उत्तराखंड की रजत जयंती: शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि, कांग्रेस ने लिया विकास का संकल्प—25 सालों के अधूरे वादों पर सवाल
उत्तराखंड की रजत जयंती: शहीद स्थल पर श्रद्धांजलि, कांग्रेस ने लिया विकास का संकल्प—25 सालों के अधूरे वादों पर सवाल
उत्तराखंड राज्य की स्थापना की 25वीं वर्षगांठ के अवसर पर एक ओर जहां राज्य सरकार ने भव्य कार्यक्रमों का आयोजन किया है, वहीं विपक्षी कांग्रेस ने अपनी अलग राह पकड़ ली है। पार्टी ने 1 नवंबर से 14 नवंबर तक ‘रजत जयंती अभियान’ के तहत विभिन्न गतिविधियां शुरू की हैं, जो राज्य आंदोलन के शहीदों को समर्पित हैं। इसी श्रृंखला में गुरुवार को प्रदेश कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और राज्य आंदोलनकारियों ने उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के रामपुर तिराहा शहीद स्थल पर पहुंचकर शहीदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान शहीदों के सपनों के अनुरूप ‘विकासशील उत्तराखंड’ के निर्माण का संकल्प लिया गया, लेकिन 25 सालों के अधूरे वादों पर भी सवाल खड़े किए गए।
देहरादून से रवाना हुए कांग्रेस कार्यकर्ताओं का जत्था सुबह ही रामपुर तिराहा पहुंचा, जहां 1994 के उत्तराखंड राज्य आंदोलन के दौरान हुए पुलिस फायरिंग में शहीद हुए 7 युवाओं की स्मृति में बना स्मारक स्थित है। नेताओं ने शहीद स्मारक पर माल्यार्पण कर पुष्प अर्पित किए और दो मिनट का मौन रखा। कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा, राज्य आंदोलनकारी विपिन त्रिपाठी और अन्य ने भाग लिया। रावत ने कहा, “रामपुर तिराहा का बलिदान राज्य निर्माण का प्रतीक है। शहीदों ने विकास, रोजगार और पहाड़ी संस्कृति की रक्षा के लिए जान दी, लेकिन आज भी पलायन, बेरोजगारी और पर्यावरण विनाश के सवाल अनुत्तरित हैं। हम शहीदों के सपनों को साकार करने का संकल्प लेते हैं।”
कांग्रेस का यह अभियान राज्य आंदोलन की याद ताजा करने और वर्तमान सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने का माध्यम बनेगा। पार्टी ने घोषणा की है कि 9 नवंबर को देहरादून में ‘शहीद सम्मान यात्रा’ निकाली जाएगी, जबकि 14 नवंबर को राज्यव्यापी सभा होगी। नेताओं ने आरोप लगाया कि 25 सालों में सरकारें सत्ता की राजनीति में उलझी रहीं, जबकि शहीदों के मूल उद्देश्य—जैसे स्थानीय रोजगार, जल संरक्षण और पहाड़ी उद्योग—अधूरे पड़े हैं। माहरा ने कहा, “आज उत्तराखंड में 40% युवा बेरोजगार हैं, और पलायन दर 20% से ऊपर है। शहीदों का सपना था आत्मनिर्भरता, न कि दिल्ली-मुंबई की ओर पलायन।” आंदोलनकारी त्रिपाठी ने भावुक होकर बताया कि रामपुर तिराहा पर 1994 में हुई गोलीबारी ने आंदोलन को नई दिशा दी, लेकिन आज भी न्याय की मांग अधर में लटकी है।
उत्तराखंड सरकार ने इस बीच रजत जयंती पर ‘विकसित उत्तराखंड अभियान’ के तहत 25 दिवसीय कार्यक्रम शुरू किए हैं, जिसमें सांस्कृतिक उत्सव, विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और युवा सम्मेलन शामिल हैं। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि राज्य ने 25 सालों में जीडीपी में 10 गुना वृद्धि की है, और अब ‘आत्मनिर्भर उत्तराखंड’ का लक्ष्य है। लेकिन कांग्रेस ने इसे ‘प्रचार का धोखा’ बताते हुए कहा कि ग्रामीण इलाकों में बुनियादी सुविधाएं अभी भी अपर्याप्त हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह अभियान आगामी लोकसभा चुनावों के लिए दोनों पक्षों की रणनीति को मजबूत करेगा।
रामपुर तिराहा कार्यक्रम में सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए, जिन्होंने शहीदों के चित्रों पर साफा बांधा और राज्य गान गाया। यह स्थल उत्तराखंड आंदोलन का प्रतीक बना हुआ है, जहां हर साल श्रद्धांजलि सभा होती है। कांग्रेस का संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा गया कि पार्टी शहीदों के नाम पर 25 अधूरे मुद्दों—जैसे मनरेगा मजदूरी बढ़ाना, पर्यटन नीति सुधार और जलवायु परिवर्तन से निपटना—पर जोर देगी। विपक्ष का यह कदम राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ सकता है, जहां शहीदों की विरासत विकास के आईने में तौल रही है।
