राष्ट्रीय

अनंत सिंह जेल में, FSL मौके पर और CID जांच में… दुलारचंद यादव हत्याकांड: अब तक की पूरी टाइमलाइन

बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के बीच मोकामा सीट पर सियासी रंजिश का खूनी रूप देखने को मिला, जब जन सुराज पार्टी के समर्थक दुलारचंद यादव (76) की हत्या हो गई। यह घटना 30 अक्टूबर को घोसवारी और भदौर थाना क्षेत्र में हुई, जब जन सुराज उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के प्रचार काफिले पर हमला हुआ। दुलारचंद यादव, जो एक पूर्व गैंगस्टर से राजनेता बने थे और स्थानीय स्तर पर प्रभावशाली थे, इस झड़प में मारे गए। अब तक की जांच में बाहुबली नेता और जेडीयू उम्मीदवार अनंत सिंह मुख्य आरोपी बन चुके हैं, जिन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। पुलिस ने 80 से ज्यादा गिरफ्तारियां की हैं, लेकिन पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट ने केस में नया मोड़ ला दिया है। आइए जानते हैं अब तक के प्रमुख घटनाक्रम।

घटना का बैकग्राउंड: सियासी टकराव से हिंसा

30 अक्टूबर, दोपहर: मोकामा के तारतर गांव के पास प्रचार के दौरान जन सुराज समर्थकों और जेडीयू समर्थकों के बीच बहस हुई। बात धक्का-मुक्की, पथराव और फिर गोलीबारी में बदल गई। दुलारचंद यादव, जो काफिले में थे, इस हिंसा में फंस गए। वायरल वीडियो में वे खुद पत्थर चलाते दिखे, लेकिन झड़प के दौरान उनकी मौत हो गई। अनंत सिंह का काफिला भी मौके पर था, और पुलिस का दावा है कि यह ‘सोची-समझी साजिश’ थी।

दुलारचंद का पुराना विवाद: हत्या से दो दिन पहले दुलारचंद ने अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी पर विवादित टिप्पणी की थी, जो पुरानी रंजिश को हवा दे सकती है। वे पहले RJD और JD(U) से जुड़े रहे, लेकिन अब जन सुराज के साथ थे।

पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट: गोली नहीं, ब्लंट ऑब्जेक्ट से चोट

31 अक्टूबर: पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से सनसनीखेज खुलासा – दुलारचंद की मौत गोली लगने से नहीं, बल्कि फेफड़े फटने और कार्डियोरेस्पिरेटरी फेलियर से हुई। रिपोर्ट कहती है कि हार्ड एंड ब्लंट सबस्टेंस (जैसे पत्थर या लाठी) से हृदय और फेफड़ों को चोट लगी, जो शॉक का कारण बनी। तीन डॉक्टरों की टीम ने यह पुष्टि की। इससे केस मर्डर का ही बने रहने की उम्मीद है, लेकिन गोलीबारी का नैरेटिव कमजोर पड़ा।

पुलिस एक्शन: FIR, गिरफ्तारियां और अनंत सिंह जेल में

31 अक्टूबर: पुलिस ने तीन FIR दर्ज कीं – एक दुलारचंद के पोते की शिकायत पर, जिसमें अनंत सिंह समेत 5 नामजद। अन्य FIR झड़प और हिंसा से जुड़ीं।

1 नवंबर: अनंत सिंह (58), मणिकांत ठाकुर और रंजीत राम को गिरफ्तार किया गया। अनंत को बाढ़ के कारगिल मार्केट से पकड़ा गया, जहां 150 पुलिसकर्मी तैनात थे। वे सरेंडर करने वाले थे, लेकिन पुलिस ने पहले एक्शन ले लिया। अनंत सिंह ने कहा, “मैं मोकामा के लोगों पर भरोसा रखता हूं।”

2 नवंबर: पटना सिविल कोर्ट ने अनंत सिंह को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वे बेऊर जेल में हैं। कुल 80 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, और बाकी आरोपियों की तलाश जारी।

अन्य गिरफ्तारियां: अनंत के चार ‘चेलों’ पर अभी भी खतरा बताया जा रहा है। दुलारचंद के पोते नीरज ने कहा, “अनंत गिरफ्तार हो गया, लेकिन बाकी आजाद हैं। मुझे खतरा है।”

जांच का मोड़: CID और FSL की एंट्री

1 नवंबर: बिहार पुलिस की CID ने केस संभाल लिया। वे वीडियो फुटेज, वायरल क्लिप्स और गवाहों से पूछताछ कर रही है।

2 नवंबर: फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) टीम मौके पर पहुंची। वे ब्लंट ऑब्जेक्ट्स, ब्लड सैंपल्स और बैलिस्टिक एविडेंस कलेक्ट कर रही है। डीआईयू (डिस्ट्रिक्ट इंटेलिजेंस यूनिट) ने अनंत सिंह की मेडिकल जांच की। SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, “यह मर्डर का केस है, और हम साजिश की परतें खोलेंगे।”

प्रशासनिक कार्रवाई: चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन

1 नवंबर: चुनाव आयोग ने मर्डर केस में सख्ती दिखाई – पटना ग्रामीण SP विक्रम सिहाग समेत 4 अधिकारियों का ट्रांसफर। बाढ़ SDPO को सस्पेंड कर दिया। घोसवारी और भदौर के दो SHO (मधुसूदन कुमार और रवि रंजन) सस्पेंड।

सुरक्षा बढ़ाई: मोकामा में पुलिस तैनाती दोगुनी, इलाके में कर्फ्यू जैसी स्थिति।

राजनीतिक प्रतिक्रियाएं: जंगल राज के आरोप

RJD नेता तेजस्वी यादव: “महा जंगल राज… पहले ही करना चाहिए था।”

जन सुराज के पीयूष प्रियदर्शी: “अनंत की गिरफ्तारी से राहत, लेकिन जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।”

अनंत सिंह के समर्थक: गिरफ्तारी को राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।

आगे क्या? 6 नवंबर को मोकामा में वोटिंग

केस की जांच तेज है, और FSL रिपोर्ट से नया खुलासा हो सकता है। दुलारचंद के परिवार ने सभी आरोपियों को फांसी की सजा की मांग की है। बिहार चुनाव के पहले चरण में मोकामा पर नजरें टिकी हैं – यह घटना वोटिंग को प्रभावित कर सकती है। पुलिस का दावा है कि सभी आरोपी जल्द पकड़े जाएंगे।

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