Tuesday, June 30, 2026
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US से जापान-कोरिया तक लाल निशान, एशियाई बाजारों में धड़ाम: भारतीय शेयर बाजार भी सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी 0.2-0.3% लुढ़के

US से जापान-कोरिया तक लाल निशान, एशियाई बाजारों में धड़ाम: भारतीय शेयर बाजार भी सुस्त, सेंसेक्स-निफ्टी 0.2-0.3% लुढ़के

वैश्विक बाजारों में जारी उतार-चढ़ाव का असर एशिया पर भी पड़ गया है। अमेरिकी बाजारों की कमजोरी और ट्रेड वॉर की आशंकाओं के बीच जापान का निक्केई, दक्षिण कोरिया का कोस्पी और अन्य एशियाई इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। भारतीय बाजार भी इस सुस्ती से अछूते नहीं रहे – सेंसेक्स 171 पॉइंट्स (0.20%) गिरकर 83,806 पर और निफ्टी 68 पॉइंट्स (0.27%) टूटकर 25,694 पर खुला। एक्सपर्ट्स का मानना है कि US के नए टैरिफ प्रस्ताव और चाइना-US ट्रेड टेंशन से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं दबाव में हैं, जो भारतीय निर्यात पर भी असर डाल सकता है।

ट्रेडर्स का कहना है कि सुबह के सत्र में बाजार निचले स्तर पर खुला, लेकिन दोपहर तक कुछ रिकवरी के संकेत मिले। हालांकि, टेक और ऑटो सेक्टर में बिकवाली का दबाव बना रहा। गिफ्ट निफ्टी फ्यूचर्स भी 0.12% नीचे खुले थे, जो बाजार की कमजोर शुरुआत की ओर इशारा कर रहे थे।

एशियाई बाजारों में भारी गिरावट: निक्केई-कोस्पी सबसे ज्यादा प्रभावित

एशिया-पैसिफिक मार्केट्स में मंदी का साया गहरा गया। जापान का बेंचमार्क निक्केई 225 इंडेक्स 0.1% गिरकर बंद हुआ, जबकि ब्रॉडर टोपिक्स भी दबाव में रहा। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 1.59% से 1.97% तक लुढ़का, खासकर टेक स्टॉक्स जैसे सैमसंग और SK हाइनिक्स पर बिकवाली का कहर टूटा। हॉन्गकॉन्ग का हैंग सेंग 0.28% ऊपर खुला लेकिन बाद में 0.07% नीचे बंद हुआ। चाइना का शंघाई कंपोजिट 0.19-0.21% और शेन्जेन 1.2-1.29% नीचे रहा। ऑस्ट्रेलिया का ASX 200 0.85% टूटा।

यह गिरावट US प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप के हालिया टैरिफ ऐलान से जुड़ी है, जिसमें चाइना पर 245% तक, जापान पर 24%, कोरिया पर 25-26% और भारत पर 26% टैरिफ का प्रस्ताव है। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि यह ट्रेड वॉर का नया दौर है, जो एशिया के एक्सपोर्ट-डिपेंडेंट इकोनॉमीज को झकझोर रहा है।

भारतीय बाजार पर वैश्विक दबाव: सुस्त ओपनिंग, लेकिन रिकवरी की उम्मीद

भारतीय इंडेक्सेज ने एशियाई ट्रेंड को फॉलो किया। BSE सेंसेक्स 83,806 पर खुला, जो 171.6 पॉइंट्स की गिरावट दर्शाता है। NSE निफ्टी 25,694.60 पर ट्रेड कर रहा, 68.75 पॉइंट्स नीचे। सेक्टर वाइज, टाइटन, सिप्ला और RIL जैसे स्टॉक्स में हल्की बढ़त दिखी, लेकिन हीरो मोटोकॉर्प 4.35% गिरकर 5,298 पर बंद हुआ – कंपनी की अक्टूबर सेल्स 6.4% YoY घटकर 6.35 लाख यूनिट्स रह गईं।

मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 0.2-0.3% नीचे खुले। FIIs ने कल 2,500 करोड़ की बिकवाली की, जबकि DIIs ने 1,800 करोड़ की खरीदारी। एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि अगर US मार्केट्स आज रात रिकवर करते हैं, तो कल भारतीय बाजार में हल्की तेजी आ सकती है। लेकिन ट्रेड वॉर की अनिश्चितता से वोलेटिलिटी बनी रहेगी।

वैश्विक संकेत: US फ्यूचर्स नीचे, बॉन्ड यील्ड्स ऊपर

US मार्केट्स की क्लोजिंग कमजोर रही, जिसका असर एशिया पर पड़ा। डॉव जोन्स, S&P 500 और नैस्डैक सभी 1-2% नीचे बंद हुए। US 10-ईयर बॉन्ड यील्ड 4.5% पर पहुंच गया, जो रिसेशन फीयर्स को बढ़ा रहा है। करेंसी में, जापानी येन मजबूत हुआ (1 USD = 143.64 येन), जबकि इंडियन रुपया 85.82 पर 0.32% नीचे। ऑस्ट्रेलियन डॉलर 0.48% गिरा।

एक्सपर्ट्स की राय: सतर्क रहें, लेकिन पैनिक न करें

मार्केट एनालिस्ट्स का कहना है कि यह गिरावट शॉर्ट-टर्म है, लेकिन लॉन्ग-टर्म इनवेस्टर्स को मौके मिल सकते हैं। T. Rowe Price के क्रिस कुश्लिस ने कहा, “एशियाई एक्सपोर्ट्स पर टैरिफ का असर Q2 2025 से दिखेगा, लेकिन भारत जैसे मार्केट्स रेजिलिएंट रहेंगे।” ट्रेडर्स को सलाह है कि टेक और एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड स्टॉक्स से दूर रहें, जबकि डिफेंसिव सेक्टर्स जैसे FMCG पर फोकस करें।

आज 110 से ज्यादा कंपनियां Q2 रिजल्ट्स जारी करेंगी, जो बाजार को दिशा दे सकती हैं। फिलहाल, वैश्विक अनिश्चितता के बीच भारतीय बाजार सतर्क मोड में है – निवेशक इंतजार करें, जल्दबाजी न करें।

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