किन्नर अखाड़े में दो फाड़: टीना मां का इस्तीफा, कल बनेगा नया ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’—ममता कुलकर्णी विवाद की जड़
किन्नर अखाड़े में दो फाड़: टीना मां का इस्तीफा, कल बनेगा नया ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’—ममता कुलकर्णी विवाद की जड़
किन्नर समुदाय की धार्मिक संस्था में बड़ा संकट पैदा कर रही खबर सामने आयी है। महाकुंभ 2025 के बीच प्रयागराज के किन्नर अखाड़े में दो फाड़ हो गया है। अखाड़े की महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि (उर्फ टीना मां) ने 3 नवंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया, और उन्होंने 4 नवंबर को नया अखाड़ा बनाने की घोषणा की है। नए अखाड़े का नाम सनातनी किन्नर अखाड़ा रखा गया है। टीना मां ने कहा, “किन्नर अखाड़ा उसके मूल उद्देश्य से भटक गया है। हमारी विचारधारा अब मेल नहीं खाती।” यह फूट ममता कुलकर्णी को महामंडलेश्वर बनाने के पुराने विवाद से जुड़ी लग रही है, जो अखाड़े की एकता को तोड़ने का कारण बनी।
टीना मां का इस्तीफा: ‘अखाड़ा भटक गया रास्ते से’
टीना मां, जो UP किन्नर कल्याण बोर्ड की सदस्य भी हैं, ने इस्तीफा देते हुए कहा कि अखाड़ा किन्नरों के कल्याण के मूल उद्देश्य से दूर हो गया है। उन्होंने दैनिक भास्कर को बताया, “मैं महामंडलेश्वर रही, लेकिन अब नया ‘सनातनी किन्नर अखाड़ा’ बनाकर सनातन मूल्यों पर फोकस करेंगी।” यह इस्तीफा 2 नवंबर को आधिकारिक हो गया, और कल (4 नवंबर) नया अखाड़ा घोषित होगा। किन्नर अखाड़ा, जो 2015 में स्थापित हुआ, किन्नरों को सनातन धर्म से जोड़ने का माध्यम था, लेकिन आंतरिक कलह बढ़ गई है।
ममता कुलकर्णी विवाद: फूट की जड़
ममता कुलकर्णी को फरवरी 2025 में महाकुंभ के दौरान किन्नर अखाड़े ने महामंडलेश्वर बनाया था, लेकिन उनका फिल्मी बैकग्राउंड, अंडरवर्ल्ड कनेक्शन (दाऊद इब्राहिम से जुड़े आरोप) और सिर न मुंडाने जैसे नियमों का पालन न करने पर विवाद भड़का। अखाड़े के संस्थापक ऋषि अजय दास ने उन्हें पद से हटा दिया था, और लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी (अखाड़े की आचार्य) को भी हटा दिया गया। ममता ने इस्तीफा दिया था, लेकिन बाद में वापसी की कोशिश की। टीना मां का इस्तीफा इसी विवाद का परिणाम लगता है, जहां अखाड़े में ‘फर्जी भगवा चोला’ पहनने का आरोप लगा। अजय दास ने कहा, “ममता और लक्ष्मी का निष्कासन सही था, वे सनातन से भटक गईं।”
किन्नर समुदाय पर असर: एकता का संकट
किन्नर अखाड़ा, जो ट्रांसजेंडर समुदाय को सनातन धर्म से जोड़ने का प्रतीक था, अब दो फाड़ में है। नया अखाड़ा सनातन मूल्यों पर फोकस करेगा, लेकिन पुराने अखाड़े की एकता टूट गई है। समुदाय के नेता हिमांगी सखी ने कहा, “यह विवाद किन्नरों की छवि खराब कर रहा है।” महाकुंभ में अखाड़े की भूमिका महत्वपूर्ण रही, लेकिन यह फूट चुनावी साल में राजनीतिक साजिश का शक पैदा कर रही है।
यह घटना किन्नरों के सामाजिक-धार्मिक संघर्ष को उजागर कर रही है। कल नया अखाड़ा बनने से स्थिति साफ होगी।
