महाराष्ट्र में ‘जमीन चोरी’ का आरोप: राहुल गांधी ने अजित पवार पर साधा निशाना, बोले—दलितों की ₹1800 करोड़ की ज़मीन बेटे की कंपनी को ₹300 करोड़ में बेच दी
महाराष्ट्र में ‘जमीन चोरी’ का आरोप: राहुल गांधी ने अजित पवार पर साधा निशाना, बोले—दलितों की ₹1800 करोड़ की ज़मीन बेटे की कंपनी को ₹300 करोड़ में बेच दी
महाराष्ट्र की सियासत में भूचाल आ गया है, जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने उपमुख्यमंत्री अजित पवार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने एक कथित जमीन घोटाले का हवाला देते हुए कहा कि पुणे के मुंधवा इलाके में दलितों के लिए आरक्षित सरकारी ज़मीन, जिसकी कीमत ₹1800 करोड़ थी, सिर्फ ₹300 करोड़ में पवार के बेटे पार्थ पवार की कंपनी को बेच दी गई। राहुल ने इसे ‘जमीन चोरी’ करार देते हुए सोशल मीडिया पर तंज कसा, “एक तो लूट और ऊपर से कानूनी मुहर में भी छूट! क्या इसलिए क्योंकि खरीदार महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजित पवार का बेटा है?” उन्होंने पीएम मोदी से सवाल किया, “मोदी जी, आपकी चुप्पी क्या कह रही है? क्या आप उन लुटेरों का साथ दे रहे हैं जो दलितों और गरीबों के अधिकार हड़प रहे हैं?”
यह आरोप पुणे के इंस्पेक्टर जनरल ऑफ रजिस्ट्रेशन (IGR) की अंतरिम रिपोर्ट पर आधारित है, जिसमें 43 एकड़ (17.5 हेक्टेयर) की सरकारी ज़मीन को अमेडिया एंटरप्राइजेज एलएलपी को ₹300 करोड़ में बेचे जाने की अनियमितताओं का खुलासा हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, ज़मीन ‘महार वतन’ के तहत दलितों के लिए आरक्षित थी, लेकिन बिना उचित मंजूरी के बेची गई। स्टांप ड्यूटी सिर्फ ₹500 ही चुकाई गई, जबकि वास्तविक ड्यूटी ₹5.99 करोड़ होनी चाहिए थी। इससे राज्य को ₹6 करोड़ का नुकसान हुआ। कंपनी में पार्थ पवार पार्टनर हैं, और डील 27 दिनों में पूरी हो गई। विपक्ष का कहना है कि मार्केट वैल्यू ₹1600-₹2000 करोड़ थी, जो आईटी पार्क और डेटा सेंटर के लिए इस्तेमाल होने वाली थी।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इसे ‘गंभीर’ बताते हुए हाई-लेवल जांच के आदेश दिए हैं। दो अधिकारी—तहसीलदार और सब-रजिस्ट्रार—को सस्पेंड कर दिया गया, और बोवधान पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज हुई। अजित पवार ने सफाई दी, “मैं इससे सीधे जुड़ा नहीं हूं। दो-तीन महीने पहले मुझे पता चला, तो मैंने निर्देश दिए कि कोई गैरकानूनी काम न हो।” पार्थ पवार ने अभी कोई टिप्पणी नहीं की। एनसीपी प्रमुख ने कहा, “बच्चे बड़े होकर अपना बिजनेस करते हैं, लेकिन गलत नहीं।”
राहुल का यह हमला महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों से ठीक पहले आया है, जहां वे ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बाद ‘जमीन चोरी’ की कड़ी जोड़ रहे हैं। कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने न्यायिक जांच की मांग की, जबकि शिवसेना (यूबीटी) के अम्बादास दानवे ने कहा, “केवल ₹1 लाख कैपिटल वाली कंपनी ₹1800 करोड़ की ज़मीन कैसे खरीदेगी?” विपक्ष का आरोप है कि यह डील सरकारी संपत्ति की लूट का उदाहरण है, जहां अमीरों को छूट मिलती है लेकिन आम आदमी को लाखों का स्टांप ड्यूटी चुकाना पड़ता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला महा विकास अघाड़ी (एमवीए) को मजबूत कर सकता है, क्योंकि यह भ्रष्टाचार के पुराने आरोपों को ताजा कर रहा है। सरकार ने रिकवरी नोटिस जारी किया है, और क्रिमिनल कंप्लेंट की तैयारी चल रही है। फिलहाल, पार्थ का नाम FIR में नहीं है, लेकिन जांच में सबूत मिलने पर एक्शन हो सकता है। राहुल ने ट्वीट में जोड़ा, “जब आम आदमी फ्लैट खरीदता है, तो लाखों स्टांप ड्यूटी देता है, लेकिन अल्ट्रा-रिच को करोड़ों की छूट?” यह बवाल महाराष्ट्र की सियासत को नई आंच दे रहा है, जहां चुनावी मैदान में भ्रष्टाचार बड़ा मुद्दा बन सकता है।
