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दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग: चांदनी चौक सांसद का अमित शाह को लेटर—7 बार बदला नाम, अब महाभारत काल में लौटेगी राजधानी?

दिल्ली का नाम बदलकर ‘इंद्रप्रस्थ’ करने की मांग: चांदनी चौक सांसद का अमित शाह को लेटर—7 बार बदला नाम, अब महाभारत काल में लौटेगी राजधानी?

भारत की राजधानी दिल्ली ने सदियों में 7 साम्राज्यों, 7 नामों और 7 कहानियों को जिया है। कभी पांडवों की इंद्रप्रस्थ, कभी मुगलों की शाहजहांनाबाद, कभी ब्रिटिशों की नई दिल्ली—यह शहर हर बार नए नाम के साथ नया जन्म लेता रहा है। अब एक बार फिर इतिहास के पन्ने पलटने की तैयारी है! चांदनी चौक से भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को चिट्ठी लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने का प्रस्ताव दिया है। साथ ही पुरानी दिल्ली स्टेशन को इंद्रप्रस्थ जंक्शन और IGI एयरपोर्ट को इंद्रप्रस्थ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा करने की मांग की है।

“दिल्ली का असली नाम इंद्रप्रस्थ है। महाभारत में यहीं पांडवों ने राज किया। अब समय है इतिहास को वापस लाने का!” — प्रवीण खंडेलवाल

दिल्ली के इतिहास में कई नाम दर्ज हैं, जो विभिन्न युगों और शासकों से जुड़े हैं। महाभारत काल में यह इंद्रप्रस्थ था, जहां पांडवों ने यमुना किनारे राजधानी बसाई और भगवान कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त किया। प्राचीन काल में ढिल्लिका/ढिल्ली के नाम से जाना गया, जिसकी स्थापना पहली शताब्दी ईसा पूर्व में राजा ढिल्लु ने की। तोमर वंश के अनंगपाल तोमर ने लालकोट बनवाया, जो पहला किला शहर था। चौहान वंश के पृथ्वीराज चौहान ने इसे किला राय पिथौरा के रूप में विस्तारित किया। गुलाम वंश के कुतुबुद्दीन ऐबक ने इसे किलेखोरी कहा और कुतुब मीनार की नींव रखी। खिलजी वंश के अलाउद्दीन खिलजी ने सिरी की स्थापना की और सिरी फोर्ट बनवाया। तुगलक वंश में गयासुद्दीन और मोहम्मद बिन तुगलक ने क्रमशः तुगलकाबाद और जहांपनाह बनाए, जो तीन किलों और तीन नामों का प्रतीक बने। फिरोज शाह तुगलक ने 1354 में फिरोजाबाद बसाया। मुगल काल में शाहजहां ने शाहजहांनाबाद की स्थापना की, जहां लाल किला और जामा मस्जिद बने। ब्रिटिश काल में 1911 में जॉर्ज पंचम ने राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित की और नई दिल्ली की नींव रखी।

इंद्रप्रस्थ वापसी: क्यों उठी मांग?

महाभारत कनेक्शन: दिल्ली को इंद्रप्रस्थ कहा जाता था, जहां पांडवों ने राज किया। पुरातत्व विभाग को यमुना किनारे महाभारत काल के अवशेष मिले हैं।

सांस्कृतिक गौरव: सांसद का कहना है कि नई दिल्ली ब्रिटिश नाम है, जबकि इंद्रप्रस्थ भारतीय इतिहास का प्रतीक है।

नाम बदलने की परंपरा: पिछले 10 सालों में अहमदाबाद → कर्णावती, इलाहाबाद → प्रयागराज, मुगलसराय → दीनदयाल उपाध्याय जैसे बदलाव हो चुके हैं।

प्रस्ताव पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया है। समर्थन में चांदनी चौक का एक व्यापारी बोला, “इंद्रप्रस्थ नाम से गर्व होगा!” वहीं RSS कार्यकर्ता ने कहा, “महाभारत का गौरव लौटेगा!” दूसरी तरफ विरोध में दिल्ली यूनिवर्सिटी का छात्र बोला, “नाम बदलने से ट्रैफिक जाम कम नहीं होगा!” और एक ट्विटर यूजर ने तंज कसा, “अब तो IGI को भी इंद्रप्रस्थ कहना पड़ेगा?”

क्या होगा अगला कदम?

गृह मंत्रालय प्रस्ताव पर विचार कर रहा है।

दिल्ली सरकार का कहना: “नाम बदलना केंद्र का अधिकार, लेकिन जनता की राय जरूरी।”

सर्वे की मांग: AAP ने कहा, “दिल्ली वालों से पूछो—क्या वे इंद्रप्रस्थ कहलाना चाहते हैं?”

मज़ेदार बात!

अगर नाम बदल गया, तो:

दिल्ली मेट्रो → इंद्रप्रस्थ मेट्रो

दिल्ली पुलिस → इंद्रप्रस्थ पुलिस

दिल्ली यूनिवर्सिटी → इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी (IU तो पहले से है!)

आप क्या सोचते हैं?

कमेंट करें: दिल्ली रहे या इंद्रप्रस्थ बने?

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