घटना गुरुवार, 6 नवंबर को प्राथमिक शिक्षा निदेशालय के कार्यालय परिसर में हुई। डीएलएड कोर्स पूरा करने वाले करीब 250-300 प्रशिक्षुओं और उनके अभिभावकों ने बिना पूर्व सूचना के निदेशालय पहुंचकर नौकरी की मांग को लेकर हंगामा किया। नौडियाल ने एक पत्र में बताया कि प्रदर्शनकारियों ने परिसर में घुसकर माहौल खराब किया, जिसके बाद 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बातचीत के लिए बुलाया गया। लेकिन इसी दौरान स्थानीय न्यूज पोर्टल की संचालक और पत्रकार सीमा रावत घटना को कवर करने पहुंचीं। सीमा ने बताया कि जब वे वीडियो रिकॉर्डिंग कर रही थीं, तो नौडियाल ने गुस्से में उनका फोन छीन लिया, जमीन पर पटकने की कोशिश की और हाथापाई की। वीडियो में साफ दिख रहा है कि नौडियाल सीमा की बास्केट पकड़ते हुए खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि सीमा चिल्ला रही हैं, “हम प्रेस हैं, छोड़ो!”
सीमा रावत ने एक बयान में कहा, “डीएलएड अभ्यर्थियों के माता-पिता बच्चों की नियुक्ति के लिए निदेशक से मिलने आए थे। विवाद होने पर मैंने रिकॉर्डिंग शुरू की, तो नौडियाल ने फोन छीन लिया और मारपीट की। यह पत्रकारिता पर हमला है।” वायरल वीडियो 57 सेकंड का है, जिसमें नौडियाल का गुस्सा साफ झलक रहा है। पत्रकार संगठन उत्तराखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन ने इसे “मीडिया पर दमन” बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से हस्तक्षेप की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने कहा, “सरकारी अधिकारी का यह व्यवहार अस्वीकार्य है। हम प्रदर्शन करेंगे।”
नौडियाल ने सफाई देते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों ने कार्यालय में अव्यवस्था मचाई, और वीडियोग्राफी के दौरान स्थिति बिगड़ी। उन्होंने पत्र में महानिदेशक को शिकायत की कि प्रदर्शनकारी “शिक्षक भर्ती रोकने का दबाव” बना रहे थे। डीएलएड विवाद लंबा खिंचा हुआ है—प्रशिक्षु 2023 से नियुक्ति की मांग कर रहे हैं, लेकिन कोर्ट केस और वैकेंसी की कमी से प्रक्रिया अटकी हुई है। हाल ही में शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने 1649 पदों पर भर्ती शुरू करने का ऐलान किया था, लेकिन प्रदर्शनकारी 2100 पदों की मांग पर अड़े हैं।
यह घटना राज्य में पत्रकारिता की स्वतंत्रता और शिक्षा भर्ती पर सवाल खड़े कर रही है। पुलिस ने अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया, लेकिन पत्रकारों ने एसएसपी देहरादून से शिकायत दर्ज कराई है। विपक्षी कांग्रेस ने इसे “शिक्षा व्यवस्था का काला अध्याय” बताया, जबकि भाजपा ने नौडियाल के बचाव में कहा कि “प्रदर्शन की आड़ में अराजकता नहीं बर्दाश्त होगी।” विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला कोर्ट पहुंच सकता है, और इससे भर्ती प्रक्रिया पर दबाव बढ़ेगा। फिलहाल, नौडियाल ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन विभाग ने जांच का ऐलान किया है।
